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Wednesday, 17 June, 2026
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वर्ली से गोरेगांव तक: मुंबई को मिलेगा मेकओवर, 900 एकड़ से ज्यादा जमीन पर बसेंगी 11 नई टाउनशिप

MHADA मुंबई में C&D मॉडल पर 11 बड़े क्लस्टर्स के रीडेवलपमेंट पर काम कर रहा है, जिससे मुंबई में 900 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन का कायाकल्प होगा.

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मुंबई: 2021 में अपनाए जाने के पांच साल बाद, मुंबई में एक बड़े राज्य हाउसिंग बोर्ड लेआउट के लिए तैयार किया गया पुनर्विकास मॉडल अब शहर के कई बड़े क्लस्टरों को एकीकृत टाउनशिप के रूप में विकसित करने का रास्ता खोल चुका है.

महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) मुंबई में 11 बड़े क्लस्टरों के पुनर्विकास पर इसी मॉडल के तहत काम कर रही है, जिससे शहर भर में 900 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र का कायाकल्प होगा.

MHADA द्वारा तैयार किए गए अनुमान के अनुसार, इन परियोजनाओं में कुल 75,445 मकानों के पुनर्विकास के लिए 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आने की उम्मीद है.

ये परियोजनाएं MHADA के ‘कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट’ मॉडल यानी C&D मॉडल का हिस्सा हैं. इस मॉडल के तहत हाउसिंग अथॉरिटी MHADA लेआउट के बड़े क्लस्टरों की पहचान करती है, इतने बड़े बहु-करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट संभालने में सक्षम मजबूत नेटवर्थ वाले निजी डेवलपर्स नियुक्त करती है और मौजूदा निवासियों के लिए पुनर्वास क्षेत्र को अधिकतम करने की कोशिश करती है.

इसके बदले MHADA को डेवलपर्स से नकद भुगतान और आवासीय स्टॉक दोनों का मिश्रण मिलता है, जिसे वह अपनी वार्षिक किफायती आवास लॉटरी में शामिल कर सकती है. MHADA के उपाध्यक्ष और CEO संजीव जयसवाल ने दिप्रिंट से कहा, “इनमें से कई परियोजनाएं कई वर्षों से अटकी हुई थीं क्योंकि ध्यान व्यक्तिगत इमारतों के पुनर्विकास पर था और ऐसे प्रोजेक्ट अक्सर आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होते थे.”

MHADA जिन 11 क्लस्टरों का C&D मॉडल के तहत पुनर्विकास करने की योजना बना रही है, उनमें सबसे छोटा प्रोजेक्ट खार के रामकृष्ण नगर का है, जो 6 एकड़ में फैला है, जबकि सबसे बड़ा प्रोजेक्ट गोराई में 256 एकड़ का है. दोनों परियोजनाएं अभी प्रस्ताव चरण में हैं. 11 में से 7 परियोजनाओं के टेंडर दिए जा चुके हैं: अभ्युदय नगर, GTB नगर, वर्ली का आदर्श नगर, बांद्रा रिक्लेमेशन, मोतीलाल नगर, कमाठीपुरा और अंधेरी का SVP नगर. जयसवाल ने कहा, “इन परियोजनाओं ने बड़े और प्रतिष्ठित डेवलपर्स को आकर्षित किया है, जो अपनी साख दांव पर होने के कारण समय पर और गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करने की अधिक संभावना रखते हैं.”

डेवलपर्स को मौजूदा निवासियों के पुनर्वास और MHADA के हिस्से के आवासीय स्टॉक को देने के बाद फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) का उपयोग करके प्रत्येक परियोजना में पर्याप्त बिक्री योग्य हिस्सा मिलेगा.

जयसवाल ने कहा, “भले ही किसी व्यक्तिगत इमारत का पुनर्विकास व्यवहार्य हो, लेकिन उस स्थिति में हम केवल एक ऊंची इमारत और कुछ बुनियादी सुविधाएं ही बना पाएंगे. जबकि C&D मॉडल में पोडियम, कई स्तरों पर बगीचे, पालतू पशु देखभाल केंद्र, वॉकिंग एरिया, हरित क्षेत्र और ग्रीन बिल्डिंग्स होंगी. जिन लोगों का पुनर्वास होगा, उनके जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा.”

