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Sunday, 31 May, 2026
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लद्दाख के उपराज्यपाल ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दी, क्या होंगे इसके प्रमुख प्रावधान

नई पॉलिसी का मकसद नशीले पदार्थों और ड्रग्स पर बढ़ती निर्भरता को रोकना है, और लद्दाख इलाके में लोगों को कम अल्कोहल वाली शराब के ज़्यादा ऑप्शन देना है.

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लेह: उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. इस नीति का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में नशीले पदार्थों और ड्रग्स पर बढ़ती निर्भरता को कम करना और लोगों को कम अल्कोहल वाली शराब के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह नीति पारदर्शी, जवाबदेह और नियंत्रित तरीके से आबकारी राजस्व को बेहतर बनाने का प्रयास करती है. यह केंद्र शासित प्रदेश की आबकारी व्यवस्था में एक बड़ा सुधार भी है, जिसमें उदार, पारदर्शी और तकनीक-आधारित नियामक ढांचा पेश किया गया है. इसका उद्देश्य जनसुविधा, पर्यटन को बढ़ावा, राजस्व वृद्धि और शराब व्यापार के प्रभावी नियमन के बीच संतुलन बनाना है.

नई नीति नागरिक समाज संगठनों, एनजीओ, धार्मिक समूहों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाई गई है. इन चर्चाओं के दौरान उठाई गई प्रमुख चिंताओं में से एक थी नशीले पदार्थों और साइकोट्रॉपिक ड्रग्स पर बढ़ती निर्भरता. खासकर इसलिए क्योंकि लद्दाख में हार्ड लिकर उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण कुछ लोग अवैध ड्रग्स और तस्करी या नकली शराब का सहारा ले रहे थे.

लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया था कि अधिकृत शराब दुकानों पर शराब की उपलब्ध किस्मों का दायरा बढ़ाया जाए ताकि बढ़ते ड्रग्स के खतरे से निपटा जा सके. इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए एलजी सक्सेना ने मौजूदा आबकारी नीति की समीक्षा का आश्वासन दिया था.

इसके बाद अधिकारियों की एक समिति बनाई गई, जिसे संशोधित नीति का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया. समिति ने जनसुविधा, अवैध शराब व्यापार की रोकथाम, उसके सामाजिक प्रभाव, आबकारी राजस्व, दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता, लाइसेंस प्रक्रिया, डिजिटलीकरण और प्रवर्तन तंत्र से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की.

नई नीति की एक प्रमुख विशेषता मौजूदा प्रतिबंधात्मक व्यवस्था को उदार बनाना है. पहले ब्रांड और दुकानों की संख्या सीमित होने के कारण उपलब्धता कम थी, जिससे प्रशासन के अनुसार एक “कृत्रिम कमी” पैदा हो गई थी. इससे कई पर्यटक लद्दाख आने से बचते थे. बताया गया कि कई पर्यटक अपने साथ बाहर से शराब लेकर आते थे, जिससे केंद्र शासित प्रदेश को राजस्व का नुकसान होता था.

मुख्य सुधारों में रिटेल दुकानों के माध्यम से हार्ड लिकर, विदेशी शराब और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की बिक्री की अनुमति शामिल है. पहले रिटेल दुकानों पर केवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय ही बेचे जा सकते थे. शराब, बीयर और वाइन पर आबकारी शुल्क की दरों को भी तर्कसंगत बनाया गया है.

पहली बार गेस्ट हाउस और होमस्टे को भी शराब बेचने का लाइसेंस लेने की अनुमति दी जाएगी. पहले केवल होटल ही शराब परोस सकते थे. माइक्रोब्रुअरी वाले बीयर बार को भी अनुमति दी जाएगी.

सुविधा बढ़ाने के लिए ई-नीलामी के जरिए 20 शराब दुकानें खोली जाएंगी. पहले लद्दाख में केवल दो शराब दुकानें संचालित थीं.

अब नुब्रा, चांगथांग, शाम और जांस्कर में भी शराब उपलब्ध होगी. पहले यह केवल लेह शहर में उपलब्ध थी.

नीति के तहत होटल परिसर, जिसमें गेस्ट रूम भी शामिल हैं, में शराब पीने की अनुमति होगी. पहले इसकी अनुमति केवल बार तक सीमित थी. आबकारी लाइसेंस प्राप्त करने के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या भी 16 से घटाकर छह कर दी गई है.

लाइसेंस देने से पहले जिला प्रशासन की राय लेने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है. निर्धारित शुल्क के भुगतान पर निजी कार्यक्रमों, बैंक्वेट हॉल और पार्टी हॉल में शराब परोसने की अनुमति भी दी गई है.

अब निर्माताओं को शराब के थोक वितरण की अनुमति दी जाएगी. इसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाना और अच्छे ब्रांडों की उपलब्धता बढ़ाना है.

थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर एक समान शुल्क ढांचे के साथ सरल ड्यूटी प्रणाली लागू की गई है. सभी IMFL ब्रांडों पर प्रति लीटर शुद्ध अल्कोहल के लिए 500 रुपये की समान आबकारी शुल्क दर तय की गई है.

थोक लाइसेंस की वार्षिक फीस 3.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. लेह नगर क्षेत्र के वार्डों में रिटेल दुकान के लिए आधार मूल्य 60 लाख रुपये और अन्य क्षेत्रों में 30 लाख रुपये तय किया गया है. खुदरा विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है.

नई नीति लाइसेंस नियमों को भी आसान बनाती है. पहले शराब लाइसेंस लेने वाले होटलों के लिए पर्यटन पंजीकरण अनिवार्य था, लेकिन अब यदि संस्थान के पास जीएसटी पंजीकरण है तो इसकी जरूरत नहीं होगी. जो होटल जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें एफएसएसएआई या पर्यटन पंजीकरण देना होगा.

एलजी सक्सेना ने कहा कि संशोधित नीति का उद्देश्य ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करना है जो जनता की चिंताओं को संबोधित करे, नियमन को मजबूत बनाए, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे, अवैध व्यापार को रोके और कानूनी तथा नियंत्रित माध्यमों के जरिए नशीले पदार्थों पर निर्भरता कम करे.

उन्होंने नीति लागू करते समय पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकल्याण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई.

नीति में सख्त प्रवर्तन और उपभोक्ता संरक्षण के प्रावधान भी शामिल हैं. जो खुदरा विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर शराब बेचते पाए जाएंगे, उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और उनकी जमा की गई सुरक्षा राशि भी जब्त की जा सकती है.

निर्माताओं और आयातकों को शराब उत्पादों पर आबकारी विभाग द्वारा स्वीकृत सुरक्षा होलोग्राम लगाना होगा, ताकि कर चोरी रोकी जा सके और उत्पादों की ट्रैकिंग बेहतर हो सके.

नीति में प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने पर रोक लगाई गई है. शराब केवल स्वीकृत कांच की बोतलों, पीईटी बोतलों और टिन कैन में ही बेची जा सकेगी.

लाइसेंसधारक शराब कारोबार में 21 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को रोजगार दे सकेंगे. इससे अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

नीति के अनुसार खुदरा शराब दुकानों को धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक पार्कों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर होना होगा. यह भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप है.


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