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Friday, 24 July, 2026
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उज्ज्वला योजना पर सरकार का दावा-86.6% परिवार LPG पर निर्भर, 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर पर्याप्त बताए

केंद्र ने कहा कि PM उज्ज्वला योजना के 10.58 करोड़ से ज्यादा सक्रिय लाभार्थी हैं. सरकार ने साल में 9 से घटाकर 4 सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर देने के फैसले का भी बचाव किया.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत साल में मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 करने के अपने फैसले का बचाव किया है. सरकार ने संसद में कहा कि योजना के ज्यादातर लाभार्थी एक साल में 5 से कम सिलेंडर ही इस्तेमाल करते हैं और यह योजना अब भी लोगों को साफ ईंधन इस्तेमाल करने के लिए मदद दे रही है.

लोकसभा में कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सवाल के लिखित जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को बताया कि 1 जुलाई 2026 तक देशभर में पीएम उज्ज्वला योजना के 10.58 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं और योजना के तहत दिए गए सभी कनेक्शन अभी भी सक्रिय हैं.

सरकार ने रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर उठे सवालों के बीच एलपीजी सब्सिडी में किए गए बदलाव का भी बचाव किया.

मंत्री ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 में PMUY लाभार्थियों का औसत एलपीजी इस्तेमाल 4.71 सिलेंडर प्रति वर्ष रहा. इसे देखते हुए साल में 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर देना उचित माना गया है. इससे जरूरतमंद लोगों तक सब्सिडी बेहतर तरीके से पहुंचेगी और सरकारी खर्च भी संतुलित रहेगा.”

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बदलाव सिर्फ सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में किया गया है. इसके बाद भी उपभोक्ता बाजार कीमत पर जितने चाहें LPG सिलेंडर खरीद सकते हैं.

सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं.

इन्फोग्राफिक्स: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक्स: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट

सरकार के मुताबिक, जून 2026 में एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमत 796 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी. इसके कारण 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की बाजार कीमत 1,695 रुपये हो गई थी.

इसके बावजूद सरकार ने घरेलू सिलेंडर की खुदरा कीमत 942 रुपये ही रखी, यानी सरकार को हर सिलेंडर पर 700 रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा.

PM उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी भी मिलती है. इसके बाद दिल्ली में उनके लिए एक सिलेंडर की कीमत 642 रुपये रही.

सरकार ने कहा कि 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर करने के बाद भी जुलाई 2026 में हर उपभोक्ता को प्रति सिलेंडर 500 रुपये से ज्यादा की अप्रत्यक्ष सब्सिडी (अंडर-रिकवरी) मिल रही है.

सरकार ने इस चिंता को भी खारिज करने की कोशिश की कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थी अब भी लकड़ी और दूसरे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर हैं.

सरकार ने नीति आयोग की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 86.59 प्रतिशत PMUY परिवार अब खाना बनाने के लिए एलपीजी को अपना मुख्य ईंधन बना चुके हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, 74.27 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि एलपीजी इस्तेमाल करने के बाद घर के अंदर होने वाला वायु प्रदूषण कम हुआ है.

नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एलपीजी अपनाने के बाद कई लोगों को खांसी, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, धुएं की समस्या, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी दिक्कतों में कमी महसूस हुई.

सरकार ने टेरी (TERI) और आईआईटी कानपुर की रिपोर्टों का भी हवाला दिया. इन रिपोर्टों में कहा गया है कि उज्ज्वला योजना से लोगों की सेहत में सुधार हुआ है और घर के अंदर व बाहर दोनों तरह के वायु प्रदूषण में कमी आई है.

हालांकि, सरकार ने माना कि आज भी कई परिवार एक साथ कई तरह के ईंधनों का इस्तेमाल करते हैं.

सरकार ने कहा, “कई लाभार्थी त्योहार, शादी और बड़े कार्यक्रमों में एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह तेज, साफ और सुविधाजनक है. लेकिन कुछ लोग पारंपरिक स्वाद या आदत की वजह से कुछ व्यंजन बनाने के लिए अब भी लकड़ी या उपले का इस्तेमाल करते हैं.”

संसद में पेश राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में लाखों PMUY लाभार्थियों ने चार या उससे कम सिलेंडर खरीदे, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी रहे जिन्होंने पूरे साल एक भी सिलेंडर नहीं खरीदा.

हालांकि, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में चार से ज्यादा सिलेंडर खरीदने वाले लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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