नई दिल्ली: 2026 की नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (UG), यानी NEET (UG) पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी ने पुणे के एक साथी से ‘गेस पेपर’ (Guess paper) की फिजिकल कॉपी 10 लाख रुपये में खरीदी थी, यह जानकारी दिप्रिंट को मिली है.
पुलिस की शुरुआती जांच से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, पेपर की फिजिकल कॉपी मिलने के बाद आरोपी शुभम खैरनार ने उसे PDF में बदलकर पैसों के बदले शेयर किया.
सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “उसे अपने एक साथी से कुरियर के जरिए फिजिकल फॉर्म में गेस पेपर मिला था और उसने वही पेपर गुरुग्राम, हरियाणा के एक आरोपी को व्हाट्सएप पर PDF फॉर्म में 15 लाख रुपये में भेज दिया.”
गेस पेपर ऐसे सवालों का सेट होता है जिसमें महत्वपूर्ण सवाल दिए जाते हैं ताकि पढ़ाई में मदद मिल सके. इसे अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है और यह पिछले ट्रेंड्स के आधार पर आखिरी समय की तैयारी के लिए बनाया जाता है.
महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों ने खैरनार की पहचान भोपाल में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) के तीसरे साल के छात्र के रूप में की है. सूत्र ने आगे कहा, “वह एस आर कंसल्टेंसी नाम की एक एजुकेशनल कंसल्टेंसी फर्म चलाता है, जिसके ऑफिस नाशिक और भोपाल में हैं. यह जानकारी उसने खुद दी थी.”
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की शुरुआती जांच के अनुसार, “गेस पेपर” के 400 से ज्यादा सवालों में से करीब 135 सवाल वही थे जो 3 मई को हुई मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में भी आए थे. इस परीक्षा में करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था.
केंद्र सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी. CBI ने मंगलवार शाम को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जो आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत मिटाने जैसे अपराधों से जुड़ी हैं. इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं.
CBI के प्रवक्ता ने कहा, “NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को NEET (UG) – 2026 परीक्षा से जुड़े कुछ दस्तावेजों के परीक्षा से पहले गैरकानूनी तरीके से फैलाए जाने की शिकायत और जानकारी मिली थी. आरोपों से लगता है कि परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता और ईमानदारी से समझौता हुआ हो सकता है.” उन्होंने यह भी कहा कि जांच के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं और उन्हें अलग-अलग जगहों पर भेजा गया है.
बड़ा नेटवर्क
CBI ने खैरनार को नाशिक से हिरासत में लिया, जबकि दूसरी टीम ने राजस्थान SOG द्वारा पकड़े गए करीब दो दर्जन संदिग्धों से पूछताछ की.
राजस्थान के महानिरीक्षक (SOG) अजय पाल लांबा ने पुष्टि की कि प्रश्नपत्र लीक का स्रोत नाशिक था. मंगलवार देर रात हुई प्रेस ब्रीफिंग में लांबा ने कहा, “अब तक की पूछताछ में नाशिक को स्रोत पाया गया है. आगे की जांच में और जानकारी सामने आएगी.”
लांबा ने समझाया, “यह एक पेपर सेट है, जो पब्लिक डोमेन में है. केमिस्ट्री और बायोलॉजी पेपर की PDFs पब्लिक डोमेन में हैं. NEET परीक्षा का प्रश्नपत्र भी पब्लिक डोमेन में है. जो PDF वायरल हो रही थी, उसमें दो सेट थे: केमिस्ट्री और बायोलॉजी. इसलिए, केमिस्ट्री के 45 सवाल और बायोलॉजी के 90 सवाल उनके जवाबों सहित पूरी तरह मैच पाए गए.”
राजस्थान के कई जिलों की पुलिस टीमों ने करीब 150 NEET उम्मीदवारों से पूछताछ की और पाया कि राज्य में पेपर हरियाणा के एक व्यक्ति ने लीक किया था.
उन्होंने कहा, “यह जानकारी NTA के साथ साझा की गई थी और भारत सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी और CBI जांच की सिफारिश की. CBI की टीम SOG के संपर्क में है और उन्होंने उन संदिग्धों से पूछताछ की है जिनकी सक्रिय भूमिका अब तक की जांच में सामने आई है.”
IG ने आगे कहा कि पहला सुराग सीकर जिले से मिला, जब पता चला कि केरल में रहने वाले सीकर के एक MBBS छात्र को यह पेपर सीकर के ही एक व्यक्ति से मिला था.
सूत्रों के अनुसार, राकेश मंडावरिया नाम का सीकर निवासी राजस्थान में पेपर लीक की पूरी कड़ी जोड़ने में मुख्य व्यक्ति है.
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “मंडावरिया एक कंसल्टेंसी फर्म चलाता है और उसने यह PDF अपने दोस्त को केरल भेजी थी. वहां से यह प्रश्नपत्र सीकर के एक हॉस्टल में रहने वाले छात्रों तक पहुंचा और फिर जयपुर के उम्मीदवारों तक पहुंच गया.” अधिकारी ने बताया कि उसे 9 मई को देहरादून में हिरासत में लिया गया था.
इस बीच, लांबा ने कहा कि पेपर गुरुग्राम के एक व्यक्ति के जरिए सीकर पहुंचा था और राजस्थान SOG द्वारा पकड़े गए ज्यादातर संदिग्ध या तो खुद उम्मीदवार थे या उनके परिवार के सदस्य थे.
सूत्रों ने बताया कि SOG ने पूछताछ के लिए कम से कम दो दर्जन लोगों को हिरासत में लिया था.
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