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Thursday, 23 April, 2026
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मुसलमानों का चार फीसदी आरक्षण खत्म करने का कर्नाटक का फैसला प्रथम दृष्टया ‘त्रुटिपूर्ण’’ : न्यायालय

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नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के लिए आरक्षण में दो-दो प्रतिशत वृद्धि करने एवं ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) मुसलमानों के चार प्रतिशत आरक्षण को खत्म करने का कर्नाटक सरकार का फैसला प्रथम दृष्टया ‘त्रुटिपूर्ण’’ प्रतीत होता है।

न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि अदालत के सामने पेश किए गए रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि कर्नाटक सरकार का फैसला ‘पूरी तरह से गलत धारणा’ पर आधारित है।

कर्नाटक के मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कोई अध्ययन नहीं किया गया था और मुसलमानों का आरक्षण खत्म करने के लिए सरकार के पास कोई वास्तविक आंकड़ा नहीं था।

कर्नाटक की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया और पीठ को आश्वासन दिया कि 24 मार्च के सरकारी आदेश के आधार पर कोई नियुक्ति और दाखिला नहीं दिया।

वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्हें याचिकाओं पर अपना जवाब देने की अनुमति दिए बिना कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए।

पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की और मेहता एवं रोहतगी से अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई नीत कर्नाटक सरकार ने राज्य में मुसलमानों को हासिल चार फीसदी आरक्षण को हाल ही में खत्म करने का फैसला किया था।

कर्नाटक सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के मुसलमानों के लिए चार फीसदी कोटा समाप्त करते हुए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की दो नयी श्रेणियों की घोषणा की थी।

ओबीसी मुसलमानों के चार फीसदी कोटे को वोक्कलिगा और लिंगायत समुदायों के बीच बांट दिया गया है। यही नहीं, आरक्षण के लिए पात्र मुसलमानों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के तहत वर्गीकृत कर दिया गया है।

राज्य सरकार के फैसले के बाद अब वहां आरक्षण की सीमा करीब 57 फीसदी हो गई है।

भाषा अविनाश पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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