MHADA पुनर्विकास का धीमा रिकॉर्ड

MHADA के शहर भर में 56 लेआउट हैं, जिनमें से कई खराब रखरखाव और उपेक्षा के कारण जर्जर हो चुके थे और उन्हें पुनर्विकास की सख्त जरूरत थी. हालांकि, पांच साल पहले तक तरीका यह था कि व्यक्तिगत इमारतों और लेआउट्स का पुनर्विकास किया जाए. ये इमारतें किसी डेवलपर का चयन करती थीं, जो फिर MHADA के पास प्रस्ताव लेकर आता था.

इनमें से कई परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहीं क्योंकि डेवलपर्स को अक्सर बाद में पता चलता था कि वे आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं.

जो परियोजनाएं अब MHADA के C&D मॉडल के तहत लाई गई हैं, उनमें से कई ऐसी थीं जिनके पुनर्विकास की योजना वर्षों से बन रही थी लेकिन विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ सकीं.

उदाहरण के लिए, कमाठीपुरा के पुनर्विकास की चर्चा 2007 से चल रही थी. शुरुआत में डेवलपर्स इस क्लस्टर की बदनामी के कारण आगे आने से हिचक रहे थे क्योंकि यह इलाका मुंबई के अवैध वेश्यावृत्ति क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. जो एक डेवलपर आगे आया था, DB Realty, उसे वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और योजना आगे नहीं बढ़ सकी.

जयसवाल ने कहा, “कमाठीपुरा की सेस्ड इमारतों का व्यक्तिगत रूप से पुनर्विकास हो सकता था. शुरुआत में कुछ इमारतों का पुनर्विकास हुआ भी, कुछ इमारतें गिरा दी गईं, कुछ ढह गईं. लेकिन कुल मिलाकर कोई आगे आने वाला नहीं था.” सेस्ड इमारतें वे हैं जो 1960 से पहले बनी थीं और जिनके किरायेदार रखरखाव के लिए MHADA को सेस देते हैं.

उन्होंने कहा कि GTB नगर की कहानी भी कुछ अलग नहीं थी. यहां कुछ इमारतों का पुनर्विकास 2013 से अटका हुआ था. इन इमारतों ने नवी मुंबई के एक डेवलपर के साथ समझौता किया था.

लेकिन सहमति की कमी, कई कानूनी विवाद और निजी जमीन पर MHADA की भूमिका को लेकर सवालों के कारण परियोजना शुरू नहीं हो सकी.

राज्य सरकार ने 2024 में आधिकारिक रूप से MHADA को विशेष योजना प्राधिकरण नियुक्त किया.

MHADA लेआउट्स को क्लस्टर के रूप में विकसित करने और MHADA की निगरानी में निजी डेवलपर नियुक्त करने का तरीका पहली बार 2021 में गोरेगांव के मोतीलाल नगर के लिए अपनाया गया था.

हालांकि, यह परियोजना पिछले साल तक शुरू नहीं हो सकी क्योंकि वहां के निवासियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उनका कहना था कि सोसायटी को स्वयं पुनर्विकास करने और अपनी पसंद का डेवलपर चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए.

नवंबर 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने MHADA कॉलोनियों के लिए एकीकृत और क्लस्टर पुनर्विकास नीति को आधिकारिक मंजूरी दी. इसके तहत अथॉरिटी व्यक्तिगत कॉलोनियों के पुनर्विकास को बड़े क्लस्टरों में समूहित कर बड़े टाउनशिप विकसित कर सकती है. 20 एकड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार ने MHADA को निवासियों से व्यक्तिगत सहमति लेने की आवश्यकता भी समाप्त कर दी. सरकार का कहना था कि परियोजना पुनर्विकास के लिए FSI की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने की कोशिश करेगी. हालांकि, टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त डेवलपर्स को परियोजना में शामिल हाउसिंग सोसायटियों की मंजूरी लेना जरूरी होगा.

