नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की संभावना से इनकार कर दिया है. सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उससे भागना होगा.
सरकार के एक सूत्र ने शुक्रवार को कहा, “इस्तीफा देना मतलब समस्या से भागना है और भागना कोई समाधान नहीं है.”
सूत्रों ने बताया कि मौजूदा परीक्षा कानून में संशोधन सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा. सरकार का कहना है कि छात्रों की मांगों का यही ठोस जवाब होगा.
सरकार के मुताबिक, यह कोई नया कानून नहीं, बल्कि पहले से लागू कानून में संशोधन होगा. इसका उद्देश्य नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की व्यवस्था में सामने आई कमियों को दूर करना है.
सरकारी सूत्र ने कहा, “एक महीने के अंदर NTA की सभी समस्याएं 100 प्रतिशत ठीक कर दी जाएंगी. हमने सभी समस्याओं की सूची तैयार कर ली है और उन्हें ठीक करेंगे. सरकार का काम समस्याओं का समाधान करना है.”
सरकार के सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रस्तावित संशोधन से पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों की जांच करने वाली एजेंसियों की शक्तियां बढ़ेंगी और कानून को और मजबूत बनाया जाएगा.
यह कानून पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 है, जिसे संसद ने फरवरी 2024 में पारित किया था और उसी साल इसे लागू किया गया.
इस कानून के तहत संगठित पेपर लीक, फर्जी उम्मीदवार बैठाना और प्रश्नपत्र बेचने जैसे अपराधों को दंडनीय बनाया गया है. यह कानून NTA, UPSC, SSC, रेलवे और बैंक भर्ती परीक्षाओं पर लागू होता है. इसमें दोषियों के लिए कई साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है.
सरकारी सूत्रों का दावा है कि 2024 के कानून की मदद से कई नकल गिरोहों पर कार्रवाई की गई है.
सरकार ने यह भी कहा कि 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय आई थी, उसमें भी ऐसे कानून की जरूरत बताई गई थी, लेकिन किसी सरकार ने इसे लागू नहीं किया. सरकार का दावा है कि मोदी सरकार ऐसी कानून लाने वाली पहली सरकार है.
सरकार के अनुसार, हाल ही में हुई 50 परीक्षाओं में से 49 बिना किसी समस्या के हुईं, जबकि सिर्फ एक परीक्षा में गड़बड़ी हुई. यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ सरकार की बातचीत अभी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है.
शुक्रवार को विठ्ठलभाई पटेल हाउस में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करीब दो घंटे चली बैठक में सीजेपी ने साफ कहा कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेगी.
सीजेपी ने 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस आयुक्त से सार्वजनिक माफी की भी मांग की है.
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने और परीक्षा सुधारों से जुड़े 5 सूत्रीय प्रस्ताव को लागू करने की मांग रखी है.
सरकार को दिए गए पत्र में CJP ने कहा कि उसने देशभर के अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से बात करने के बाद यह तय किया है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET एस्पिरेंट्स के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने जैसी मांगों पर कोई समझौता नहीं होगा.
संगठन ने चेतावनी दी कि अगर उसकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज़ होगा और पूरे देश में फैलाया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने CJP की सभी मांगें सुनी हैं और उन पर विचार करने के बाद जवाब देगी. उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष शनिवार को फिर बैठक करेंगे.
शुक्रवार की बैठक सरकार और CJP के बीच औपचारिक बातचीत का तीसरा दौर था.
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