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Tuesday, 13 October, 2026
होमदेशपन्नू ने भारतीय उच्चायुक्त की गिरफ्तारी पर रखा 25 हजार डॉलर का इनाम

पन्नू ने भारतीय उच्चायुक्त की गिरफ्तारी पर रखा 25 हजार डॉलर का इनाम

भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने एक इंटरव्यू में कनाडा में ऐसे ‘आतंकी तत्वों’ की मौजूदगी पर चिंता जताई थी, जो भारतीय राज्य के खिलाफ हिंसा का महिमामंडन करते हैं. इसके बाद पन्नू ने धमकी दी है.

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नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिरंगा फहराने से रोकने के लिए 11 करोड़ रुपये का इनाम घोषित करने के एक साल से ज्यादा समय बाद, भारत द्वारा आतंकी घोषित और अलगाववादी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक बार फिर धमकी दी है. इस बार उसने कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश कुमार पटनायक को निशाना बनाया है. पटनायक ने नई दिल्ली और ओटावा के बीच कूटनीतिक रिश्तों को मुश्किल बनाने वाले “आतंकी तत्वों” को लेकर बयान दिया था.

अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो में पन्नू ने पटनायक को “नागरिकों के जरिए गिरफ्तार” कराने पर 25,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम देने का एलान किया. उसने भारतीय राजदूत को “खालिस्तान” के मुद्दे पर किसी सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने बहस करने की चुनौती भी दी.

पन्नू ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भी आलोचना की. उसने आरोप लगाया कि कार्नी ने नई दिल्ली के साथ व्यापार समझौता करने के लिए ऐसे सबूत छिपाए, जिनसे कथित तौर पर सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की भूमिका सामने आ सकती थी.

पन्नू ने भारत में रोके गए एक्स वीडियो में आरोप लगाया, “कनाडा सरकार के पास अब तक कनाडा में किए गए किसी भी अपराध के जो सबूत हैं, वे भारतीय मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के हैं, जिन्होंने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाई. कार्नी सरकार के पास सबूत हैं. उनके पास सबूत हैं, लेकिन वे अब मोदी के भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए इन सबूतों को छिपा रहे हैं.”

उसने कहा, “दिनेश पटनायक एक रीढ़विहीन चापलूस की तरह हैं, जो सुरक्षित जगह से कनाडा सरकार के कैमरों के सामने ही खालिस्तान समर्थक सिखों के खिलाफ बयान दे सकते हैं.” उसने आगे कहा, “मैं पटनायक को चुनौती देता हूं कि वे थोड़ी हिम्मत दिखाएं और किसी सार्वजनिक मंच पर खालिस्तान समर्थक सिखों का सामना करें.”

पन्नू का यह वीडियो पटनायक के उस बयान के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि कनाडा की जमीन पर सिखों के लिए अलग “मातृभूमि” की शांतिपूर्ण मांग और उसके समर्थन में प्रचार करने पर भारत सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. भारत को केवल उन “आतंकी तत्वों” की मौजूदगी पर आपत्ति है, जो भारतीय राज्य के खिलाफ हिंसा का महिमामंडन करते हैं.

पन्नू ने कहा, “अगर खालिस्तान के लिए शांतिपूर्ण तरीके से समर्थन जताने की इजाजत है, तो भारत में खालिस्तान के नारे लिखने पर सिख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है?”

इससे पहले, पिछले साल पन्नू ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोकने के लिए 11 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था. इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसके खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की थी.

एनआईए ने पन्नू के खिलाफ कुल सात मामले दर्ज किए हैं. इसके अलावा, कई राज्यों की पुलिस ने भी उसके खिलाफ करीब 100 मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में अलग-अलग तरह के आरोप शामिल हैं. इनमें एकदिवसीय विश्व कप के दौरान अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को बम से उड़ाने की धमकी देना और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक वॉइस नोट भेजना शामिल है. उस वॉइस नोट में संसद और लाल किले को बम से उड़ाने की कोशिशों की चेतावनी दी गई थी.

यह भी पढ़ें: पन्नू का दावा- एफबीआई और कनाडा पुलिस ने उसे धमकी को लेकर अलर्ट भेजे; बिश्नोई और गोल्डी बराड़ को ‘खालसा न्याय’ की चेतावनी

पटनायक ने क्या कहा

पिछले हफ्ते कनाडा के प्रसारक सीपीएसी को दिए एक लंबे इंटरव्यू में पटनायक ने कई मुद्दों पर बात की. इनमें लॉरेंस बिश्नोई का संगठित अपराध गिरोह, कनाडा में ऐसे “आतंकी तत्वों” की मौजूदगी जो भारतीय राज्य के खिलाफ हिंसा का महिमामंडन करते हैं, और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की तस्वीरें दिखाना शामिल था.

