scorecardresearch
Saturday, 22 August, 2026
होमदेशMHA के आदेश ने मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में अनमोल बिश्नोई की कस्टडी पर रोक लगाई

MHA के आदेश ने मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में अनमोल बिश्नोई की कस्टडी पर रोक लगाई

MHA के दिसंबर 2025 के आदेश ने अनमोल की कस्टडी लेने की पुलिस की कोशिशों को रोक दिया है. अगस्त 2024 में भी ऐसा ही एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें उसके भाई लॉरेंस को उसकी मौजूदा जेल से कहीं और ले जाने पर रोक लगाई गई थी.

Text Size:

नई दिल्ली: हाल के वर्षों के दो सबसे चर्चित हत्या के मामलों में जांच अटक गई है. ये मामले 2022 में पंजाब में गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और 2024 में मुंबई में NCP नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के हैं. इसकी वजह गृह मंत्रालय का एक आदेश है, जिसमें सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के आधार पर आरोपी गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को तिहाड़ जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगाई गई है.

25 साल का अनमोल, जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई है. वह इन दोनों मामलों में वांछित है. लेकिन न तो मूसेवाला मामले की जांच कर रही पंजाब पुलिस की SIT और न ही बाबा सिद्दीकी मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच उसकी कस्टडी ले पाई है, ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके.

अनमोल बिश्नोई को नवंबर 2025 में अमेरिका से भारत भेजा गया था और तब से वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है. अनमोल पर 18 मामले हैं. इनमें बाबा सिद्दीकी और सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले भी शामिल हैं.

भारत भेजे जाने के बाद उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने हिरासत में लिया था. यह 2022 में NIA की ओर से दर्ज किए गए बड़े गैंगस्टर सिंडिकेट मामले की जांच का हिस्सा था.

पंजाब पुलिस की SIT और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के लिए अनमोल की शारीरिक कस्टडी नहीं ले पाना लगभग वैसा ही है जैसा उसके भाई लॉरेंस बिश्नोई के मामले में हुआ था. बाबा सिद्दीकी हत्या मामले में मुंबई पुलिस को लॉरेंस की कस्टडी भी नहीं दी गई थी. इसकी वजह भी गृह मंत्रालय का ऐसा ही आदेश था, जो पहली बार अगस्त 2023 में जारी हुआ था और फिर अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में भी बढ़ाया गया था.

कई मामलों में वांछित लॉरेंस बिश्नोई अहमदाबाद की हाई-सिक्योरिटी साबरमती जेल में बंद है.

गृह मंत्रालय का आदेश

पिछले साल 5 दिसंबर को गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS, 2023 की धारा 303 के तहत एक आदेश जारी किया था. इस आदेश के तहत अनमोल को उसकी मौजूदा जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी गई थी. यह आदेश गृह मंत्रालय की ओर से लॉरेंस बिश्नोई के लिए ऐसा ही आदेश जारी किए जाने के करीब पांच महीने बाद आया था.

यह प्रावधान केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों को यह अधिकार देता है कि वे किसी खास कैदी या कैदियों के समूह को उनकी मौजूदा जेल से बाहर न ले जाने का निर्देश दे सकें. यह सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा की रक्षा के लिए धारा 302 के तहत जारी कैदी को दूसरी जेल में ले जाने के आदेश पर भी लागू होता है.

मुंबई और मानसा, दोनों जगहों पर दाखिल कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, 5 दिसंबर के गृह मंत्रालय के आदेश के तहत अनमोल को तिहाड़ जेल से बाहर ले जाने पर एक साल तक या संबंधित मामले की सुनवाई पूरी होने तक रोक है. इनमें से जो भी पहले हो, वही लागू होगा.

गृह मंत्रालय के आदेश से पहले भी अनमोल की कस्टडी और सुरक्षा की जांच होती रही है. एक समय विशेष NIA अदालत को दिल्ली में NIA मुख्यालय में ही कार्यवाही करनी पड़ी थी, क्योंकि कथित तौर पर पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से अनमोल को खतरा था.

