नई दिल्ली: दिल्ली के एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी. मजिस्ट्रेट ने कहा कि दोनों “कानून की कोई परवाह नहीं करते और प्रतिबंधित किए जा चुके इलाकों में प्रदर्शन करने के लिए बार-बार लोगों को बुलाते हैं.”
मजिस्ट्रेट ने कहा कि “मेरे सामने रखे गए आशंका के आधारों से साफ तौर पर लगता है कि दोनों का व्यवहार सही नहीं है.” उन्होंने जमानत के लिए पेश किए गए जमानतदारों को भी खारिज कर दिया. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी तस्वीरों में “मेल नहीं है.”
सोमवार को यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब दास और रांका को पिछले हफ्ते भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था. आरोप है कि उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए अपने बांड का उल्लंघन किया.
‘लोगों को जुटाया और प्रदर्शन के लिए उकसाया’
संसद मार्ग पुलिस थाने के थाना प्रभारी ने दास और रांका की न्यायिक हिरासत पांच दिन बढ़ाने के लिए आवेदन दिया था. जांच अधिकारी ने कहा कि “हाल के घटनाक्रम के कारण अब भी खतरा बना हुआ है. इस मामले में पहले सुनवाई करने वाले मजिस्ट्रेट को एक गुमनाम व्हाट्सऐप संदेश/संदेश के रूप में सूचना मिली थी. इसके संबंध में अलग से डेली डायरी (डीडी) में एंट्री दर्ज की गई है.”
जांच अधिकारी ने आगे कहा कि दोनों आरोपी सीजेपी के सदस्य हैं और “उन्होंने आम लोगों को जुटाया और उन्हें जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने के लिए उकसाया. जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया गया है.”
जांच अधिकारी ने अपने वकील की मदद से दलील दी कि “इससे पहले भी आरोपियों ने प्रदर्शन की अनुमति ली थी. कानून के मुताबिक उन्हें यह अनुमति सिर्फ इस भरोसे पर दी गई थी कि वे अनुमति की शर्तों का पूरी तरह पालन करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.”
जांच अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने दक्षिण-पश्चिम जिले के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने 11 अक्टूबर को दिए गए अपने लिखित भरोसे का उल्लंघन किया. इसके बाद उन्होंने एक बार फिर आम लोगों को अपनी मांगों और प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर जुटने को कहा. इससे साफ तौर पर आशंका होती है कि वे फिर कोई अपराध कर सकते हैं.
आवेदन में कहा गया, “यह भी बताया जाता है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बार-बार जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस जैसी ऐसी जगहों पर प्रदर्शन करने की अपील की है, जिन्हें प्रदर्शन के लिए तय जगह घोषित नहीं किया गया है. प्रदर्शन के लिए दूसरी जगहों को तय किया गया है, लेकिन आरोपी प्रतिबंधित की जा चुकी जगह पर प्रदर्शन करने की जिद पर अड़े हैं.”
वहीं, आरोपियों के वकील ने दलील दी कि “आरोपियों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए” और “वे दोबारा यह अपराध नहीं करेंगे.” उन्होंने कहा, “यह भी बताया गया है कि हिरासत बढ़ाने के लिए दिए गए आवेदन में ऐसी कोई आशंका नहीं जताई गई है कि आरोपी दोबारा अपराध कर सकते हैं. यह भी कहा गया कि उन्होंने 10 अक्टूबर 2026 के बाद प्रदर्शन के लिए कोई अपील नहीं की है.”
वकील ने यह भी कहा कि आरोपियों ने 10 अक्टूबर के बाद प्रदर्शन के लिए कोई अपील नहीं की और दोनों “अलग-अलग जंतर-मंतर गए थे.”
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतुराज ने अदालत के आदेश में कहा, “मुझे लगता है कि आरोपियों ने दक्षिण-पश्चिम जिले के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने 11.10.2026 को दिए गए अपने बांड का जानबूझकर उल्लंघन किया. इसके तुरंत बाद उन्होंने इस मामले में शांति भंग की.”
उन्होंने कहा, “इसके अलावा, इस समय मेरे सामने रखे गए आशंका के आधारों से साफ तौर पर लगता है कि आरोपियों का आचरण सही नहीं है. बल्कि, इससे पता चलता है कि वे कानून की कोई परवाह नहीं करते और प्रतिबंधित की जा चुकी जगहों पर प्रदर्शन करने के लिए बार-बार लोगों को बुलाते हैं.”
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा, “सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आरोपियों ने कहा कि वे भविष्य में यह अपराध दोबारा नहीं करेंगे, लेकिन जांच अधिकारी के आवेदन और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री को देखते हुए उनकी इस बात पर भरोसा नहीं होता. जांच अधिकारी का आवेदन हिरासत आगे बढ़ाने की मांग करता है और रिकॉर्ड में मौजूद पर्याप्त सामग्री से समर्थित है. इससे शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति बिगड़ने की गंभीर आशंका पैदा होती है. उचित विचार किए बिना इन चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.”
