कोलकाता, 30 अक्टूबर (भाषा) नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने यादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) में दक्षिणपंथी समूहों के कथित प्रवेश पर हैरानी जताई और शैक्षणिक परिसरों में ‘‘राजनीतिक हिंसा’’ के खिलाफ अधिक मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की है।
‘जेयू ग्लोबल एलुमनी एसोसिएशन’ के संस्थापक शुभेंदु भद्र को भेजे एकजुटता संदेश में सेन ने विश्वविद्यालय में हुई घटनाओं पर ‘‘गहरी पीड़ा’’ जताई।
उन्होंने करीब सात दशक पहले इसी विश्वविद्यालय से अपने शिक्षण करियर की शुरुआत की थी।
सेन ने अपने संदेश में कहा, ‘‘यादवपुर विश्वविद्यालय पर हुए भयानक हमले के बारे में सुनकर मैं हैरान हूं। लोगों को राजनीतिक हिंसा से बचाने की जरूरत है। मेरे देश के अन्य सभी लोगों के साथ-साथ अलग-अलग परिसरों में शिक्षा प्राप्त कर रहे लोगों को भी समर्थन की जरूरत है।’’
सेन का यह संदेश बृहस्पतिवार को पूर्व छात्रों की एक बैठक में पढ़कर सुनाया गया।
अर्थशास्त्री ने संस्थान के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा, ‘‘यादवपुर विश्वविद्यालय वह जगह है, जहां मैंने 70 साल पहले अपने शिक्षण जीवन की शुरुआत की थी और इस मशहूर विश्वविद्यालय के साथ मेरा जुड़ाव बहुत गहरा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हिंसा से मुक्ति हम सभी का साझा अधिकार है। जिस सांप्रदायिक सोच के कारण यह हिंसा भड़काई गई है, उसकी बिना किसी हिचकिचाहट के निंदा की जानी चाहिए।’’
सेन का यह संदेश विश्वविद्यालय परिसर में दक्षिणपंथी समूहों, विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कथित प्रवेश और इसके बाद वामपंथी छात्र संगठनों -स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), फेट्सू, एआईडीएसओ और एसबीवीपी – के साथ हुई झड़पों की पृष्ठभूमि में आया है।
एबीवीपी और एसएफआई के सदस्यों के बीच 19 अगस्त को झड़पें शुरू हुईं, जो अगले दिन भी जारी रहीं। इन घटनाओं में कई छात्र घायल हो गए।
भाषा शफीक सुरेश
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