नई दिल्ली: दिल्ली के एक गुरुद्वारे के अंदर पुलिस के जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने नेताओं, जिनमें अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं और पार्टी के दूसरे पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था अकाल तख्त से संपर्क किया है.
दिल्ली पुलिस ने यह एफआईआर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) की शिकायत के बाद दर्ज की थी. कमेटी ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में कथित प्रदर्शन और वहां कामकाज में रुकावट डालने को लेकर शिकायत की थी.
घटनाओं की पूरी शुरुआत शनिवार को पुलिस की कार्रवाई के बाद हुई. बताया जाता है कि प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस के हनुमान रोड इलाके में स्थित गुरुद्वारे में शरण मांगी थी.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कन्वेनर आफताब सिंह विर्क ने दिप्रिंट को बताया था कि पुलिस अचानक गुरुद्वारे के अंदर घुस गई. उन्होंने आरोप लगाया, “उनके हाथों में लाठियां थीं और उनके सिर पर कोई कपड़ा नहीं था. उन्होंने जूते भी पहन रखे थे.”
विर्क के मुताबिक, पुलिस यह पक्का करने की कोशिश कर रही थी कि गुरुद्वारे के अंदर कोई प्रदर्शनकारी मौजूद न हो. विर्क ने दिप्रिंट से कहा, “वहां अफरा-तफरी मची हुई थी. वे लोगों को डराने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने मुझसे भी पूछताछ की, लेकिन उन्हें लगा कि मैं श्रद्धालु हूं.”
Regarding the video circulated on social media, alleging entry by police staff in Gurdwara Bangla Sahib, wherein some police staff is shown wearing shoes
In the circulated video some police staff is shown walking in the common passage, used by all devotees to reach the point… pic.twitter.com/PdVkKvHcwI
— DCP New Delhi (@DCPNewDelhi) October 10, 2026
इस बीच, दिल्ली पुलिस का कहना है कि वीडियो को “एक सम्मानित धार्मिक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर गलत इरादे से फैलाया गया और इससे धार्मिक सद्भाव को नुकसान पहुंच सकता था.”
एक बयान में, नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मी उस साझा रास्ते से होकर उस जगह तक गए थे, जहां गुरुद्वारे में प्रवेश करने से पहले जूते उतारे जाते हैं. इस रास्ते का इस्तेमाल सभी श्रद्धालु करते हैं.
उन्होंने कहा, “गुरुद्वारे में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए यही प्रक्रिया है. इसे दिखाने वाला वीडियो भी साथ में लगाया गया है.”
‘अफरा-तफरी और हंगामा किया’
ऊपर बताई गई एफआईआर में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के विधायकों/कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के नाम दिए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि इन लोगों ने “गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में जानबूझकर हंगामा किया और इसके बाद भ्रामक वीडियो फैलाए.”
यह एफआईआर संसद मार्ग पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 189(2), 189(3), 189(5), 190, 223(A), 299 और 329 के तहत दर्ज की गई.
दिप्रिंट द्वारा देखी गई एफआईआर में कालका ने कहा, “आम आदमी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता/समर्थक एक साथ मिलकर गुरुद्वारे परिसर में दाखिल हुए. उन्होंने परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और अफरा-तफरी और हंगामा किया. इस तरह उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों के लिए गुरु घर की पवित्रता का इस्तेमाल करने की कोशिश की. गुरुद्वारा प्रबंधन और सेवादारों ने केवल शांति बनाए रखने, परिसर की पवित्रता बचाने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए दखल दिया.”
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी भारत सरकार द्वारा दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत बनाई गई एक कानूनी संस्था है. दिल्ली में ऐतिहासिक और स्थानीय गुरुद्वारों का प्रबंधन करने के अलावा, यह शिक्षण संस्थान, अस्पताल, वृद्धाश्रम और पुस्तकालय भी चलाती है.
