पचपदरा/जयपुर, चार जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान में पचपदरा रिफाइनरी परियोजना में देरी के लिए शनिवार को राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री के बयान को ‘भ्रामक’ बताते हुए कहा कि परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत कार्य कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पूरा हो चुका था।
राजस्थान के बालोतरा क्षेत्र में देश के पहले ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस परियोजना के लिए वर्ष 2017 में समझौता हुआ था, लेकिन 2018 से 2023 के बीच राजस्थान में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में काम की गति काफी धीमी पड़ गई।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार के सहयोग की कमी के कारण परियोजना का काम लगभग ठप पड़ गया था। जब ‘डबल इंजन’ सरकार आई तो काम ने गति पकड़ी। आज हम इस परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं। हम केवल शिलान्यास ही नहीं करते, बल्कि परियोजनाओं को पूरा कर उनका उद्घाटन भी करते हैं।”
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री का सरकारी कार्यक्रम में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता की तरह व्यवहार करना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है और उन्होंने मंच से ‘भ्रामक’ बातें कही हैं।
गहलोत ने कहा, “ये दावे हास्यास्पद हैं। प्रधानमंत्री को इस परियोजना से जुड़े लोगों से बात करनी चाहिए थी।”
उन्होंने दावा किया कि कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस सरकार के दौरान परियोजना का काम नहीं रुका और 2018 से 2023 के बीच लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया।
गहलोत ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने अपने बजट में स्वयं परियोजना को अगस्त 2025 तक पूरा करने की घोषणा की थी, जिससे स्पष्ट है कि परियोजना में लगभग एक वर्ष की देरी हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में इस तरह के बयान अनुचित हैं और यह परियोजना की वास्तविक प्रगति को नहीं दर्शाते।
इससे पहले, दिन में गहलोत ने रिफाइनरी के शुभारंभ को ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया और कहा कि यह परियोजना कांग्रेस सरकार के शासनकाल में परिकल्पित और प्रारंभ की गई थी।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में रिफाइनरी स्थापित करने के प्रयास 2008 में कांग्रेस सरकार आने के बाद गंभीरता से शुरू हुए थे।
गहलोत ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ-साथ पूर्व पेट्रोलियम मंत्रियों मुरली देवड़ा और वीरप्पा मोइली का भी आभार जताया, जिनके सहयोग से परियोजना को आगे बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का उद्घाटन 2013 में सोनिया गांधी और मोइली द्वारा किया गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से पांच वर्षों तक काम रुका रहा, जिससे परियोजना लागत में वृद्धि हुई।
गहलोत ने दावा किया कि 2018 में कांग्रेस सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद परियोजना को प्राथमिकता दी गई और कोविड-19 जैसी चुनौतियों के बावजूद लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दृष्टि केवल रिफाइनरी तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक पेट्रोकेमिकल जोन विकसित करने की भी योजना थी, जिसके लिए भूमि आवंटित की गई थी।
गहलोत ने कहा कि इस जोन में प्लास्टिक आधारित उद्योग स्थापित किए जाने थे, जिससे लाखों रोजगार सृजित होते। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि आवंटन के बावजूद यह परियोजना फिलहाल ठंडे बस्ते में है।
उन्होंने मांग की कि रिफाइनरी के उद्घाटन के साथ ही पेट्रोकेमिकल जोन के कार्य को भी तेज किया जाए और इसमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि रोजगार का लाभ बाहरी लोगों के बजाय राजस्थान के निवासियों को मिले।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत
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