नई दिल्ली: अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा, “जब से हमें पता चला है कि दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है, तब से हम सो नहीं पा रहे हैं.” अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि एक वीआईपी मेहमान के लिए ‘अतिरिक्त सेवाएं’ देने से मना करने पर उनकी हत्या की गई थी.
बुधवार रात को अंकिता के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. वे सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की 12 अक्टूबर को हुई नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. इस नियुक्ति से उन्हें कानूनी कार्रवाई से छूट मिल जाएगी. संविधान के अनुच्छेद 361(2) के तहत, किसी राज्य के राज्यपाल के पद पर रहने के दौरान किसी भी अदालत में उनके खिलाफ आपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता और न ही पहले से चल रहे आपराधिक मामले को आगे बढ़ाया जा सकता है. इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सुप्रिया श्रीनेत और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी शामिल हुए.
अंकिता भंडारी का शव 2022 में उनके लापता होने के छह दिन बाद चिल्ला नहर से बरामद हुआ था. तीन लोगों, पुलकित आर्य, जो बीजेपी नेता विनोद आर्य का बेटा है, रिजॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता को मई 2025 में दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. उसी साल बाद में, सोशल मीडिया पर उर्मिला सनावर ने दुष्यंत गौतम का नाम उस वीआईपी के रूप में लिया, जिसका जिक्र इस मामले में किया जा रहा था. उर्मिला सनावर, बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी हैं. विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को उठाया. इस साल जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की.
दिप्रिंट से बात करते हुए वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि जिस व्यक्ति पर 19 साल की लड़की की हत्या में शामिल होने का आरोप है, उसे अब इनाम दिया गया है.
उन्होंने कहा, “दुष्यंत गौतम वही वीआईपी हैं, जिनके लिए मेरी बेटी की हत्या की गई. फिर भी उन्हें राज्यपाल बना दिया गया. अंकिता के दुखी माता-पिता इस सच्चाई के साथ कैसे जी सकते हैं?”
उन्होंने कहा, “12 अक्टूबर को ही मैंने तय कर लिया था कि हमें सीधे दिल्ली जाना होगा. हमें दिल्ली से ही अपनी आवाज उठानी होगी. तभी हमारी आवाज पूरे देश में सुनी जाएगी.”
दिल्ली पहुंचने के बाद जब अंकिता के माता-पिता और दूसरे लोग प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इस बारे में भंडारी ने कहा, “हम सिर्फ सरकार से मदद मांगने आए थे. लेकिन उन्होंने हमें एक वैन में बैठाया और वहां से ले गए. क्या हमारी बेटियों के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाता है?”
उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि अगर सरकार ने गौतम की नियुक्ति का आदेश वापस नहीं लिया, तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे.
उन्होंने कहा, “अंकिता इस देश की बेटी थी और उसके लिए हर कोई सड़कों पर उतरेगा.”
उन्होंने कहा, “हमारी पहली मांग है कि सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी जज की निगरानी में होनी चाहिए. दूसरी मांग है कि रेणु बिष्ट का बयान दर्ज किया जाए. उनसे पूछा जाए कि रिजॉर्ट को तोड़ने का आदेश किसने दिया था.”
रेणु बिष्ट यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र की विधायक हैं. उन पर आरोप है कि अंकिता भंडारी की हत्या के तुरंत बाद उन्होंने वनंतरा रिजॉर्ट को बुलडोजर से गिराने का आदेश दिया था. कई लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से मामले से जुड़े जरूरी सबूत नष्ट हो गए.
भंडारी ने सवाल किया, “रेणु बिष्ट की कॉल डिटेल्स अब तक क्यों दर्ज नहीं की गई हैं?”
उन्होंने यह भी कहा कि उर्मिला सनावर और उनके पति सुरेश राठौर के बयान दर्ज किए जाने चाहिए. साथ ही, सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट भी होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “अब सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट होना चाहिए, क्योंकि वह बयान नहीं देंगे.”
भंडारी ने आगे कहा कि 18 से 24 सितंबर 2022 के बीच दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के फोन की डिटेल्स और उनकी लोकेशन सामने लाई जानी चाहिए. अजय कुमार बीजेपी के एक और नेता हैं, जिन पर अंकिता की हत्या के मामले में उन रहस्यमयी वीआईपी लोगों में से एक होने का आरोप है, जिनका जिक्र किया जा रहा है.
अंकिता की मां ने कहा कि जब भी वह किसी युवा लड़की से बात करती हैं, तो उन्हें अपनी बेटी की याद आ जाती है.
यह कहते हुए वह रो पड़ीं, “वह एक जवान लड़की थी, जिसके बहुत सारे सपने थे, लेकिन आज वह इस दुनिया में नहीं है. यह सब इन लोगों की वजह से हुआ.”
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