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Monday, 28 September, 2026
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कर्नाटक का नकली दवा रैकेट: एक महीने की तलाश के बाद बेंगलुरु एयरपोर्ट पर कथित सरगना गिरफ्तार

अगस्त में FDA की छापेमारी में बेंगलुरु के पास एक फार्महाउस से 5.05 करोड़ रुपये की नकली दवाएं और मशीनें मिली थीं. इसके बाद प्रशांत राजनबाबू अजरबैजान भाग गया था.

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बेंगलुरु: कर्नाटक में नकली दवाओं के रैकेट की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने सोमवार सुबह बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इसके कथित सरगना को हिरासत में लिया, पुलिस ने बताया.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रशांत राजनबाबू की गिरफ्तारी की पुष्टि की. वह अजरबैजान भाग गया था और भारत में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान उसे हिरासत में लिया गया.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “अभी हमने आरोपी को आज सुबह हिरासत में लिया है. हमें गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करनी हैं और पूछताछ शुरू करनी है. हम उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और निगरानी कर रहे थे.”

यह गिरफ्तारी कर्नाटक के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की छापेमारी के एक महीने से ज्यादा समय बाद हुई है. FDA ने बेंगलुरु के बाहरी इलाके में की गई छापेमारी में नकली दवाओं के एक रैकेट का पता लगाया था.

प्रशांत की गिरफ्तारी इस मामले में एक बड़ी सफलता है. इस मामले का बड़ी संख्या में लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि इसमें भारत की आईटी कैपिटल और दक्षिणी राज्य के दूसरे हिस्सों के बड़े अस्पतालों में नकली दवाओं की सप्लाई की गई थी.

नकली दवाओं के सामने आने के बाद लोगों में इन दवाओं को लेकर भरोसा कम हुआ है. इन डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कैंसर के इलाज की दवाओं समेत जीवन बचाने वाली दवाएं कई बड़े और नामी अस्पतालों में सप्लाई की थीं.

18 अगस्त को FDA ने बेंगलुरु के दक्षिण जिले के बिदादी में एक फार्महाउस पर छापेमारी के दौरान इस रैकेट का पता लगाया. यहां करीब 5.05 करोड़ रुपये की नकली दवाएं और औद्योगिक मशीनें मिली थीं.

छापेमारी के तुरंत बाद खबर आई थी कि प्रशांत देश छोड़कर अजरबैजान भाग गया है और वहीं छिपा हुआ है.

हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे काम और इसमें शामिल दूसरे लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी तभी सामने आने की संभावना है, जब प्रशांत को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जाएगी.

उस समय कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने संकेत दिया था कि यह दूसरे राज्यों से जुड़ा रैकेट हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि नकली दवाएं हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और दूसरी जगहों पर तैयार की गई थीं और बाद में उन्हें कर्नाटक लाया गया था.

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस रैकेट में सस्ती दवाओं का इस्तेमाल किया जाता था. आरोप है कि इन दवाओं को नई शीशियों में भरकर उन पर महंगी जीवन बचाने वाली दवाओं के नकली लेबल लगाए जाते थे. ये दवाएं बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के ब्रांड की नकल थीं. खास तौर पर ‘Pfizer’ ब्रांड के नाम से आने वाली आयातित दवाओं की नकल की गई थी.

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने पहले दिए एक बयान में कहा था, “खरीदारों को धोखा देने और गैरकानूनी मुनाफा बढ़ाने के लिए नकली लेबल पर QR/स्कैनिंग कोड लगाए गए थे. जांच के दौरान ये कोड पूरी तरह काम नहीं कर रहे थे. इन नकली दवाओं में कोई सक्रिय औषधीय तत्व नहीं था, गलत सामग्री थी या जहरीले पदार्थ थे. इससे लोगों के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा खतरा पैदा हो सकता था.”

अब तक 17 दवा वितरकों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं और 8 अन्य के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं. इन पर नकली दवाओं को बांटने में कथित भूमिका का आरोप है.

बेंगलुरु के बाहरी इलाके में मौजूद Pfizer C & F का लाइसेंस भी निलंबित किया गया है.

22 सितंबर को दिप्रिंट के सवाल के जवाब में Pfizer ने कहा कि रैकेट का पता चलने के बाद से वह अधिकारियों के साथ काम कर रही है.

Pfizer ने अपने जवाब में कहा, “जब नकली दवाओं का मामला हमारे सामने आया, तब से पिछले एक महीने से हम अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं.”

कंपनी ने आगे कहा, “इसके बाद हमने जांच में मदद के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें बाजार से Pfizer की उन दवाओं के बैच हटाना भी शामिल है, जिनके बैच नंबर नकली दवाओं पर कॉपी किए गए थे, ताकि भ्रम की स्थिति न बने. हमने असली और नकली उत्पादों में अंतर करने में भी मदद की है और प्रभावित बैचों से जुड़ी तकनीकी और दूसरी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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