जयसवाल ने कहा कि इन परियोजनाओं को डेवलपमेंट कंट्रोल रूल्स की विभिन्न धाराओं के तहत लिया जा रहा है ताकि FSI क्षमता का अधिकतम उपयोग किया जा सके. जहां भी झुग्गियां हैं, चाहे वे अधिसूचित हों या नहीं, उनका भी पुनर्विकास डेवलपमेंट कंट्रोल रूल्स की धारा 33/10 के तहत किया जा रहा है, जो स्लम पुनर्वास से संबंधित है.

900 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र का होगा पुनर्विकास

पिछले साल मार्च में, 143 एकड़ में फैले मोतीलाल नगर प्रोजेक्ट के लिए अडानी ग्रुप सबसे ऊंची बोली लगाने वाला निकला. इस कॉलोनी में 3,700 घर और 1,600 झुग्गी मकान हैं, जिनका पुनर्वास किया जाना है. वर्तमान में इन घरों का आकार लगभग 230 वर्ग फुट है. MHADA के दस्तावेजों के अनुसार, निवासियों को पुनर्विकास के बाद 1,600 वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र वाले घर दिए जाएंगे. पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 36,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

पिछले साल जून में, कमाठीपुरा के क्लस्टर पुनर्विकास की नोडल एजेंसी MHADA ने इस परियोजना के लिए निविदाएं जारी की थीं.

नवंबर में, MHADA ने पुणे के गोयल गंगा समूह से जुड़ी AATK कंस्ट्रक्शंस को इस परियोजना के लिए नियुक्त किया. 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत 34 एकड़ क्षेत्र का पुनर्विकास किया जाएगा, जहां अलग-अलग आकार के घरों में रहने वाले 8,800 परिवारों को 500 वर्ग फुट के नए घर मिलेंगे.

इसके बाद मार्च से जून के बीच MHADA ने सायन के जीटीबी नगर, कालाचौकी के अभ्युदय नगर, वर्ली के आदर्श नगर, बांद्रा रिक्लेमेशन और अंधेरी के SVP नगर क्लस्टरों के लिए डेवलपर्स को अंतिम रूप दिया.

कीस्टोन रियल्टर्स (रुस्तमजी) ने GTB नगर के पुनर्विकास का काम लिया है. इसमें उन परिवारों के लिए बनाई गई इमारतें शामिल हैं जो पाकिस्तान से भारत आए पंजाबी और सिंधी परिवार हैं. GTB नगर परियोजना में 11 एकड़ जमीन शामिल है, जिसमें 1,200 घर और 350 झुग्गी इकाइयां हैं. जो निवासी पहले 270 वर्ग फुट के घरों में रहते थे, उन्हें 635 वर्ग फुट के नए घर मिलेंगे.

33 एकड़ में फैले अभ्युदय नगर क्लस्टर, जिसे औद्योगिक मजदूरों के लिए बनाया गया था, का पुनर्विकास MGN एग्रो प्रॉपर्टीज, वेलस्पन समूह से जुड़ी कंपनी, NNP बिल्डकॉन और ऑनेस्ट शेल्टर्स के समूह द्वारा किया जाएगा. 12,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली इस परियोजना में 3,410 घरों और 600 झुग्गी इकाइयों का पुनर्वास शामिल है. वर्तमान में 208 वर्ग फुट के घरों में रहने वाले निवासियों को 641 वर्ग फुट के नए घर मिलेंगे.

बांद्रा रिक्लेमेशन (98 एकड़) और आदर्श नगर (34 एकड़) क्लस्टरों का पुनर्विकास अडानी ग्रुप को दिया गया है. इन दोनों परियोजनाओं के लिए लोढ़ा डेवलपर्स और JSW रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने भी बोली लगाई थी. 13,353 करोड़ रुपये की आदर्श नगर परियोजना में 863 परिवारों को नए घर दिए जाएंगे, जबकि 25,200 करोड़ रुपये की बांद्रा रिक्लेमेशन परियोजना में 1,147 परिवारों का बड़े घरों में पुनर्वास किया जाएगा.

