तिरुवनंतपुरम, तीन नवंबर (भाषा) संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को समिति की हालिया बैठक में छह राज्यों के मुख्य सचिवों की अनुपस्थिति पर चिंता जताई और नीतियों तथा योजनाओं पर विधायी निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को ऑडिट की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, और समग्र शिक्षा अभियान, स्वच्छ भारत मिशन तथा प्रधानमंत्री जन धन योजना जैसी सरकार की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
संसद और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (पीएसी) के अध्यक्षों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, वेणुगोपाल ने कहा कि पीएसी की बैठकों को पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि इनका उद्देश्य कमियां निकालना नहीं, बल्कि नीतियों में सुधार करना है।
उन्होंने कहा कि जब समिति सबूत मांगती है, तो इसका मकसद सिर्फ कमियां निकालना नहीं होता, बल्कि इसका उद्देश्य योजनाओं और नीतियों में सुधार करना है, जिससे अंततः नागरिकों का ही भला होता है।
वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, संसद में समिति की पिछली बैठक में छह राज्यों के मुख्य सचिवों में से कोई भी शामिल नहीं हुआ।’’
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि वह ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करें, ताकि ‘‘समिति के अधिकार, और इसके माध्यम से संसद के अधिकार का उचित सम्मान हो सके।’’
दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र केरल विधानसभा में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री वीडी सतीशन सहित अन्य लोग भी शामिल हुए।
वेणुगोपाल ने कहा कि पीएसी और कैग के बीच का संबंध विधायी नियंत्रण की इस प्रक्रिया के केंद्र में है।
भाषा नेत्रपाल माधव
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