उन्होंने कहा कि “तत्काल खतरे की आशंका, आरोपियों के पिछले आचरण और दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए, मुझे उचित लगता है कि आरोपियों को दो दिन के भीतर अपनी दलीलें लिखित रूप में देने का मौका दिया जाए. इसकी एक प्रति पहले ही जांच अधिकारी को दी जाए.”
जमानतदारों को खारिज किया गया
इसके अलावा, आदेश में कहा गया कि आरोपियों की ओर से नए जमानतदार पेश किए गए थे.
“आरोपियों के वकील के बार-बार अनुरोध करने पर मैंने जमानतदारों की योग्यता की जांच की. मैंने पाया कि वे जमानतदार बनने के योग्य नहीं हैं. जमानतदार श्री तीरथ के बांड और आधार कार्ड में तस्वीरें मेल नहीं खाती थीं. वह पहचान के किसी दूसरे वैध दस्तावेज़ को भी पेश नहीं कर सके और उन्होंने अस्पष्ट व असंतोषजनक जवाब दिए.”
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने आदेश में यह भी कहा कि जमानतदार मन्नू राज आनंद “आरोपी सौरव दास की बुनियादी जानकारी तक नहीं बता सकीं, जैसे कि जमानत बांड में दी गई जानकारी—माता-पिता का नाम, पता आदि. मन्नू राज आनंद सौरव दास की जमानतदार बनी थीं.”
आदेश में कहा गया, “इसके अलावा, जांच से पता चला कि दोनों जमानतदारों का आरोपियों पर इतना नियंत्रण नहीं है कि वे उन्हें अदालत में पेश कर सकें. जमानतदार रखने का यह सबसे जरूरी उद्देश्य है. फिलहाल कोई दूसरा जमानतदार भी मौजूद नहीं है. ऐसी स्थिति में आरोपियों को नए जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया जाता है.”
अदालत ने आगे की सुनवाई और जरूरत पड़ने पर जवाब देने के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है.
अदालत के आदेश में कहा गया, “इस बीच, रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री और आवेदन में बताई गई एहतियाती कार्रवाई की लगातार जरूरत को देखते हुए, दोनों आरोपियों को 21.10.2026 तक न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है. उन्हें 21.10.2026 को दोपहर 2 बजे इस अदालत में पेश किया जाएगा.”
दास और रांका एहतियातन हिरासत में रहेंगे
दास और रांका बीएनएसएस की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में हैं.
बीएनएसएस की धारा 126 के तहत, अगर शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट हिरासत में लिए गए लोगों से शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने को कह सकता है.
वहीं, धारा 170 पुलिस को यह अधिकार देती है कि अगर उसे पता चलता है कि कोई व्यक्ति ऐसा अपराध करने की योजना बना रहा है, जिसे कानून के तहत संज्ञेय अपराध कहा जाता है, और उसे किसी दूसरे तरीके से रोका नहीं जा सकता, तो पुलिस बिना गिरफ्तारी वारंट या मजिस्ट्रेट के आदेश के उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है.
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, “अदालत ने दास और रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी है. हमने अदालत से पांच दिन की हिरासत बढ़ाने की मांग की थी.”
अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “हमने दलील दी थी कि हालात अब भी वैसे ही हैं. हमें शांति बनाए रखनी है. हमें कोई सकारात्मक बदलाव नहीं दिखा है. हमने न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, ताकि शांति भंग करने वाले किसी प्रदर्शन की योजना न बनाई जा सके. जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक यह जरूरी है.”
रांका और दास के खिलाफ कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस थानों में दर्ज दो अलग-अलग प्राथमिकियों में उन पर बिना अनुमति किसी जगह में घुसने का आरोप है. इन मामलों से अलग, मौजूदा कार्रवाई कार्यकारी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई एक कलंदर रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई है. यह पुलिस की ऐसी रिपोर्ट होती है, जिसमें एहतियातन हिरासत में लेने के कारण बताए जाते हैं. इसका मकसद शांति बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्रवाई की मांग करना है.
उनकी रिहाई के लिए जमानतदारों की जरूरत थी. लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जमानतदार बनने के लिए किए गए सभी चार प्रस्ताव खारिज कर दिए. इनमें से दो प्रस्ताव इसलिए खारिज किए गए क्योंकि जमानतदार बनने वाले लोगों को पहले हिरासत में लिया जा चुका था. एक अन्य प्रस्ताव इस आधार पर खारिज किया गया कि जमानतदार दिल्ली का निवासी नहीं था, जबकि सुनवाई दिल्ली में हो रही थी.
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