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Friday, 16 October, 2026
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तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष की पिछड़ा वर्ग से CM बनाने की मांग का रेवंत और पार्टी पर क्या होगा असर

तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष के बयान ने न सिर्फ विवाद खड़ा कर दिया है, बल्कि रेवंत रेड्डी के 2034 तक मुख्यमंत्री बने रहने के दावे को भी सीधे चुनौती दी है.

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हैदराबाद: तेलंगाना कांग्रेस में रेड्डी और पिछड़ा वर्ग (BC) के बीच बना राजनीतिक संतुलन उस समय बिगड़ गया, जब राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने ऐलान किया कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग से होगा.

पिछले हफ्ते हैदराबाद के बाहरी इलाके शमशाबाद में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नेताओं की एक बड़ी सभा में दिया गया यह बयान न सिर्फ विवाद का कारण बना, बल्कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस दावे को भी सीधे चुनौती देता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस लगातार चुनाव जीतकर सत्ता में आती है, तो वह 2034 तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मैंने यह बात पूरे भरोसे के साथ कही है क्योंकि मुझे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, दोनों का समर्थन हासिल है. राहुल जी ने खुद कांग्रेस का वैचारिक नारा ‘जितनी आबादी, उतना हक’ दिया है. तेलंगाना में BC की आबादी राज्य की कुल आबादी के 54 प्रतिशत से ज्यादा है. मुझे भरोसा है कि सभी समुदायों के लोगों के समर्थन से कांग्रेस BC को उनका सही हक दिलाएगी.”

गौड़ तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के ओबीसी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित एक जनसभा में बोल रहे थे. इस सभा में मांग की गई कि केंद्र सरकार जनगणना में ओबीसी की जातिवार गिनती को शामिल करे और बीसी को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करे. हालांकि, गौड़ ने अपनी बात कहते हुए सावधानी भी बरती. उन्होंने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार की ओर से कराए गए जाति सर्वेक्षण को ऐतिहासिक पहल बताया और इसे कराने का श्रेय रेवंत रेड्डी को दिया.

हालांकि, कांग्रेस के विधायकों और सांसदों ने उनके बयान पर ध्यान दिया. उन्होंने इसे भविष्य में चुनावी वादा करने की घोषणा से कहीं ज्यादा माना. तेलंगाना विधानसभा की कुल 119 सीटों में से सिर्फ 19 विधायक बीसी वर्ग से हैं. इसके बावजूद, कांग्रेस के बीसी नेताओं ने ऊंची जातियों के नेताओं के पारंपरिक राजनीतिक दबदबे को खुली चुनौती देने के लिए TPCC अध्यक्ष की चुपचाप सराहना की.

रेड्डी और कम्मा समुदाय के ज्यादातर विधायकों ने अपने अध्यक्ष के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन महेश गौड़ को तेलंगाना के सबसे पुराने कांग्रेसी नेताओं में से एक वी. हनुमंत राव (VHR) का समर्थन मिला. वह खुद बीसी समुदाय के बड़े नेता हैं और मुख्यमंत्री के 14 सलाहकारों में शामिल हैं. कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने महेश गौड़ की मांग दोहराई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से अपील की कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग से बनाया जाए.

हालांकि, बीसी के लिए सामाजिक न्याय की बात से आगे बढ़कर गौड़ के बयान ने तेलंगाना कांग्रेस के भीतर चल रही अहम राजनीतिक उठापटक को भी सामने ला दिया है. अब तक राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से सिर्फ रेवंत रेड्डी ने ही बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि वह अगले दशक तक राज्य का नेतृत्व करना चाहते हैं.

कोलकाता के सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज में समाजशास्त्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. सी. सतीश कुमार ने कहा कि उनके अनुसार, यह कांग्रेस का संगठन और विधायकों पर नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने का तरीका है.

सतीश ने दिप्रिंट से कहा, “अब महेश गौड़ का यह कहना कि ‘बीसी मुख्यमंत्री’ के विचार को खुद रेवंत का समर्थन मिलेगा, नेतृत्व के लिए एक दूसरी समय-सीमा सामने रखता है. इससे रेवंत की उस सोच को सीधी चुनौती मिलती है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के पास उनके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. कैबिनेट में कम से कम तीन से चार बीसी मंत्रियों को शामिल करने और रेवंत की सलाहकार टीम में बीसी नेताओं को जगह देने की मांग करने के बाद, यह रेवंत रेड्डी की सरकार पर यह दबाव बनाने का उनका तरीका है कि भविष्य में सत्ता किस तरह बांटी जानी चाहिए.”

सतीश ने बताया कि कांग्रेस पूरी तरह बीसी समुदाय को एकजुट करने की दिशा में बढ़ेगी या नहीं, यह अभी देखना बाकी है. लेकिन पिछड़े और वंचित समुदायों के नेतृत्व को लेकर बहस को मुख्यधारा में लाकर TPCC अध्यक्ष विपक्ष की ओर से चलाए जाने वाले बदनाम करने के अभियानों से कांग्रेस को बचाने की कोशिश भी कर सकते हैं. साथ ही, वह सत्ता के ढांचे में बड़े बदलाव का एक साफ रास्ता भी दिखा रहे हैं.

कांग्रेस को हाल ही में उस समय दबाव और आलोचना का सामना करना पड़ा, जब कानूनी अड़चनों के कारण स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी को 42 प्रतिशत आरक्षण देने का उसका वादा पूरा होने में रुकावट आई. ऐसे में पिछड़ा वर्ग से मुख्यमंत्री बनाने की संभावना सामने रखकर कांग्रेस खुद को भारत राष्ट्र समिति (BRS) और बीजेपी के बराबर खड़ा कर सकती है. इन दोनों दलों ने भी वादा किया है कि सत्ता में आने पर वे बीसी समुदाय से मुख्यमंत्री बनाएंगे.

तेलंगाना के बीसी समुदाय में बढ़ता आत्मविश्वास क्षेत्र में चल रहे एक बड़े और अस्थिर राजनीतिक बदलाव को भी दिखाता है. ऐसा ही बदलाव कर्नाटक में साफ दिखाई देता है, जहां लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय, दोनों बीसी वर्ग में आते हैं और हर चुनाव में राजनीतिक वर्चस्व के लिए एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं.

काकतीय विश्वविद्यालय के पूर्व राजनीति विज्ञान प्रोफेसर के. नागराजू ने कहा कि महेश गौड़ की ओर से BC समुदाय के लिए खुले तौर पर मुख्यमंत्री पद की मांग करने से कांग्रेस को अपने अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों का सावधानी से हिसाब लगाने की जरूरत भी महसूस होगी. 1956 में आंध्र प्रदेश के गठन के बाद से राज्य में सात मुख्यमंत्री रेड्डी समुदाय से रहे हैं.

नागराजू ने कहा, “कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मौजूदा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच मतभेदों के उलट, जहां दिल्ली में कांग्रेस के नेता अक्सर दोनों को मनाते रहते थे, तेलंगाना के मामले में नई दिल्ली के किसी भी वरिष्ठ कांग्रेस मंत्री या नेता ने TPCC अध्यक्ष की टिप्पणी की निंदा नहीं की है.”

उन्होंने कहा, “यह रेवंत को याद दिलाने का उनका नरम तरीका है कि मौजूदा मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें बदला जा सकता है. इसका मकसद यह संकेत देना है कि किसी एक समुदाय या नेता को राज्य की व्यवस्था पर बिना किसी रोक-टोक के हावी होने नहीं दिया जाएगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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