एफआईआर में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने “पवित्र परिसर के अंदर राजनीतिक नारे भी लगाए, जिससे वहां का धार्मिक माहौल बिगड़ा और गुरु घर की पवित्रता और मर्यादा का उल्लंघन हुआ.” एफआईआर के मुताबिक, पूजा के एक सम्मानित स्थान के अंदर जानबूझकर की गई ऐसी राजनीतिक गतिविधि से “सिख संगत की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है.”
दिल्ली पुलिस से अनुरोध किया गया कि वह वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान करे, पता लगाए कि उन्हें गुरुद्वारे परिसर में आने के लिए किसने इकट्ठा किया, आयोजन किया और निर्देश दिए और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करे.
कालका ने एफआईआर में आगे कहा, “इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि इसके बाद आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं ने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट फैलाए. इनमें घटना को गलत तरीके से पेश किया गया और खुद गुरुद्वारा प्रबंधन/कमेटी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया.”
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के व्यवहार और हंगामे के पीछे की परिस्थितियों के बावजूद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से इस बात का समर्थन किया और इसे और फैलाया.
एफआईआर के मुताबिक, घटनाओं के इस क्रम से गंभीर आशंका पैदा होती है कि गुरुद्वारे में हंगामा करना और उसके बाद चुनिंदा तथा भ्रामक वीडियो फैलाना किसी ऐसी सोची-समझी कोशिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद पूजा के स्थान पर विवाद पैदा करना, धार्मिक भावनाएं भड़काना, गुरुद्वारा प्रबंधन की छवि खराब करना और इससे पैदा हुई स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाना था.
कालका ने कहा, “गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब देश के सबसे सम्मानित सिख धार्मिक संस्थानों में से एक है.” उन्होंने कहा, “किसी भी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति को इसके पवित्र परिसर को राजनीतिक विरोध प्रदर्शन, टकराव या प्रचार का ठिकाना बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. गुरु घर का इस तरह जानबूझकर गलत इस्तेमाल करना गंभीर मामला है और इससे सिख संगत की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है.”
AAP ने अकाल तख्त का रुख किया
इसके बाद आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के उपाध्यक्ष जरनैल सिंह ने इस मामले में दखल दिया और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) पर सवाल उठाए. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “एक पवित्र सिख धार्मिक स्थल पर संगत के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया? क्या राजनीतिक दबाव को हमारे गुरुद्वारों की पवित्रता से ऊपर रखा जाएगा?”
उन्होंने आगे कहा, “संगत की गरिमा, हमारे धार्मिक संस्थानों की पवित्रता और सिख समुदाय के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.”
जरनैल सिंह ने मांग की कि डीएसजीएमसी इन सवालों का जवाब दे और उसे इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाए. उन्होंने गुरुद्वारे के परिसर के अंदर पुलिस के जाने को लेकर भी डीएसजीएमसी से जवाब मांगा.
मंगलवार को आम आदमी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में हुई घटना को लेकर अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब का रुख किया. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस मामले में जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की जाए.
दिल्ली के गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के प्रवेश को लेकर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज की ओर से बोलते हुए जसकरण सिंह ने कहा कि गुरुद्वारों की एक तय मर्यादा (धार्मिक आचार संहिता) होती है, जिसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों के अंदर राजनीतिक गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों की इजाजत नहीं है. हालांकि, गुरमत (गुरु की शिक्षा) की सोच और सिख सिद्धांतों पर आधारित संघर्षों के तहत ऐसा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि किसी को भी विरोध प्रदर्शन से जुड़े बैनर या तख्तियां लेकर गुरुद्वारे में प्रवेश नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “अगर पुलिस गुरुद्वारे के परिसर में दाखिल हुई, तो उसे ऐसा करने से रोकना गुरुद्वारा प्रबंधन की जिम्मेदारी थी.”
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे के अंदर तय मर्यादा बनाए रखना डीएसजीएमसी का कर्तव्य है. उन्होंने आगे कहा, “श्री अकाल तख्त साहिब को इस मामले में और शिकायतें व पत्र मिले हैं, जिनकी जांच की जाएगी.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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