BNSS की धारा 303 के असर और दायरे पर बात करते हुए वरिष्ठ वकील विकास पाहवा ने कहा कि किसी कैदी की आवाजाही पर रोक लगाना राज्य के अधिकार में है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस शक्ति का इस्तेमाल सिर्फ तब किया जाना चाहिए, जब सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की संभावना हो और सामान्य तौर पर यह जनहित में हो.

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस शक्ति का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए कि दूसरे मामलों में आपराधिक न्याय की प्रक्रिया बेवजह प्रभावित हो, जहां आरोपी की मौजूदगी जरूरी है.

पाहवा ने दिप्रिंट से कहा, “अगर किसी आरोपी को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने में सुरक्षा का वास्तविक और साफ तौर पर दिखने वाला खतरा है, तो राज्य को उस खतरे से निपटने का पूरा अधिकार है. लेकिन आधुनिक आपराधिक प्रक्रिया में इसके दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं.”

इस बीच, बाबा सिद्दीकी मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा अनमोल की कस्टडी नहीं ले पाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई. मुंबई की अदालत के जज ने मामले के जांच अधिकारी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी, क्योंकि वह अनमोल की कस्टडी नहीं ले पाए थे.

अदालत ने मुंबई क्राइम ब्रांच को आदेश दिया था कि वह अनमोल को कस्टडी में ले और उसे तिहाड़ जेल से वीडियो के जरिए कोर्ट के सामने पेश करे. लेकिन जांच अधिकारी ने कहा कि ऐसा करना संभव नहीं है.

बाबा सिद्दीकी मामला

NCP नेता बाबा जियाउद्दीन सिद्दीकी को अक्टूबर 2024 में मुंबई में अपने बेटे के ऑफिस से निकलते समय उनकी कार के पास गोली मार दी गई थी. जांच के दौरान 66 साल के सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता की हत्या में अनमोल बिश्नोई मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया.

इस सनसनीखेज हत्या की जांच के तहत मुंबई क्राइम ब्रांच ने 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं. इन पर हत्या से पहले रेकी करने और हत्या को अंजाम देने का आरोप है.

इस साल फरवरी में मामले में आरोप तय किए जाने के समय अनमोल को अपने साथियों शुभम लोनकर और जीशान अख्तर के साथ फरार आरोपी घोषित किया गया था.

पिछले महीने सिद्दीकी की पत्नी शीज़ीन सिद्दीकी ने अदालत का रुख किया और जांच अधिकारी को अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने के उचित निर्देश देने की मांग की, ताकि उनके पति की हत्या के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाया जा सके. अपनी याचिका में.

शीज़ीन ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी “बाहरी दबाव” की वजह से अनमोल को कस्टडी में लेने से हिचक रहे थे और उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो.

शीज़ीन ने अपने वकील त्रिवणकुमार करनानी के जरिए दाखिल याचिका में कहा, “जब किसी मामले में वांछित आरोपी के बारे में जांच एजेंसी को पता चलता है कि वह कहां है, तो उसकी पहली जिम्मेदारी होती है कि वह ऐसे आरोपी की कस्टडी लेने के कदम उठाए. उससे पूछताछ करके जांच में जो कड़ियां गायब हैं, उनका पता लगाया जाए और उसके आधार पर आगे की सामग्री जुटाई जाए, ताकि मामले को और मजबूत किया जा सके और न्याय मिल सके.”

उन्होंने आगे आरोप लगाया, “लेकिन इस मामले में जांच एजेंसी टालमटोल वाले कदम और प्रक्रियाएं अपना रही है. इससे सुनवाई पर बुरा असर पड़ रहा है, क्योंकि बाहरी दबाव के कारण वे असली मुख्य आरोपियों को सामने लाने से बचना चाहते हैं.”

इस पर मुंबई की विशेष MCOCA अदालत ने क्राइम ब्रांच को अनमोल की कस्टडी लेने का निर्देश दिया.

आदेश में विशेष अदालत ने क्राइम ब्रांच को यह विकल्प तलाशने को कहा कि तिहाड़ जेल में अनमोल से पूछताछ की जाए और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसे अदालत के सामने पेश किया जाए.

पिछले हफ्ते की शुरुआत में अदालत ने जांच अधिकारी, जो ACP रैंक के अधिकारी हैं, को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उन्होंने उसे वीडियो के जरिए पेश करने का विकल्प नहीं तलाशा. इसके बजाय उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल से उसकी शारीरिक कस्टडी लेने की कोशिश की, जबकि उन्हें गृह मंत्रालय के रोक वाले आदेश की जानकारी थी.

अदालत ने मामले के जांच अधिकारी से पूछा कि उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस क्यों जारी नहीं किया जाना चाहिए.

The site near Nirmal Nagar where NCP leader Baba Siddiqui was shot at in Bandra East.| ANI
बांद्रा ईस्ट में NCP नेता बाबा सिद्दीकी को जहां गोली मारी गई थी, वहां निर्मल नगर के पास की जगह. | ANI

अपने जवाब में ACP रैंक के अधिकारी ने कहा कि कस्टडी में लेकर पूछताछ को “सबसे प्रभावी तरीका” माना गया है और अनमोल के मामले में यह “बहुत जरूरी” है.

जांच अधिकारी ने फिर कहा कि जांच के सभी हिस्से अदालत के सामने वीडियो के जरिए पेश करके नहीं किए जा सकते. उन्होंने नौ कारण बताए कि अनमोल की शारीरिक कस्टडी क्यों जरूरी है.

जांच अधिकारी ने अपने जवाब में कहा, “BNSS की धारा 303(1) राज्य सरकार या केंद्र सरकार को खास तौर पर यह अधिकार देती है कि वह निर्देश दे सके कि किसी व्यक्ति को उस जेल से बाहर न ले जाया जाए जिसमें वह बंद है. यह प्रावधान साफ तौर पर यह भी कहता है कि जब तक ऐसा आदेश लागू है, तब तक BNSS की धारा 302 के तहत जारी कोई भी आदेश, चाहे वह सरकार के आदेश से पहले जारी हुआ हो या बाद में, उस व्यक्ति पर लागू नहीं होगा.”

जांच अधिकारी ने आगे कहा, “इस तरह 05.12.2025 के आदेश ने आरोपी की शारीरिक कस्टडी लेने के खिलाफ साफ कानूनी रोक लगा दी है. जैसा कि पहले बताया गया है, प्रभावी पूछताछ के लिए आरोपी की शारीरिक कस्टडी बहुत जरूरी है और इसके बिना जांच एजेंसी को इस अपराध की आगे की जांच करने में मुश्किल होगी.”

उन्होंने आगे अपने बचाव में कहा, “इसलिए आरोपी की मौजूदगी या कस्टडी हासिल करने में जांच एजेंसी की असमर्थता जांच अधिकारी की किसी निष्क्रियता, लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती की वजह से नहीं थी. यह उस कानूनी रोक की वजह से थी, जो जांच एजेंसी पर लागू है.”

Baba Siddiqui's funeral procession in Bandra on 14 October 2024. | ANI
बांद्रा में 14 अक्टूबर 2024 को बाबा सिद्दीकी की अंतिम यात्रा. | ANI

2024 में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी. उस समय महाराष्ट्र के गृह विभाग ने भी गृह मंत्रालय से नीति की समीक्षा करने और मुंबई क्राइम ब्रांच को लॉरेंस बिश्नोई की कस्टडी लेने की अनुमति देने के लिए अनुरोध किया था. हालांकि, इसका कोई नतीजा नहीं निकला.

पाहवा ने कहा कि आधुनिक आपराधिक प्रक्रिया के तहत आरोपी की शारीरिक मौजूदगी के बिना भी सुनवाई आगे बढ़ सकती है. इसमें ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का इस्तेमाल भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि इसलिए धारा 303 को कैदी की आवाजाही को नियंत्रित करने के एक तरीके के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि आपराधिक सुनवाई को टालने या रोकने के तरीके के रूप में.

उन्होंने कहा कि जहां सुरक्षा के जायज कारणों से आरोपी को शारीरिक रूप से पेश करने की अनुमति नहीं है, वहां कानूनी तौर पर उपलब्ध हर तकनीकी और न्यायिक तरीके का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि आपराधिक प्रक्रिया चलती रहे.

उनके मुताबिक, अगर ऐसा नहीं किया गया तो जनता के हित की रक्षा के लिए बनाया गया एक प्रावधान उल्टा जनता के एक दूसरे उतने ही महत्वपूर्ण हित, यानी समय पर आपराधिक न्याय मिलने की प्रक्रिया, के खिलाफ काम कर सकता है.

मूसेवाला मामला: अनमोल की कोर्ट के सामने पेश होने की मांग

सिद्धू मूसेवाला, एक मशहूर पंजाबी गायक, की 29 मई 2022 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मानसा जिले के जवाहरके गांव में कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने उनकी SUV को रोका और उस पर कई गोलियां चलाईं. वह 28 साल के थे.

उनकी हत्या बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया के गैंगस्टर सिंडिकेट की कथित साजिश के तहत की गई थी. मूसेवाला ने 2022 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था.

अनमोल भी इस मामले में वांछित है और उसने “न्याय के हित में” खुद को कोर्ट के सामने पेश करने की मांग की है.

इस मामले की जांच कर रही पंजाब पुलिस की SIT ने लॉरेंस बिश्नोई को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. इसके बाद गृह मंत्रालय के आदेश से उसे साबरमती जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी गई.

People take part in funeral procession of Sidhu Moosewala in Mansa on 31 May 2022. | ANI
31 मई 2022 को मानसा में सिद्धू मूसेवाला की अंतिम यात्रा में शामिल लोग. | ANI

पंजाब पुलिस के सूत्रों ने बताया कि अनमोल की कस्टडी लेने की भी कोशिश की गई थी, लेकिन गृह मंत्रालय के आदेश का हवाला देते हुए कोर्ट ने इसे रोक दिया.

बाबा सिद्दीकी हत्या मामले में हुई घटनाओं से अलग, अनमोल ने खुद मानसा कोर्ट में याचिका दायर की है. उसने मूसेवाला मामले में प्रोडक्शन वारंट जारी करने की मांग की है. इस साल फरवरी में दाखिल की गई अनमोल की याचिका पर अभियोजन पक्ष ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है.

याचिका में अनमोल ने कहा कि वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में काफी लंबे समय से बंद है और यह बात मानसा जिला पुलिस को अच्छी तरह पता है. इसके बावजूद पुलिस अब तक “उसे गिरफ्तार करने के लिए गिरफ्तारी वारंट हासिल करने में नाकाम रही है”. इसके कारण उसके खिलाफ मुकदमा शुरू नहीं हो सका है.

अनमोल ने अपनी याचिका में आगे कहा, “यह उचित और न्याय के हित में होगा कि आरोपी/आवेदक अनमोल बिश्नोई को इस माननीय कोर्ट के सामने पेश करने के लिए सेंट्रल जेल नंबर 04, तिहाड़ जेल, दिल्ली के अधीक्षक के नाम प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाए और आरोपी/आवेदक को इस मामले में हिरासत में लिया जाए, ताकि उसके खिलाफ मुकदमा शुरू किया जा सके.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: तुकाराम मुंढे दिखाते हैं कि भारत में खाना एक बड़ा मुद्दा है. बस वैसे नहीं, जैसा BJP ने सोचा था


 

share & View comments