SVP नगर के पुनर्विकास की निविदा में भी बड़े डेवलपर्स ने भाग लिया था. इसमें रिलाइंस 4IR रियल्टी डेवलपमेंट लिमिटेड, अडानी ग्रुप और JSW स्टील की सहायक कंपनी हनुरा रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व वाला समूह शामिल था. अंत में हनुरा रियल्टी के नेतृत्व वाले समूह ने 74 एकड़ में फैली 33,300 करोड़ रुपये की परियोजना जीत ली.

हालांकि, MHADA को बांद्रा रिक्लेमेशन, आदर्श नगर और SVP नगर के निवासियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सहमति की आवश्यकता न होना विवाद का कारण बन रहा है. यहां के निवासियों का आरोप है कि MHADA उनके घरों के पुनर्विकास पर उनका अधिकार छीन रही है. उनका कहना है कि कुछ लोगों ने पहले से व्यक्तिगत इमारतों के पुनर्विकास की योजना बनाई हुई थी, जिसे अब MHADA का क्लस्टर मॉडल रोक रहा है.

सात एकड़ का एक और क्लस्टर प्रोजेक्ट, PMGP माजासवाड़ी कॉलोनी, MHADA द्वारा इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर लागू किया जा रहा है.

जयसवाल ने कहा कि C&D मॉडल के तहत दो और क्लस्टर पुनर्विकास प्रस्ताव, खार का छह एकड़ में फैला रामकृष्ण नगर और 26 एकड़ में फैली बोरीवली की पुरानी MHB कॉलोनी, राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं.

इसके अलावा, MHADA अपने दो सबसे बड़े क्लस्टर प्रस्तावों को भी राज्य सरकार की मंजूरी के लिए तैयार कर चुकी है. इनमें से एक कांदिवली का चारकोप है, जिसमें 201 एकड़ क्षेत्र का पुनर्विकास और 20,040 परिवारों का पुनर्वास शामिल है. इसमें अनुमानित निवेश 87,307 करोड़ रुपये होगा. दूसरा गोराई प्रोजेक्ट है, जिसमें 79,111 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से 256 एकड़ क्षेत्र का पुनर्विकास किया जाएगा और 26,206 इकाइयों का पुनर्वास होगा.

प्रक्रिया

जयसवाल ने कहा कि MHADA ऐसे क्लस्टरों की पहचान करने की कोशिश करती है जहां व्यक्तिगत इमारतों का पुनर्विकास मुश्किल हो या जहां पुनर्वासित निवासियों को अधिक लाभ न मिल पा रहा हो.

IAS अधिकारी ने कहा, “उदाहरण के लिए, चारकोप में CRZ (कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन) की पाबंदियां हैं. गोराई में भी यही समस्या है. CRZ क्षेत्र में स्थित अलग-अलग इमारतों का पुनर्विकास कभी नहीं हो पाएगा. लेकिन यदि हम FSI का बेहतर उपयोग करने के लिए क्लस्टर बनाते हैं, तो CRZ क्षेत्र में ग्रीन ज़ोन या बफर ज़ोन बना सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि इन अधिकांश परियोजनाओं में लगभग 50 प्रतिशत FSI पुनर्वास हिस्से के लिए इस्तेमाल की जा रही है.

जब MHADA किसी क्लस्टर की पहचान करती है, तो वह राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजती है ताकि उसे मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सके. राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया जाता है, जिसके बाद निविदा तैयार की जाती है. यह निविदा मंजूरी के लिए राज्य सरकार की उच्च स्तरीय क्लस्टर पुनर्विकास समिति के पास जाती है.

समिति की मंजूरी मिलने के बाद आवास मंत्री इसकी स्वीकृति देते हैं और निविदा प्रकाशित की जाती है. डेवलपर चुने जाने के बाद प्रस्ताव फिर से उच्च स्तरीय समिति के पास मंजूरी के लिए जाता है और उसके बाद राज्य आवास विभाग की मंजूरी ली जाती है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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