नई दिल्ली: मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच बढ़ते संघर्ष में एक और जान चली गई है. गुरुवार को कामजोंग जिले में घात लगाकर किए गए हमले में एक महिला की मौत हो गई, जबकि उसका पति घायल हो गया.
कामजोंग में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब एक हफ्ते पहले दिप्रिंट ने खबर दी थी कि मणिपुर के पहाड़ी जिलों कांगपोकपी, कामजोंग और उखरुल में नागा और कुकी समुदायों के बीच फिर से हिंसा भड़क उठी थी. इस हिंसा में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई थी और एक दर्जन से ज्यादा घरों में आग लगा दी गई थी. इन घटनाओं के पीछे नागा और कुकी उग्रवादियों के होने का शक है.
मणिपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को भारत-म्यांमार सीमा के पास कामजोंग जिले में हुई इस घटना के बारे में बताया.
उन्होंने कहा, “ऐशी/मोवाइलुप और फैकोह के बीच कच्ची सड़क पर यह घटना हुई. यह सीमा के खंभे नंबर 107 और 108 के पास था.” उन्होंने बताया कि यह जगह भारत-म्यांमार सीमा के काफी करीब है.
उन्होंने कहा, “बताया जा रहा है कि इस कच्ची सड़क से गुजरने वाले लोगों पर संदिग्ध नागा उपद्रवी गोलियां चला रहे थे.”
इस घटना में कुकी समुदाय की एक महिला, हटनेइकिम हाओकिप, की मौत हो गई. वह मोलवाइलुप की रहने वाली थीं. उनके पति पाओथांग हाओकिप घायल हो गए.
अधिकारी ने कहा, “कुकी पक्ष की ओर से भी जवाबी हमला किया गया. नागा पक्ष के लोगों के भी हताहत होने की खबर है.”
एक बयान में कुकी जो काउंसिल (KZC) ने कहा कि गुरुवार शाम करीब 4 बजे कामजोंग जिले में मोलवाइलुप से फैकोह जा रहे चार कुकी-जो ग्रामीण जरूरी सामान खरीदने के लिए निकले थे. बताया जा रहा है कि नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-इसाक-मुइवा (NSCN-IM) के सदस्यों ने उन पर घात लगाकर हमला किया.
बयान में कहा गया, “इस घटना के बाद NSCN-IM और जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट के कामसन गुट (ZUF-K) पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक, उनके हाथों हिंसा में मारे गए कुकी-जो नागरिकों की कुल संख्या अब 30 हो गई है.”
कुकी जो काउंसिल (KZC) ने इस हमले की निंदा की और मांग की कि तुरंत निष्पक्ष जांच की जाए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए.
KZC ने पहले कहा था कि उपमुख्यमंत्री लोसी दिको ने अपने ही मंत्रिमंडल की साथी और एक अन्य उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर आरोप लगाए थे. उन्होंने नागा नागरिकों की हत्या में कथित तौर पर शामिल होने के आरोपों को लेकर किपगेन को पद से हटाने की मांग की थी.
नागा समुदाय के आठ अन्य विधायकों ने भी किपगेन के खिलाफ इन आरोपों का समर्थन किया है. इससे भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन में गंभीर मतभेद सामने आए हैं.
NSCN-IM ने अभी तक इस घटना पर कोई बयान जारी नहीं किया है. द प्रिंट ने इस घटना पर प्रतिक्रिया जानने के लिए नागा संगठनों से संपर्क किया.
KZC के बयान में कहा गया, “हालांकि, दिको के अपने NSCN-IM और ZUF(K) से कथित संबंधों की भी जांच होनी चाहिए. इन संगठनों पर 30 कुकी-जो नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार होने के आरोप हैं. वह अपने ही साथी से जवाबदेही की मांग नहीं कर सकते, जबकि उनके अपने कथित संबंधों को लेकर सवाल अब भी अनसुलझे हैं.”
लगातार बनी हुई चुनौती
मणिपुर में 3 मई 2023 से जातीय संघर्ष जारी है. उस दिन राज्य के तीन प्रमुख समुदायों में से दो, मैतेई और कुकी समुदायों के बीच पहली बार हिंसा भड़की थी.
पिछले साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. इसके बाद हिंसा में कुछ समय के लिए कमी आई थी. इस साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन खत्म होने और युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद तनाव फिर बढ़ गया.
इस बार जातीय संघर्ष मैतेई और कुकी समुदायों के बीच से बदलकर कुकी और नागा समुदायों के बीच पहुंच गया है.
2023 से अब तक तीनों समुदायों के 300 से ज्यादा लोग इस हिंसा में मारे जा चुके हैं और 60,000 से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं.
नागा और कुकी समूहों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. मणिपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ पहाड़ी जिलों में सुरक्षा बलों के लिए कुकी और नागा समुदायों के बीच होने वाली झड़पों को नियंत्रित करना कई बार मुश्किल हो जाता है. इन जिलों में दोनों समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं.
नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, “उदाहरण के लिए, कांगपोकपी ऐसा जिला है जहां कुकी समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं. लेकिन यहां कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां नागा और कुकी दोनों समुदायों के लोग रहते हैं. इन इलाकों में तनाव बहुत जल्दी बढ़ जाता है.”
उपमुख्यमंत्री किपगेन ने भी इस हमले की निंदा करते हुए बयान जारी किया.
उन्होंने कहा, “जिला प्रशासन से जोरदार अपील की जाती है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे, तेजी से जांच करे और आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करे, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके.”
उन्होंने आगे कहा, “निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता और इससे सभी को नुकसान पहुंचता है. इस मुश्किल और नाजुक समय में मैं क्षेत्र के सभी समुदायों के नेताओं, युवाओं और नागरिकों से दिल से अपील करती हूं कि वे शांति बनाए रखें, पूरी सावधानी बरतें और अफवाहों या भड़काऊ बातों को पूरी तरह खारिज करें.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: कांग्रेस की नई पसंद नेहा बोरा के उभार के कमजोर पड़ते वाम दलों के लिए क्या मायने हैं?