कोच्चि, 13 अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने ‘‘लाइफ मिशन’’ परियोजना में विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम के कथित उल्लंघन के मामले में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर को बृहस्पतिवार को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शिवशंकर सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं क्योंकि उनका सत्ताधारी दल और मुख्यमंत्री पर प्रभाव है।
न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने शिवशंकर को चिकित्सा आधार पर भी जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि अभियोजन एजेंसी या जेल अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि उनका समुचित उपचार कराया जाए।
अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले में याचिकाकर्ता (शिवशंकर) को ऐसा व्यक्ति नहीं ठहराया जा सकता है जो सुनवाई से भाग जाएंगे। हालांकि, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने की उनकी प्रवृत्ति का अनुमान लगाया जा सकता है, क्योंकि याचिकाकर्ता का केरल की सत्तारूढ़ पार्टी, विशेष रूप से केरल के मुख्यमंत्री पर बहुत अधिक प्रभाव है।’’
अदालत ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी और बाद में जमानत पर रिहा किए जाने के बाद भी, शिवशंकर को ‘गंभीर अपराधों में उनकी संलिप्तता की अनदेखी करते हुए’ सरकार ने सेवा में बहाल कर दिया था और वह अपनी सेवानिवृत्ति तक राज्य में एक ‘महत्वपूर्ण पद’ पर बने रहे।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि मामले में जांच शुरआती चरण में है और स्वप्न प्रभा सुरेश सहित कई आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
अदालत ने कहा, ‘अभियोजन स्वप्ना प्रभा सुरेश की गिरफ्तारी में देर क्यों कर रहा है, यह भी गंभीर चिंता का विषय है, जबकि इस अपराध में उनकी सक्रिय भूमिका थी।’’ इसके साथ ही अदालत ने कहा, ‘उपरोक्त कारणों से, याचिकाकर्ता को इस चरण में जमानत पर नहीं रिहा किया जा सकता है… फलस्वरूप, यह जमानत अर्जी खारिज की जाती है।’
भाषा अविनाश माधव
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