नई दिल्ली: भारत ने असद आलम सियाम को भारत में बांग्लादेश का अगला उच्चायुक्त नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. इससे बांग्लादेश के मौजूदा विदेश सचिव के लिए नवंबर के पहले हफ्ते तक नई दिल्ली में अपना पद संभालने का रास्ता साफ हो गया है.
जैसा कि दिप्रिंट ने पहले खबर दी थी, बांग्लादेश ने जुलाई में सियाम की नियुक्ति के लिए भारत से मंजूरी मांगी थी. इस प्रक्रिया में दो महीने से ज्यादा का समय लगा. नए उच्चायुक्त के अगले महीने की शुरुआत में नई दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है. इसके बाद उनके औपचारिक रूप से पद संभालने की प्रक्रिया तय की जाएगी.
भारत में बांग्लादेश के पिछले उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह सप्ताहांत में देश से रवाना हो गए. अब वह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे.
ये कूटनीतिक बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब नई दिल्ली और ढाका के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे के लिए जरूरी माहौल बनाने को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत जारी है. इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि नवंबर का आखिरी हफ्ता दौरे के लिए एक संभावित समय हो सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि दौरे की तारीख, उसके स्वरूप और कार्यक्रम को लेकर बातचीत अभी जारी है.
भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक नई दिल्ली का संक्षिप्त दौरा किया था. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने राजधानी में दोनों देशों के संबंधों की स्थिति पर कई बैठकें कीं. त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी दोनों देशों के संबंधों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी.
पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बढ़ा है. इसकी एक बड़ी वजह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली में लगातार जारी गतिविधियां हैं. दिप्रिंट की खबर के मुताबिक, पिछले हफ्ते बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने हसीना का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत से ढाका के खिलाफ गतिविधियां करने वाले किसी “आतंकवादी” को रोकना ही “सामान्य नियम” होना चाहिए.
कबीर ने कहा था कि बांग्लादेश सरकार भारत में वांछित किसी भी “आतंकवादी” को बांग्लादेश की जमीन से भारत सरकार के खिलाफ गतिविधियां करने की अनुमति कभी नहीं देगी. उन्होंने कहा कि ढाका को भी भारत से इसी तरह के “जवाबी सहयोग” की उम्मीद है.
हसीना ने 5 अगस्त को नई दिल्ली में साउथ एशिया के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. यह उनके सत्ता से हटाए जाने के दो साल बाद हुई थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से ढाका में नाराजगी बढ़ गई. बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने साफ कहा कि रहमान का भारत दौरा तभी होगा, जब इसके लिए “अनुकूल माहौल” तैयार हो जाएगा.
हालांकि, पिछले हफ्ते अपनी टिप्पणी में कबीर ने भारतीय सरकार से त्रिवेदी की ओर से दोनों देशों के संबंधों की स्थिति पर दी गई जानकारी पर ध्यान देने की अपील की थी. उन्होंने यह उम्मीद भी जताई थी कि दोनों देशों के बीच जल्द ही द्विपक्षीय दौरा हो सकता है.
दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क और बातचीत के तहत बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सचिव मंजूर मुर्शेद चौधरी मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) के गृह मंत्रियों की बैठक में ढाका का प्रतिनिधित्व करेंगे.
चौधरी सोमवार को नई दिल्ली पहुंच गए. बांग्लादेश इस समय बिम्सटेक का अध्यक्ष है. हालांकि, ढाका में यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के संबंधों में किसी भी तरह की सकारात्मक प्रगति द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही होनी चाहिए.
भारत ने पिछले महीने बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर रहमान को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने का न्योता दिया था. भारत ने उन्हें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय दौरे के लिए भी आमंत्रित किया था.
इस साल के शुरुआती कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय दौरे हुए थे. बांग्लादेश के फोर्सेज इंटेलिजेंस के महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने मार्च में नई दिल्ली का दौरा किया था. इसके बाद भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख पराग जैन ढाका गए थे.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लंबे समय से बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के साथ संपर्क बनाए हुए हैं. दिप्रिंट ने पहले खबर दी थी कि त्रिवेदी भी दोनों देशों के बीच बातचीत के एक अहम माध्यम बनकर उभरे हैं.
सियाम को मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने ढाका में विदेश सचिव नियुक्त किया था. अब उन्हें भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण संबंधों को संभालने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब प्रधानमंत्री तारिक रहमान दुनिया के अलग-अलग देशों में बांग्लादेश के राजदूतों की नियुक्तियों में बदलाव कर रहे हैं.
गंगा जल संधि पर समाधान निकालने के लिए दोनों देशों के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है. यह संधि दिसंबर के आखिर में समाप्त होने वाली है. तीन दशक पुरानी इस संधि ने दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय से चले आ रहे एक बड़े विवाद को सुलझाया था और सीमा पार बहने वाली नदियों के पानी को साझा करने का तरीका तय किया था.
भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां साझा हैं. हालांकि, तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा अब भी अनसुलझा है. चीन ढाका को तीस्ता विकास परियोजना में मदद देने में दिलचस्पी दिखा रहा है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: इमरान के पूर्व सहयोगी बोले—आसिम मुनीर पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा