गुरुग्राम: हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने एक स्थायी आदेश जारी किया है, जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि उनके विभाग में किस अधिकारी को क्या फैसला लेने का अधिकार है—ग्रुप A अधिकारी की पोस्टिंग से लेकर कुछ हज़ार रुपये की कीमत के खोए हुए सरकारी टाइपराइटर को राइट ऑफ करने तक.
संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत बनाए गए हरियाणा सरकार के 1977 के बिजनेस रूल्स के नियम 18 और 19 के तहत 12 अगस्त को जारी यह आदेश, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से अधीक्षक प्रशासन ने 19 अगस्त को जारी किया.
इसकी प्रतियां राज्यपाल कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षा निदेशालयों के सभी शाखा अधिकारियों और अधीक्षकों को भेजी गईं.
स्कूल शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि यह आदेश किस अधिकारी के पास क्या फैसला लेने का अधिकार है, इसे लेकर किसी भी तरह का भ्रम दूर करने के लिए जारी किया गया है.
अधिकारी ने कहा, “कई बार जब अधिकारियों को यह पता नहीं होता कि किसी मामले को किस स्तर पर मंजूरी मिलनी चाहिए, तो फाइलें अटक सकती हैं. यह आदेश इस समस्या को दूर करता है—अब हर तरह के मामले के सामने साफ तौर पर एक अधिकारी का नाम दिया गया है, इसलिए भ्रम या देरी की कोई गुंजाइश नहीं है.”
इस आदेश के केंद्र में पांच एनेक्सर हैं. इनमें से हर एनेक्सर में विभाग से जुड़े फैसलों की एक सूची दी गई है और बताया गया है कि नौकरशाही के किस स्तर पर इन फैसलों को लिया जाएगा.
एनेक्सर A मुख्यमंत्री की सूची है—शिक्षा विभाग से जुड़े वे मामले जिन पर मुख्यमंत्री फैसला लेंगे. इनमें ग्रुप A अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, बर्खास्तगी और अभियोजन की मंजूरी, नए सेवा नियम बनाना और “नीति से जुड़े किसी बड़े सवाल” वाला कोई भी मामला शामिल है.
इसमें कुछ दूसरे अहम मामले भी मुख्यमंत्री के पास रखे गए हैं. इनमें प्रशासनिक सचिवों और महानिदेशकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट और ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें प्रभारी मंत्री और उनके प्रशासनिक सचिव के बीच सहमति नहीं बनती.
एनेक्सर B खुद प्रभारी मंत्री के पास रहेगा. इसमें ग्रुप B, C और D कर्मचारियों के तबादले, 10 लाख रुपये से ज्यादा के भवन निर्माण और उपकरण खरीद के लिए प्रशासनिक मंजूरी और अधिकारियों को किताब लिखने की अनुमति देना शामिल है.
इसी सूची में आम लोगों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले भी शामिल हैं—निजी तौर पर चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों को अपने नियंत्रण में लेना, सरकारी कन्या स्कूलों को को-एजुकेशनल बनाना और सरकारी या सहायता प्राप्त संस्थानों का नाम रक्षा और अर्धसैनिक बलों के शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों या “प्रसिद्ध व्यक्तियों” के नाम पर रखना.
सूची के आखिर में एक सामान्य प्रावधान है: “सामान्य तौर पर, सरकारी शिक्षण संस्थानों से जुड़े सभी मामले.”
इसके नीचे एनेक्सर C है, जो अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या कमिश्नर-कम-सेक्रेटरी के लिए है. इसमें 10 लाख रुपये तक की वित्तीय अनियमितताएं, वरिष्ठ अधिकारियों की 55 साल की उम्र के बाद सेवा बढ़ाना, क्लास-I और क्लास-II अधिकारियों की विदेश यात्रा की मंजूरी और हरियाणा लोक सेवा आयोग को भेजे जाने वाले मामले शामिल हैं.
एनेक्सर D सचिव या विशेष सचिव के पास रहेगा. इसमें मंजूर सूची से बाहर के अस्पतालों में 3 लाख रुपये तक के मेडिकल खर्च की भरपाई, फील्ड अधिकारियों की ओर से दी गई सजा के खिलाफ अपील, गैर-राजपत्रित अधिकारियों को निजी यात्रा के लिए विदेश जाने की अनुमति और ग्रुप A और B अधिकारियों के पासपोर्ट के लिए NOC देना शामिल है.
सबसे छोटे मामले एनेक्सर E के तहत संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव के पास होंगे. इसमें 25,000 रुपये तक के खोए हुए सरकारी पैसे या सामान को राइट ऑफ करना, अंडर सेक्रेटरी को कैजुअल लीव देना और गैर-राजपत्रित कर्मचारियों की सेवा रिकॉर्ड में अपना नाम या जन्मतिथि बदलने की मांग तक शामिल है.
इस आदेश में उन जरूरी मामलों के लिए भी एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है, जब मंत्री चंडीगढ़ से बाहर हों. ऐसे मामलों को अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव मंजूरी दे सकते हैं. अगर वह अधिकारी भी बाहर हैं, तो संबंधित सचिव या विशेष सचिव मामले को मंजूरी दे सकते हैं. मंत्री के वापस आने पर फाइल उन्हें “जानकारी और उनके उचित समझे जाने वाले आदेशों के लिए” दिखाई जाएगी.
आदेश की एक धारा में कहा गया है कि बाद में किसी प्रतिनिधित्व, जांच या अदालत में सिर्फ इस आधार पर किसी फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती कि फाइल को तय अधिकारी से मंजूरी नहीं मिली थी. इसका उद्देश्य विभाग के सामान्य आदेशों को प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों से बचाना है.
आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि इससे पहले विभाग में समय-समय पर जारी किए गए सभी जिम्मेदारियां सौंपने वाले आदेश खत्म हो जाएंगे. इसमें यह भी कहा गया है कि इससे टकराने वाले सभी नियम, संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत मंत्री को मिले अधिकारों के कारण, लागू नहीं माने जाएंगे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: हरियाणा CM सैनी को काले कपड़े दिखाने पर 8 गिरफ्तार, SHO सस्पेंड, DCPs को नोटिस