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Saturday, 23 May, 2026
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नोएडा प्रदर्शन केस: एक्टिविस्ट्स ने SC से कहा—पुलिस के लोगों ने WhatsApp ग्रुप में ‘घुसपैठ’ की

वकीलों का आरोप है कि ग्रुप में एक महिला को देखने के बाद सदस्यों ने उसकी पहचान की पुष्टि के लिए एक SI को बुलाया था; नोएडा पुलिस ने इस दावे से इनकार किया है और किसी और की जगह खुद को पेश करने के आरोप में एक दूसरे व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.

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नई दिल्ली: 13 अप्रैल को नोएडा में हुए मजदूर प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार दो एक्टिविस्टों के वकीलों ने 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एक अहम व्हाट्सऐप ग्रुप की चैट में बार-बार प्रदर्शनकारियों से “शांतिपूर्ण” रहने और “तोड़फोड़” से बचने की अपील की गई थी. इससे पुलिस के उस आरोप का खंडन होता है कि उन्होंने दंगे भड़काए थे.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोएडा पुलिस की एक सब-इंस्पेक्टर और एक DCP के ड्राइवर ने “ऋचा ग्लोबल नोएडा” नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप में घुसपैठ की और हिंसा भड़काने के लिए भड़काऊ मैसेज डाले. इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान “पूरा रास्ता जाम” करने की अपील भी शामिल थी. पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है.

गिरफ्तार दो एक्टिविस्टों—इंजीनियर आदित्य आनंद और ऑटो ड्राइवर व ट्रेड यूनियन एक्टिविस्ट रूपेश रॉय—की ओर से पेश वकीलों ने उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे के जवाब में अदालत से कहा कि ग्रुप के सदस्य “लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की वकालत कर रहे थे और साफ तौर पर हिंसा से बचने की बात कह रहे थे.”

100 से ज्यादा सदस्यों वाला यह व्हाट्सऐप ग्रुप उन मजदूर प्रदर्शनों के केंद्र में है, जो हरियाणा सरकार द्वारा इस साल की शुरुआत में मजदूर अशांति के बाद न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा के बाद मानेसर से नोएडा तक फैल गए थे.

प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में कई FIR दर्ज की गईं और 300 से ज्यादा मजदूरों, एक्टिविस्टों, छात्रों और पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया. रिचा ग्लोबल एक बड़ा टेक्सटाइल निर्यातक है, जो इन प्रदर्शनों के केंद्र में था.

सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में आरोप लगाया गया कि मजदूरों को कई व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुपों के जरिए संगठित किया गया, जिनमें “ऋचा ग्लोबल नोएडा”, “अगेंस्ट लेबर कोड”, “हंड्रेड फ्लावर्स ग्रुप” और “बिगुल मीडिया टेलीग्राम ग्रुप” शामिल थे. इन ग्रुपों में प्रदर्शन जारी रखने के लिए मैसेज, वीडियो और वॉइस नोट्स साझा किए गए.

वकील मणिक गुप्ता और पूजा शर्मा की ओर से दाखिल यह जवाब सुप्रीम कोर्ट में दायर उन याचिकाओं का हिस्सा है, जिनमें अवैध हिरासत और हिरासत में यातना देने का आरोप लगाया गया है. दोनों आरोपी अप्रैल से जेल में हैं. आनंद को 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था जबकि रूपेश को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था.

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आरोप “साफ तौर पर झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए और राजनीतिक मकसद से लगाए गए” हैं और ये “जबरन दिलवाए गए बयानों और फर्जी बरामदगी” पर आधारित हैं.

सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए दस्तावेजों में व्हाट्सऐप ग्रुप की चैट का विस्तार से जिक्र किया गया, जिसमें बाहरी लोगों के शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी.

याचिका में शामिल एक मैसेज में लिखा था, “दोस्तों, हम यहां तोड़फोड़ करने नहीं आए हैं. हमें शांतिपूर्ण हड़ताल करनी है.” एक अन्य मैसेज में कहा गया, “उन्होंने हमारे बीच कुछ अराजक तत्व घुसा दिए हैं. हमें उन्हें बाहर निकालना होगा.”

‘घुसपैठ’

व्हाट्सऐप ग्रुप में कथित पुलिस अधिकारी और कथित DCP ड्राइवर की पहचान कैसे हुई, इस पर याचिका में कहा गया कि ग्रुप के सदस्यों ने चैट से उनके फोन नंबर लिए और पहचान की पुष्टि के लिए उन्हें कॉल किया.

याचिका में कहा गया, “व्हाट्सऐप ग्रुप के सदस्यों ने SI बीना को उनकी पहचान की पुष्टि के लिए कॉल किया और उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हूं. मैं नोएडा के पुलिस स्टेशन 142 से बात कर रही हूं.’”

नोएडा पुलिस ने इनकार किया कि कोई DCP ड्राइवर प्रदर्शन में शामिल था. एक अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “वह DCP का ड्राइवर नहीं है. हमने उसे किसी और की पहचान बनाकर पेश होने के आरोप में गिरफ्तार किया है.” अधिकारी ने यह भी कहा कि SI बीना के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जा रही है.

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने दिप्रिंट से कहा कि सोशल मीडिया पर एक “प्रचार” पोस्ट और वीडियो फैलाया जा रहा है, जिसमें झूठा दावा किया गया कि अनिल कुमार कोई सरकारी कर्मचारी है और UP पुलिस अधिकारी या DCP का ड्राइवर है.

मिश्रा ने कहा, “अनिल सरकारी कर्मचारी नहीं है. उसने कभी किसी पुलिस अधिकारी के ड्राइवर के तौर पर काम नहीं किया. वह दिल्ली की एक संस्था में निजी ड्राइवर के तौर पर काम करता है.” उन्होंने कहा कि कुमार का फिलहाल रिचा ग्लोबल या किसी दूसरी कंपनी से कोई संबंध नहीं है.

मिश्रा ने कहा कि नोएडा पुलिस ने “गोपनीय खुफिया जानकारी” के आधार पर 20 मई को 32 वर्षीय अनिल कुमार को नया गांव से गिरफ्तार किया.

उन्होंने कहा कि कुमार करीब दो साल पहले रिचा ग्लोबल में काम कर चुका है.

मिश्रा ने यह भी कहा कि आरोप फैलाने वाले लोग भी मान रहे हैं कि अनिल ने ग्रुप में भड़काऊ मैसेज पोस्ट किए थे. मिश्रा ने कहा, “अनिल को गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने रिचा ग्लोबल ग्रुप में नहीं जोड़ा था. जांच में सामने आया है कि उसे एक ऐसे समूह ने जोड़ा था जो मजदूर आंदोलन के नाम पर हिंसा भड़का रहा था.” उन्होंने कहा कि पुलिस उन पोस्टों की जांच कर रही है, जिनसे कथित तौर पर हिंसा भड़काई गई.

नोएडा DCP (सेंट्रल) शैलेंद्र कुमार सिंह ने दिप्रिंट से कहा कि आगे की कोई भी बात राज्य सरकार के हलफनामे के जरिए अदालत में रखी जाएगी. उन्होंने कहा, “कानून अपना काम कर रहा है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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