तिरुवनंतपुरम, 15 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन वाले कार्यक्रम में केरल के तीन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी हो रही है।
दरअसल केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय और तुंचत्तु एषुथाचन मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जिसके बाद यह विवाद शुरू हो गया।
भाजपा की केरल इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कार्यक्रम में कुलपतियों की मौजूदगी और आरएसएस का जोरदार समर्थन किया, वहीं मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर निशाना भी साधा।
सुरेंद्रन ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि अब तक सिर्फ तीन कुलपति ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘मुख्यमंत्री का कार्यकाल खत्म होने से पहले केरल के बाकी सभी कुलपति भी इसी तरह मोहनजी के संबोधनों में शामिल होंगे।’’
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि ‘‘आरएसएस इस देश की जीवन-शक्ति व आत्मा है’’ और मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वह ‘बेवजह न उलझें।’
सुरेंद्रन ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा सतीशन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जिस व्यक्ति ने आपको संविधान के तहत पद की शपथ दिलाई, वह भी आरएसएस के सदस्य थे। जो व्यक्ति आपका इस्तीफा स्वीकार करेगा, वह भी आरएसएस का सदस्य ही होगा।’’
सुरेंद्रन ने कुलपतियों के खिलाफ मुस्लिम संगठनों की आलोचना का जिक्र करते हुए सतीशन से कहा, ‘‘ मुस्लिम लीग, जमात-ए-इस्लामी और पीएफआई के सदस्य सहित आपके साथी भी आपकी तरह ही व्यर्थ में विलाप करते रह जाएंगे।’’
उन्होंने आरएसएस को ‘राष्ट्र की जीवनशक्ति और आत्मा’ बताते हुए कहा कि सिर्फ केरल में ही संगठन के चार सांसद, तीन विधायक, एक महापौर व एक उपमहापौर, दो नगर पालिका अध्यक्ष, कई पंचायत अध्यक्ष और लगभग 2,000 पंचायत सदस्य हैं।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘इसलिए बेवजह टकराने की कोशिश मत कीजिए।’’
सुरेंद्रन ने चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन का भी वही हाल होगा, जो ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और पिनराई विजयन का हुआ, जिन्हें हाल के विधानसभा चुनावों में क्रमशः पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सत्ता गंवानी पड़ी।
सतीशन ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरएसएस के कार्यक्रम में कुलपतियों की भागीदारी की आलोचना की थी, जिसके बाद सुरेंद्रन ने यह टिप्पणी की।
सतीशन की प्रतिक्रिया के बाद यूडीएफ सरकार के मंत्री ने भी सोशल मीडिया पर आरएसएस प्रमुख के कार्यक्रम में कुलपतियों की मौजूदगी की आलोचना की।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने तीनों कुलपतियों की भागीदारी को ‘बेहद गंभीर और अस्वीकार्य गलती’ बताया।
उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में हुआ है जब सरकार, आरएसएस परिवार द्वारा केरल के शैक्षणिक क्षेत्र का भगवाकरण करने के कथित प्रयासों का विरोध कर रही है।
चेन्निथला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस तरह के कदम हमारे विश्वविद्यालयों की धर्मनिरपेक्ष और गैर-पक्षपाती पहचान को कमजोर कर सकते हैं, उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन परिसरों को, जहां स्वतंत्र विचारों को पनपना चाहिए, विभाजन और नफरत फैलाने वाली जगहों में बदल सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि तीनों कुलपतियों को अपनी गलती सार्वजनिक रूप से माननी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहें।
भाषा जितेंद्र शोभना
शोभना
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.