रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का प्रदर्शन शुरू हुए एक हफ्ते से ज्यादा हो चुका है. बुधवार को राज्य सरकार ने बातचीत की पहल करते हुए रांची के एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार के जरिए छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया.
हालांकि, छात्रों ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडल की घोषणा नहीं की है. बातचीत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार और छात्रों के बीच सबसे बड़ा विवाद कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर है.
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) को रद्द करना, कथित गड़बड़ियों की सीबीआई से जांच कराना और जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में बड़े स्तर पर सुधार करना शामिल है.
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने मामले की जांच अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दी है. सीआईडी अब तक इस मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.
लेकिन जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, छात्रों को सीआईडी पर भरोसा नहीं है क्योंकि उसने 2024 में जेएसएससी परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों की भी जांच की थी. वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर भरोसा नहीं है. इसकी वजह केंद्रीय जांच एजेंसियों पर घटता भरोसा बताया जा रहा है.
हेमंत सोरेन का केंद्रीय एजेंसियों के साथ पहले भी विवाद रहा है. जनवरी 2024 में ईडी ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता चंपई सोरेन, जो अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में हैं, मुख्यमंत्री बने थे.
यह मामला कुछ निजी लोगों और सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से चल रहे जमीन कब्जाने वाले गिरोह से जुड़ा था. करीब छह महीने बाद जून में झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को जमानत दे दी थी. अदालत ने कहा था कि “यह मानने का कारण है कि याचिकाकर्ता दोषी नहीं हैं.”
नवंबर 2023 में सीबीआई ने साहिबगंज जिले में कथित अवैध खनन मामले में हेमंत सोरेन के करीबी पंकज मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज किया था. पंकज मिश्रा को जुलाई 2022 में ईडी ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद 2023 में सीबीआई ने औपचारिक मामला दर्ज किया.
छात्रों को सीआईडी पर भरोसा क्यों नहीं
राज्य की जांच एजेंसियों पर छात्रों का भरोसा पहले की जांचों की वजह से कम हुआ है.
प्रदर्शन की कोर कमेटी के सदस्य उपेंद्र कुमार आनंद के मुताबिक, छात्रों का भरोसा इसलिए टूटा क्योंकि सीआईडी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों की जांच की थी.
2024 में झारखंड हाईकोर्ट में 1,000 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इनमें मांग की गई थी कि मामले की जांच अदालत की निगरानी में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) या किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए.
यह परीक्षा पहले 28 जनवरी 2024 को होनी थी, लेकिन पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई. बाद में सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा कराई गई, लेकिन तब भी पेपर लीक के आरोप लगे.
इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि सीआईडी ने मामले की विस्तृत जांच की है और उसे पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला.
दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और जेएसएससी को परीक्षा परिणाम जारी करने की अनुमति दे दी. साथ ही अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े दूसरे आरोपों की जांच छह महीने के भीतर पूरी करे.
प्रदर्शन के एक अन्य आयोजक अंकित कुमार ने द प्रिंट से कहा, “हम सीआईडी पर भरोसा क्यों करें? वह अक्सर राज्य सरकार के दबाव में काम करती है. हमें उससे कोई व्यक्तिगत पूर्वाग्रह नहीं है, लेकिन सीआईडी ने अपने काम से खुद दिखाया है कि वह पक्षपाती है.”
रांची में चल रहा मौजूदा प्रदर्शन इस साल अप्रैल में हुई 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) के बाद शुरू हुआ. इस परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगने के बाद विवाद खड़ा हो गया था.
इस साल जनवरी में जेपीएससी ने 103 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था. इनमें डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) स्तर के पद भी शामिल थे. 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा में 36,000 से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया. 2 जुलाई को जारी परिणाम के मुताबिक, 2,204 छात्र मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए.
छात्रों ने श्रेणीवार (कैटेगरी-वाइज) कट-ऑफ अंक जारी करने की मांग की. उन्होंने मेरिट लिस्ट पर भी सवाल उठाए और कहा कि उस पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं.
इसके बाद सोशल मीडिया पर ओएमआर शीट्स वायरल होने लगीं. इनमें दावा किया गया कि कुछ छात्र बहुत कम सवाल हल करने के बावजूद परीक्षा में सफल हो गए.
इसके बाद छात्रों ने सीबीआई जांच और भर्ती व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया.
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