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Wednesday, 14 October, 2026
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10 अक्टूबर को मेट्रो बंद करने के आरोप पर DMRC का जवाब, कहा—सभी ट्रेनें तय समय पर चलीं

डीएमआरसी ने कहा कि 10 अक्टूबर को सभी 271 ट्रेनें तय समय के अनुसार चलीं. 303 में से सिर्फ 45 स्टेशनों पर प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक लगाई गई थी.

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नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन करने से इनकार किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाएं बंद करने के बारे में दिल्ली पुलिस की अधिसूचना जरूरत से ज्यादा सख्त लगती है, क्योंकि इसमें जरूरी सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि मेट्रो सेवाओं पर रोक जरूरत के हिसाब से और सीमित तरीके से लगाई जानी चाहिए. साथ ही, इस फैसले का व्यापक रूप से प्रचार किया जाना चाहिए.

डीएमआरसी ने अपने 23 पन्नों के हलफनामे में कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाएं चालू थीं और 303 में से सिर्फ 45 स्टेशनों पर प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक लगाई गई थी. सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई थी और उस दिन सभी 271 ट्रेनों ने तय समय के अनुसार अपनी सभी 157 यात्राएं पूरी की थीं.

हालांकि, 10 अक्टूबर को मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई. उस दिन करीब 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया, जबकि महीने के सामान्य दूसरे शनिवार को यह संख्या करीब 58 लाख होती है. हलफनामे के मुताबिक, यात्रियों की संख्या में इस गिरावट की वजह विरोध प्रदर्शन था. इसके कारण यात्रियों ने उस दिन घर पर ही रहने का फैसला किया. डीएमआरसी ने कहा कि यात्रियों की संख्या में कमी मेट्रो सेवाएं बंद होने की वजह से नहीं आई थी.

यह हलफनामा डीएमआरसी की ओर से उस अवमानना नोटिस के जवाब में दिया गया है, जो रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने उसे जारी किया था. शीर्ष अदालत ने उस दिन विशेष सुनवाई करते हुए कई अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई की थी. इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों ने 9 अक्टूबर के अदालत के आदेश का पालन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगा. दिल्ली पुलिस की ओर से भी उसी दिन जवाब दाखिल किए जाने की उम्मीद है.

खास बात यह है कि केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के पूंजी विकास विभाग की सचिव डी. थारा की ओर से दाखिल हलफनामे की शुरुआत बिना किसी शर्त के माफी मांगने से होती है. इसमें दावा किया गया है कि 9 अक्टूबर का आदेश डीएमआरसी का पक्ष सुने बिना पारित किया गया था और यह आदेश डीएमआरसी को कभी दिया ही नहीं गया.

हलफनामे में कहा गया है कि 9 अक्टूबर का आदेश याचिकाकर्ताओं की इस दलील पर आधारित था कि सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. हलफनामे के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को जो अधिसूचना जारी की थी, उसमें मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद करने का आदेश नहीं था. अधिसूचना में 57 स्टेशनों के प्रवेश और बाहर निकलने वाले गेट बंद करने की बात कही गई थी. यह फैसला कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के अपने आकलन के आधार पर लिया गया था.

हालांकि, 10 अक्टूबर को पुलिस के संशोधित संदेश के बाद पाबंदियां कम कर दी गईं. मेट्रो यात्रियों के प्रवेश और बाहर निकलने पर रोक वाले स्टेशनों की संख्या 57 से घटाकर 45 कर दी गई. हलफनामे में कहा गया है कि इन स्टेशनों को भी 10 अक्टूबर की रात 10 बजे फिर से खोल दिया गया था.

इन स्टेशनों के बंद होने से मेट्रो नेटवर्क का सिर्फ 15 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ, जबकि 258 स्टेशन पूरी तरह चालू रहे.

राजीव चौक, कश्मीरी गेट, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, हौज खास, दिल्ली हाट-आईएनए और नेताजी सुभाष प्लेस सहित उन 45 स्टेशनों में से 14 पर मेट्रो बदलकर दूसरी लाइन में जाने की सुविधा बिना किसी रुकावट के जारी रही.

12 अक्टूबर को पुलिस के निर्देश मिलने के बाद छह स्टेशनों को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रखा गया था. इनमें से जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशनों पर बाहर निकलने वाले गेटों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई थी.

हलफनामे में कहा गया है कि इन निर्देशों के बारे में लोगों को पर्याप्त जानकारी दी गई थी. मेट्रो सेवाओं पर लगी पाबंदियों की जानकारी अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों पर साझा की गई थी. संचालन नियंत्रण केंद्र और ट्रेन संचालकों की ओर से नियमित रूप से ऑडियो घोषणाएं भी की गई थीं.

सभी मेट्रो स्टेशनों पर सूचना वाले बोर्ड लगाए गए थे. डीएमआरसी की वेबसाइट और सारथी ऐप पर भी मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और बाहर निकलने वाले गेट बंद होने की ताजा जानकारी दी गई थी.

जमीन पर व्यवस्था संभालने के लिए भी अतिरिक्त कर्मचारियों और मार्शलों को प्रमुख स्टेशनों पर तैनात किया गया था. वे तुरंत स्थिति पर नजर रखने और पुलिस के साथ तालमेल बनाने का काम कर रहे थे.

हलफनामे में कहा गया है कि मेट्रो का संचालन सुचारू बनाए रखने के लिए डीएमआरसी ने कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के आकलन और निर्देशों के अनुसार ही काम किया. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी जरूरतों के हिसाब से ही पाबंदियां लगाई गई थीं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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