नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक सेवारत अधिकारी ने शनिवार और रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर किए गए शारीरिक दुर्व्यवहार की “निष्पक्ष जांच” की मांग की है.
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराते हुए सहायक कमांडेंट राहुल सोलंकी ने एक्स पर मौजूद तीन वीडियो के लिंक भी लगाए. उन्होंने कहा कि ये वीडियो “पहली नज़र में दिखाते हैं” कि दिल्ली पुलिस और CAPF के जवान महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेते समय उनके साथ “शारीरिक रूप से गलत व्यवहार” कर रहे थे. उन्होंने इन वीडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग की.
मणिपुर में तैनात अधिकारी ने कहा है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित जवानों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए. उन्होंने यह दावा नहीं किया कि उन्होंने खुद सभी वीडियो की स्वतंत्र रूप से जांच की है.
NCW और NHRC के अध्यक्षों के अलावा, सोलंकी ने अपना पत्र दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को भी भेजा है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत केवल देश के एक “चिंतित नागरिक” के तौर पर अपनी “व्यक्तिगत हैसियत” में दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि वह सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा करने में पुलिस और अन्य वर्दीधारी जवानों की “मुश्किल ड्यूटी” से अच्छी तरह वाकिफ हैं.
सोलंकी ने अपनी शिकायत में लिखा, “मैं यह शिकायत भारत के एक चिंतित नागरिक के तौर पर पूरी तरह अपनी व्यक्तिगत हैसियत में दे रहा हूं. मैं संविधान, कानून के शासन और महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हूं. सोशल मीडिया पर चल रहे तीन वीडियो पहली नजर में दिखाते हैं कि पुलिस/CAPF के जवान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ शारीरिक रूप से गलत व्यवहार कर रहे हैं. मैं इन वीडियो के लिंक और उन अकाउंट या संगठनों की जानकारी केवल जांच के लिए साझा कर रहा हूं, जहां से मुझे ये वीडियो मिले. इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उन लोगों या संगठनों की ओर से कही गई किसी बात, विचार या रुख का समर्थन करता हूं. मैं यह दावा नहीं करता कि मैंने खुद इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से जांच की है.”
उन्होंने लिखा, “मैं वीडियो की निष्पक्ष जांच और फॉरेंसिक जांच का अनुरोध करता हूं. इसमें घटना की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग और उससे जुड़ी परिस्थितियों की जांच भी शामिल होनी चाहिए. अगर आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार पाए जाने वाले जवानों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. अगर वीडियो नकली या उसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए पाए जाते हैं, तो कानून के मुताबिक उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और भ्रामक सामग्री को हटाया जा सकता है.”
इसके अलावा, सोलंकी ने जमीन पर तैनात पुलिसकर्मियों, खासकर महिला प्रदर्शनकारियों से निपटने वाले जवानों के लिए उचित निर्देश और लैंगिक संवेदनशीलता की ट्रेनिंग देने की भी मांग की. इसका मकसद उनकी गरिमा, सुरक्षा और कानूनी अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करना है.
अभी पिछले महीने ही अधिकारी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर में सरकारी कर्मचारियों की हुई मौतों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी.
अप्रैल से जून 2024 के बीच हुए इन चुनावों के दौरान गर्मी की लहर के कारण ड्यूटी पर तैनात कई सरकारी और सुरक्षा अधिकारियों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं. सोलंकी केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को चुनौती दे रहे थे, जिसके बारे में उनका कहना था कि उसने चुनाव आयोग (ECI) को एक जगह पर इकट्ठा किए गए मौत के आंकड़े देने से बचा लिया था.
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