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Wednesday, 17 June, 2026
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फर्जी पेपर, टेलीग्राम और चोरी किए गए लॉगिन: कैसे ठग NEET की चिंता को बना रहे हैं कमाई का जरिया

मंगलवार को, केंद्र ने NEET री-एग्जाम को ध्यान में रखते हुए 22 जून तक भारत में टेलीग्राम के एक्सेस पर रोक लगा दी.

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नई दिल्ली: 21 जून को होने वाली NEET-UG री-एग्जाम से पहले संगठित नकल गिरोहों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. इससे यह बात फिर चर्चा में आ गई है कि धोखेबाज इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके छात्रों को कैसे ठग रहे थे.

2026 की मुख्य नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पेपर लीक मामले की जांच अभी जारी है. इस बीच गुजरात और बिहार पुलिस ने तीन ऐसे घोटालों का पर्दाफाश किया है, जिन्होंने भोले-भाले छात्रों और उनके माता-पिता से बड़ी रकम ठगी.

इनमें से दो मामलों में टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल किया गया, जहां लोगों को नकली प्रश्नपत्र देने का झांसा देकर पैसे ऐंठे गए. तीसरे मामले में 19 साल के एक युवक ने कथित तौर पर NEET पोर्टल से लगभग 150 छात्रों की रिफंड राशि अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली.

पहले मामले में, अहमदाबाद पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट को सूचना मिली कि कुछ लोग टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल करके “RE-NEET परीक्षा से जुड़ी झूठी और भ्रामक गारंटी” दे रहे हैं. दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, दोनों राजस्थान के रहने वाले हैं. इन पर कई राज्यों में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क को चलाने और मेडिकल अभ्यर्थियों से 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने का आरोप है.

इसी तरह, बिहार पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने कार्रवाई की जब पता चला कि एक गिरोह टेलीग्राम के जरिए नकली प्रश्नपत्र फैलाकर NEET अभ्यर्थियों को ठग रहा है. सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

तीसरे मामले की जांच अहमदाबाद साइबर क्राइम यूनिट कर रही है. इसमें एक किशोर ने NEET लॉगिन जानकारी चुराकर रिफंड की रकम को गलत तरीके से अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया.

मंगलवार को केंद्र सरकार ने 22 जून तक भारत में टेलीग्राम की पहुंच सीमित कर दी. इसका उद्देश्य NEET री-एग्जाम को सुरक्षित बनाना था. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह “छात्रों के हित में है और 21 जून 2026 को सुरक्षित परीक्षा कराने में NTA की मदद करेगा”.

राजस्थान के दो आरोपी

अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच के अनुसार, जयपुर निवासी सुमेर सिंह और कोटा निवासी आकाश ने टेलीग्राम चैनल और टेलीग्राम ID बनाकर ऐसे पोस्ट, मैसेज और विज्ञापन फैलाए, जिनमें झूठा दावा किया गया कि उनके पास RE-NEET परीक्षा का प्रश्नपत्र है और वे इसे उपलब्ध करा सकते हैं.

अहमदाबाद पुलिस को अलग-अलग राज्यों से 12 शिकायतें मिली थीं. इसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और 54 के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया गया.

सुमेर और आकाश को 14 जून को गिरफ्तार किया गया. अब तक आरोपियों से जुड़े छह बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “इन्होंने छात्रों और उनके माता-पिता को झूठे वादों के जरिए फंसाकर साइबर माध्यम से आर्थिक धोखाधड़ी की.”

जांच में पता चला कि आरोपी टेलीग्राम  चैनलों का इस्तेमाल करके यह धोखाधड़ी कर रहे थे.

जांच के दौरान कई टेलीग्राम चैनल, टेलीग्राम ID, मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की गई. इससे पता चला कि आरोपियों ने ‘Raghav_singh_neet’ नाम का टेलीग्राम चैनल और करीब सात अन्य चैनल बनाए थे. इन्हें ‘Private Mafia’ नाम के टेलीग्राम यूजर को दिया गया था.

पुलिस अधिकारी के अनुसार, इन आठ टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल यह प्रचार करने के लिए किया गया कि जो लोग पैसे देंगे, उन्हें NEET परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाएगा.

NTA 21 जून को NEET री-टेस्ट आयोजित करेगा.

पैसों के मामले में, आरोपियों ने कथित तौर पर QR कोड और बैंक खातों के जरिए ऑनलाइन भुगतान लिया. टेलीग्राम चैट से पता चला कि उम्मीदवारों से “अपॉइंटमेंट बुकिंग” के नाम पर 5,000 रुपये लिए जाते थे.

अधिकारी ने बताया, “इसका मतलब था कि अगर RENEET का पेपर आने वाला है, तो कोई उसे पहले से बुक कर सकता है. खरीदारों को पासवर्ड से सुरक्षित PDF मिलने वाली थी. पासवर्ड पाने के लिए उम्मीदवारों से 12,500 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक लिए जाते थे. इसमें मोलभाव भी होता था.”

लेकिन जब पासवर्ड दिया जाता था, तो PDF पूरी तरह काली निकलती थी. तब तक टेलीग्राम अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता था.

अहमदाबाद के संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम ब्रांच) शरद सिंघल ने दिप्रिंट को बताया, “झूठी जानकारी फैलाकर, फर्जी वादे करके और धोखाधड़ी वाले तरीके अपनाकर आरोपियों ने छात्रों, अभिभावकों और अन्य लोगों को ठगा, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ. इनके पास से NEET या किसी अन्य परीक्षा से जुड़ी कोई सामग्री बरामद नहीं हुई.”

