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Friday, 24 July, 2026
होमदेशस्कूल छोड़ जंतर-मंतर पहुंचे छात्र, बोले—हमारी लड़ाई सिर्फ NEET पेपर लीक की नहीं

स्कूल छोड़ जंतर-मंतर पहुंचे छात्र, बोले—हमारी लड़ाई सिर्फ NEET पेपर लीक की नहीं

8वीं और 9वीं के छात्र प्रियांशु और सूरज ने कहा-जब तक सरकार जवाबदेही नहीं लेती, तब तक स्कूल नहीं जाएंगे.

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नई दिल्ली: किसी ने अपने माता-पिता से झूठ बोलकर घर छोड़ा, तो कोई सीधे स्कूल की यूनिफॉर्म में ही जंतर-मंतर पहुंच गया. यहां लगातार बढ़ रही छात्र-छात्राओं की भीड़ ने एक बात साफ कर दी है कि उनकी चिंता सिर्फ नीट-यूजी 2026 पेपर लीक तक सीमित नहीं है. वे सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया, सीयूईटी और दूसरे यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षाओं में देरी और पूरे भारतीय शिक्षा सिस्टम पर चर्चा चाहते हैं.

दिप्रिंट से बात करने वाले छात्र अकेले, दोस्तों के साथ या अपने माता-पिता के साथ यहां पहुंचे थे. इनमें से कुछ छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं और प्रदर्शन स्थल पर ही रुके हुए हैं.

बिहार के छपरा में एक डेंटल क्लिनिक में काम करने वाले 30 साल के अमित कुमार पूरे दिन प्रदर्शन के बाद बंगला साहिब गुरुद्वारे के बरामदे में बैठे थे. उनके साथ उनके दो भतीजे प्रियांशु और सूरज (दोनों 16 साल) भी आराम कर रहे थे. सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अपील पर वे सुबह से ही जंतर-मंतर पर मौजूद थे.

8वीं और 9वीं कक्षा के छात्र प्रियांशु और सूरज ने फैसला किया है कि जब तक सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करती, वे स्कूल वापस नहीं जाएंगे. बरामदे में बैठे दोनों संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों को याद करते हैं, जब सुरक्षा बलों ने उन पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी.

सूरज, प्रियांशु से कहता है, “भाई, क्या दिन था वो.”

इसके बाद वह अपनी पैंट ऊपर करके उन चोटों को देखता है, जो उसके मुताबिक लाठीचार्ज में लगी थीं. घाव तो सूख चुके हैं, लेकिन गुस्सा अभी भी बाकी है.

प्रियांशु ने कहा, “बिहार में इतने पेपर लीक हुए हैं. बच्चे बहुत गुस्से में हैं. अब हमारा भविष्य सुरक्षित नहीं है. बिहार में हमारे जैसे बहुत से छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं.”

दोनों पिछले कुछ साल में बिहार में हुए कई पेपर लीक मामलों का ज़िक्र करते हैं. इनमें 2024 और 2026 का नीट-यूजी पेपर लीक, 2024 का बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3.0) और 2023 की बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा शामिल हैं.

प्रियांशु ने कहा, “यह अब सिर्फ पैसे कमाने का धंधा बन गया है. कुछ लोग पेपर बेचते हैं और कुछ लोग खरीदते हैं. इन सबके बीच बिहार के छात्र पिस रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “हम घर वापस नहीं जाएंगे. हम यहां इंसाफ लेने आए हैं.”

सीयूईटी और सीबीएसई को लेकर उलझन

जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों—जैसे दिल्ली के रोहिणी की 17 साल की लविशा और उनकी दोस्त 17 साल की एंजेल ने कहा कि शिकायतों का समाधान ठीक से नहीं होता. उन्होंने खासकर सीबीएसई मूल्यांकन विवाद को लेकर चिंता जताई.

नीट की तैयारी कर रहीं लविशा ने कहा, “हम छात्रों के लिए सीबीएसई का मामला समझना बहुत मुश्किल था. जवाब पाने के लिए लोगों को एक्स पर पोस्ट करना पड़ा और कई अकाउंट्स को टैग करना पड़ा. शिकायत सुनने और उसका समाधान करने की व्यवस्था पूरी तरह खराब है. छोटे शहरों के छात्र ऐसी परेशानी होने पर क्या करते होंगे?”

उन्होंने आगे कहा, “मेरे जैसे छात्रों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन हमारी बात सुनने की बजाय हम पर लाठीचार्ज किया गया.” लविशा ने अपने माता-पिता से कहा था कि वह कोचिंग जा रही हैं, लेकिन वह प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए जंतर-मंतर पहुंच गई.

वहीं, एंजेल बी.कॉम करना चाहती हैं. उनका कहना है कि सीयूईटी छात्रों के लिए एक बड़ी चिंता है. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “एग्जाम सेंटर बहुत दूर दिए जाते हैं, जिससे एक्स्ट्रा पैसे लगते हैं. एडमिट कार्ड एग्जाम से बस कुछ दिन पहले मिलता है. कई बार एग्जाम में लेट हो जाता है, कैंसिल भी हो जाता है और सब कुछ इंटरनेट पर होता है, इसलिए किसी बदलाव की मांग करना भी मुश्किल हो जाता है.”

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच फर्क

17 साल के सागर यादव कुछ हफ्ते पहले उत्तर प्रदेश के झांसी से घर छोड़कर आए और जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल पर रहने लगे. नीट की तैयारी कर रहे सागर ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है और उनका कहना है कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच बहुत बड़ा अंतर है.

उन्होंने कहा, “सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में बहुत फर्क है. फीस में बड़ा अंतर है, पढ़ाई का स्तर अलग है और स्कूलों की सुविधाएं भी काफी अलग हैं.”

सागर का कहना है कि सरकार को खासकर ग्रामीण भारत में शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने कहा, “नीट का मामला तो सिर्फ शुरुआत है. शिक्षा व्यवस्था में और भी कई बड़ी समस्याएं हैं. छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन हमारी बात सुनने की बजाय हमें पीटा गया. हम पर लाठीचार्ज हुआ, कई छात्रों का सामान, पैसे और मोबाइल फोन तक खो गए.”

जून के आखिरी हफ्ते से छात्र, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और कई परिवार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए हैं.

सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकाला था. इस दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने मध्य दिल्ली में जुटी हजारों की भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया.

कुछ घंटे बाद प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए. इस बार उनकी नई मांग थी कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करने वाले प्रदर्शनकारियों को न्याय मिले.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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