नई दिल्ली: लेखक रतन शारदा ने शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों को संभालने के तरीके को लेकर बीजेपी की मीडिया टीम और उसकी आईटी सेल पर तीखा हमला बोला.
शारदा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता जाहिर की. हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह यह बात अपनी निजी क्षमता में कह रहे हैं. उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि जनता तक सही तरीके से संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन लोगों की है, उन्हें इस स्थिति के लिए जवाबदेह होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “अगर आप किसी खास वर्ग या पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया पोस्ट डाल रहे हैं और वे उसे समझ ही नहीं पा रहे हैं, तो यह साफ तौर पर संचार की विफलता है. अब हमें पता है कि युवा नाराज थे और कई मुद्दों को लेकर उनके अंदर गुस्सा लगातार बढ़ रहा था. युवाओं में NEET का मुद्दा उस गुस्से की सबसे बड़ी वजह बन गया. वे परेशान थे.”
उन्होंने कहा, “लेकिन बीजेपी की मीडिया टीम और आईटी सेल को इसकी जरा भी भनक नहीं थी. इससे पता चलता है कि आपका जमीनी हकीकत से कोई जुड़ाव नहीं है.”
शारदा ने कहा कि एक समय बीजेपी अपनी सोशल मीडिया रणनीति और आईटी सेल के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब वह इसलिए असफल हो रही है क्योंकि वह खुद नैरेटिव बनाने के बजाय सिर्फ दूसरों के नैरेटिव पर प्रतिक्रिया दे रही है.
उन्होंने कहा, “अब वे सिर्फ नैरेटिव पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं या उसका जवाब दे रहे हैं. पहले वे खुद मुद्दे और बातचीत तय करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है.”
उन्होंने X पर लिखा, “नोट: यह पूरी तरह मेरी निजी राय है. इसका RSS से कोई लेना-देना नहीं है. #CockroachProtests की अफरा-तफरी में हमने बीजेपी की मीडिया टीम और आईटी सेल की बड़ी विफलता पर ध्यान ही नहीं दिया. वामपंथी इकोसिस्टम के अच्छी तरह तैयार किए गए नफरत भरे नैरेटिव का जवाब देने के लिए वे कोई मजबूत नैरेटिव नहीं बना सके. वे मीम्स और ‘व्हाटअबाउटरी’ से आगे नहीं बढ़ पाए.”
संघ से प्रेरित पत्रिका Organiser में नियमित कॉलम लिखने वाले शारदा ने कहा कि जब पार्टी की मीडिया टीम और आईटी सेल अपना काम नहीं कर पाई, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा.
उन्होंने कहा, “स्थिति संभालने के लिए मोदी जी को खुद पूरी ताकत लगानी पड़ी. यहां तक कि आधी रात को रील भी बनानी पड़ी. यह बीजेपी की संचार व्यवस्था पर अच्छा असर नहीं डालता. इससे मुझे बहुत दुख हुआ. इसलिए मुझे यह कड़वी पोस्ट लिखनी पड़ी.”
बीजेपी की मीडिया टीम की आलोचना करते हुए शारदा ने कहा कि उसका जमीन से कोई जुड़ाव नहीं दिखता और उसके पास कोई फीडबैक सिस्टम भी नहीं है. इसी वजह से वह महीनों से बढ़ रहे युवाओं के गुस्से को समझ नहीं पाई.
उन्होंने कहा, “बीजेपी मीडिया का जमीन से कोई संपर्क नहीं दिखता. जाहिर है कि कोई फीडबैक सिस्टम भी नहीं है. वह सिर्फ NEET ही नहीं, बल्कि महीनों से बढ़ रहे युवाओं के गुस्से को नहीं समझ पाई. NEET तो सिर्फ आखिरी वजह बनी. मेरे जैसे लोग एक्सेल शीट या पावरपॉइंट नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव के आधार पर बात करते हैं. 2024 में मेरी आलोचना से बीजेपी को काफी फायदा हुआ था.”
RSS पर कई किताबें लिख चुके शारदा, जिनमें Conflict Resolution: The RSS Way और RSS From An Organisation To A Movement शामिल हैं, ने कहा कि बीजेपी की मीडिया टीम और आईटी सेल का ध्यान “शुभचिंतकों पर नजर रखने” में ज्यादा है.
उन्होंने दावा किया, “उनका ज्यादा ध्यान उन शुभचिंतकों पर नजर रखने में है, जो कभी-कभी ईमानदारी और सकारात्मक तरीके से बीजेपी की आलोचना भी करते हैं. फिर उन्हें धमकाया जाता है या गालियां दी जाती हैं. हर्षवर्धन जी @MediaHarshVT भी यह बात मेरी तरह जानते हैं.”
शारदा पहले भी अमित मालवीय की आलोचना कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि मालवीय “नागरिकों को ट्रोल” कर रहे हैं. यह तब हुआ था जब बीजेपी आईटी सेल प्रमुख ने X पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रॉपर्टी बिक्री में इंडेक्सेशन खत्म करने वाले बजट फैसले की आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए लिखा था, “आज रात हर कोई इंडेक्सेशन एक्सपर्ट बन गया है.” बाद में उन्होंने वह पोस्ट हटा दी थी.
उस समय शारदा ने मालवीय को सलाह दी थी कि वह लोगों की चिंताओं का जवाब दें, उनका अपमान न करें.
शुक्रवार को शारदा ने कहा कि वह “राष्ट्रवादी ताकतों की सफलता के लिए संघर्ष जारी रखेंगे, बीजेपी का समर्थन करेंगे, लेकिन जहां जरूरत होगी वहां अपनी बात भी रखेंगे.”
उन्होंने कहा, “मेरे जैसे लोगों के लिए देश सबसे पहले है. वे मेरी निगरानी कर सकते हैं, मुझे धमका सकते हैं या जैसा एक नए दौर के नेता ने कहा था, ‘सूद के साथ बदला’ भी ले सकते हैं. मैं उस पीढ़ी से हूं जिसने कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन दशकों तक काम किया, जब ये बाद में ऊपर से लाए गए नेता राजनीति में भी नहीं थे.”
शारदा पहले Organiser में एक लेख लिख चुके हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल करने का फैसला “गलत सलाह पर लिया गया फैसला” था. उस लेख से काफी विवाद हुआ था. उस समय RSS सूत्रों ने कहा था कि यह उनकी निजी राय थी.
इतना ही नहीं, Organiser में प्रकाशित एक अन्य लेख में शारदा ने लोकसभा चुनाव को “अतिआत्मविश्वासी बीजेपी कार्यकर्ताओं और कई नेताओं के लिए हकीकत का आईना” बताया था. उन्होंने कहा था कि इससे बीजेपी नेताओं का “झूठा अहंकार” सामने आया, जो मानते थे कि सिर्फ वही “असल राजनीति” समझते हैं, जबकि RSS से जुड़े लोगों को “गांव के भोले-भाले लोग” समझते हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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