पटनायक ने कहा, “…मैं पहले दिन से कहता आ रहा हूं कि कनाडा के लोगों और भारतीयों समेत सभी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मान्यताओं के समर्थन में बात रखने का अधिकार है. चाहे वे खालिस्तान में विश्वास करते हों या अलग मातृभूमि की मांग करते हों. राजनीतिक रूप से हमें इससे बिल्कुल कोई परेशानी नहीं है. दरअसल, जैसा कि मैंने आपको बताया, भारत में राजनीतिक दल पिछले 40 साल से इसकी वकालत करते रहे हैं. इसलिए कनाडा के लोग जो कर रहे हैं, वह कोई नई बात नहीं है और हमने हमेशा इसका समर्थन किया है.”

उन्होंने कहा, “आपने हमें शांतिपूर्ण राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन पर कार्रवाई करते नहीं देखा होगा. हम बस इतना कहते हैं कि नकारात्मकता, गंदगी, आतंकी तत्व, हथियारों की तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और जबरन वसूली को इसमें शामिल न करें. इन चीजों को इस मामले में मत लाइए.”

पटनायक ने चरमपंथी तत्वों की ओर से इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह की हत्याओं का जिक्र किए जाने पर सवाल उठाया. इसके लिए उन्होंने 1970 में कनाडा के पूर्व मंत्री पियरे लापोर्टे के अपहरण और हत्या का उदाहरण दिया.

पटनायक ने कहा, “खालिस्तान समर्थकों को मेरे प्रधानमंत्री की हत्या की तस्वीरें लेकर प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. मैं आपको एक उदाहरण देता हूं. क्यूबेक आंदोलन के चरम के दौरान लापोर्टे नाम के एक मंत्री की हत्या कर दी गई थी. क्या आपको याद है? कल्पना कीजिए कि भारत में कोई पियरे लापोर्टे की मौत के पोस्टर लेकर घूमे, उसका महिमामंडन करे और कहे कि कनाडा के लोगों के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए. कनाडा में इसे किस तरह देखा जाएगा? आप क्या सोचेंगे? आप कहेंगे कि ये भारतीय क्या कर रहे हैं? वे हमारे एक मंत्री की हत्या का महिमामंडन क्यों कर रहे हैं? यहां भी यही बात है.”

उन्होंने आगे कहा, “जब खालिस्तान समर्थक मेरे प्रधानमंत्री की हत्या की तस्वीर दिखाते हैं, पंजाब के मुख्यमंत्री की आत्मघाती हमलावर के जरिए हत्या किए जाने की तस्वीर दिखाते हैं और फिर उसका महिमामंडन करते हैं, तो वे कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी ऐसा ही होगा. भारत के उच्चायुक्त के साथ भी ऐसा ही हुआ. कल्पना कीजिए कि भारत में इससे किस तरह की धारणा बनेगी.”

कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उन आरोपों के बाद नई दिल्ली और ओटावा के बीच कूटनीतिक टकराव के बारे में पूछे जाने पर, जिनमें उन्होंने कहा था कि निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार के “एजेंट” थे, पटनायक ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अलग-अलग धारणाओं के कारण बिगड़े थे. हालांकि, असल स्थिति इससे अलग थी.

पटनायक ने कहा, “भारत में यह धारणा काफी मजबूत हो गई थी कि कनाडा उन लोगों का समर्थन करता है, जो देश को तोड़ना चाहते हैं. कनाडा में यह धारणा थी कि भारत कनाडा में ऐसी कार्रवाई करता है, जो उसे नहीं करनी चाहिए. ये धारणाएं इतनी गहरी हो गईं कि लोग इन्हें सच मानने लगे. पिछले एक साल में… मुझे इस पद पर आए ठीक एक साल हो गया है, इसी महीने एक साल पूरा हुआ है… और इस दौरान हालात काफी बदले हैं. लोगों की धारणाएं बदली हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि हमने हर मुद्दे पर एक-दूसरे से बातचीत शुरू कर दी है. जब आप एक-दूसरे से बात करते हैं, तो आपको एहसास होता है कि धारणाएं हकीकत नहीं होतीं और जो बात बनाई गई है, वह जमीन पर असल में सच नहीं होती.”

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कनाडा में संगठित अपराध गिरोह के खिलाफ की गई कई कार्रवाइयां और बिश्नोई गिरोह को “आतंकी तत्वों” के रूप में घोषित करना, दोनों देशों के बीच बढ़ते तालमेल और सहयोग के उदाहरण हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के पद संभालने के बाद यह सहयोग खास तौर पर बढ़ा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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