अब तक पुलिस ने लगभग 1,000 ऐसे मोबाइल नंबरों का पता लगाया है, जिनसे पिछले एक महीने में संपर्क किया गया था. टेलीग्राम यूजर ‘Private Mafia’ अभी भी फरार है.

जांचकर्ताओं के सामने यह भी आया कि सुमेर और आकाश ऑनलाइन धोखाधड़ी की दुनिया में नए नहीं थे. उन पर ऑनलाइन गेमिंग यूजर्स और उनके खातों का इस्तेमाल करके पैसे निकालने का भी आरोप है.

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा, “गेमिंग वेबसाइटों से जुड़े बैंक खातों से धोखाधड़ी करके रकम निकाली जाती थी. फिर इस रकम को कई लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था. आरोपियों ने अपने साथियों और अन्य लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके पैसा निकाला और निजी लाभ के लिए खर्च किया. कुल 1.5 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए.”

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस रकम में से कितनी राशि NEET अभ्यर्थियों से ठगी गई थी.

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने टेलीग्राम चैनलों में सदस्य और प्रीमियम सदस्य संख्या को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए कई थर्ड-पार्टी सेवाओं और ऐप्स का इस्तेमाल किया.

पुलिस के अनुसार, बढ़ाई गई सदस्य संख्या दिखाकर ये चैनल ‘Private Mafia’ जैसे खरीदारों को बेचकर जल्दी पैसा कमाया जाता था. जांच में यह भी पता चला कि ‘Private Mafia’ ऐसे चैनल खरीदने के लिए Amazon Gift Cards का इस्तेमाल करता था.

रिफंड घोटाला

दूसरे मामले में अहमदाबाद पुलिस बिहार पहुंची. एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि उसकी बेटी NTA पोर्टल में लॉगिन नहीं कर पा रही थी क्योंकि उसका पासवर्ड बदल दिया गया था.

इसके बाद अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में BNS और IT Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

NTA के चीफ़ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफ़िसर (CISO) से मिली जानकारी, बैंक खातों के तकनीकी विश्लेषण और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी का पता लगाकर उसे बिहार से गिरफ्तार किया गया. आरोपी की पहचान गया निवासी 19 वर्षीय नवीनकुमार शंकर प्रसाद यादव के रूप में हुई.

NTA पोर्टल की सुरक्षा प्रणाली से मिले डिजिटल सबूतों की मदद से जांचकर्ताओं ने नवीन की पहचान की और उसकी लोकेशन का पता लगाया.

मामले की जांच कर रहे अधिकारी ने कहा, “आरोपी ने उम्मीदवारों की जानकारी और अनुमति के बिना उनके लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल किया, NEET पोर्टल में अवैध रूप से प्रवेश किया और अपने बैंक खाते की जानकारी डालकर रिफंड राशि हासिल कर ली.”

NEET-UG रद्द होने के बाद मेडिकल अभ्यर्थियों को रिफंड दिया जा रहा था. हर सफल रिफंड पर नवीन को 1,700 रुपये मिलते थे. पुलिस के अनुसार, वह खुद NEET अभ्यर्थी था और उसे रिफंड प्रक्रिया की जानकारी थी.

नवीन ने कथित तौर पर लगभग 350 उम्मीदवारों को निशाना बनाया. इनमें से करीब 150 उम्मीदवारों के पासवर्ड कमजोर थे, जिसका उसने फायदा उठाया.

अधिकारी ने बताया, “वह ‘सीक्रेट सिक्योरिटी क्वेश्चन’ फीचर का इस्तेमाल करता था क्योंकि कई उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन के समय आसान विकल्प चुनते हैं. उदाहरण के लिए, पसंदीदा खेल या पसंदीदा रंग. इनके जवाब आसानी से अनुमान लगाए जा सकते हैं. एक बार एक्सेस मिल जाने के बाद वह सारी जानकारी बदल देता था.”

NEET नकली प्रमाणपत्र धोखाधड़ी

14 जून को बिहार पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जिसने नकली प्रश्नपत्र बनाकर और उन्हें टेलीग्राम के जरिए भेजकर NEET अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को ठगा.

मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर थाना में दर्ज मामले में कथित सरगना मनीष झा समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया.

अहमदाबाद वाले मामले की तरह, यह गिरोह भी टेलीग्राम के जरिए नकली NEET प्रश्नपत्र भेजता था. पुलिस को सूचना मिली थी कि यह गिरोह बालूघाट के पास एक किराए के मकान से काम कर रहा है.

सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारा और 2 जून को जाजुआर थाना क्षेत्र के निवासी मनीष झा को गिरफ्तार कर लिया. बाकी गिरफ्तारियां 13 जून को हुईं.

गिरफ्तार आरोपियों हर्ष, अमन कुमार, कन्हैया कुमार और हर्ष कनोडिया ने पुलिस के अनुसार स्वीकार किया कि वे “छात्रों और उनके अभिभावकों को टेलीग्राम के जरिए NEET प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर फंसाते थे.”

इसके बदले ऑनलाइन भुगतान नौ अलग-अलग बैंक खातों में लिया जाता था. बाद में यह रकम मनीष को पहुंचा दी जाती थी. पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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