रांची: “मैं अपनी सभी मांगें पूरी होने तक यह लड़ाई जारी रखूंगा. चाहे यह सफेद चादर मेरा कफन ही क्यों न बन जाए.” 35 साल के देवेंद्र नाथ महतो भूख हड़ताल के चौथे दिन माइक पर धीमी आवाज में कहते हैं. महतो उन आठ प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं, जो रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं.
हालांकि, नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के उलट, रांची के इस स्टेडियम में दो मंच हैं, दो अलग-अलग प्रदर्शन चल रहे हैं और विधानसभा मार्च सहित अलग-अलग रैलियों का भी कार्यक्रम बनाया गया है.
यह प्रदर्शन अप्रैल में हुई 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (JPSC CSE) में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद शुरू हुआ.
लेकिन इस प्रदर्शन ने उन अभ्यर्थियों को एक साथ ला दिया है, जिन्होंने पिछले कई वर्षों में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाएं दी हैं.
एक मंच पर क्षेत्रीय पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) के तीन नेता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जबकि स्टेडियम के दूसरे छोर पर बने मंच पर चार अन्य प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
एक और प्रदर्शनकारी दोनों बड़े समूहों से अलग जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा के नीचे अकेले भूख हड़ताल पर बैठा है.
जहां अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद अलग से मार्च और रैली निकाल रही है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जला रही है, वहीं नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के नेता भी बुधवार को स्टेडियम पहुंचे. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने गुरुवार को मार्च का ऐलान किया है.
छात्र लगातार कह रहे हैं कि वे अपने आंदोलन को “गैर-राजनीतिक” रखना चाहते हैं. इसके बावजूद कांग्रेस और बीजेपी के नेता, उनके छात्र संगठनों के सदस्य और यहां तक कि अखिल भारतीय संत समिति के एक सदस्य भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे.
कुछ लोगों ने 14वीं JPSC CSE परीक्षा रद्द करने, CBI जांच और भर्ती व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग का समर्थन किया.
जबकि कुछ अन्य लोगों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक कई दूसरी मांगें उठाईं.
प्रदर्शन में शामिल छात्र JSSC-CGL भर्ती घोटाले की कथित CBI जांच और JSSC भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग वाले पोस्टर लेकर खड़े थे.
प्रदर्शन की कोर कमेटी के सदस्य पवन कुमार गोस्वामी ने दिप्रिंट से कहा, “हमें लगा कि मंच धीरे-धीरे एक खास राजनीतिक पार्टी का मंच बनता जा रहा है. हम शुरू से कह रहे हैं कि यह किसी पार्टी का मंच नहीं, छात्रों का मंच है.”
उन्होंने कहा, “हम सभी से कह रहे हैं कि अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ मंच पर मत आइए. अगर ऐसा करेंगे तो आपका यहां स्वागत नहीं है.”
इस प्रदर्शन में 20 साल की उम्र वाले युवाओं से लेकर 30 के आखिरी और 40 की शुरुआती उम्र के लोग शामिल हैं. उनकी आवाजें और चेहरे अलग-अलग हैं. कई बार वे एकजुट दिखते हैं और कई बार आपस में मतभेद भी नजर आते हैं.
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी है, जिसने अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है. बुधवार को सरकार ने बातचीत का प्रस्ताव भी दिया. रांची SDM कुमार रजत और ADM धनंजय कुमार ने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया.

करीब दो घंटे की चर्चा के बाद छात्रों ने अधिकारियों से कहा कि बातचीत छात्रों के बीच खुले में होनी चाहिए, बंद कमरे में नहीं. हालांकि कुछ घंटे बाद कोर कमेटी के सदस्य रविंद्र पासवान ने मीडिया से कहा कि वे गुरुवार तक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम बता देंगे.
इसी दौरान बुधवार शाम जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में गाड़ियों का काफिला, सुरक्षा व्यवस्था और छतरियां नजर आईं. भारी बारिश के बीच झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में NDA का प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शनकारी छात्रों से मिला और उन्हें समर्थन का भरोसा दिया.
मरांडी ने मीडिया से कहा, “कल विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है. हम सभी को महसूस हुआ है कि यह सिर्फ गड़बड़ी नहीं बल्कि झारखंड में नौकरियों की बिक्री का मामला है. सर्वदलीय बैठक में भी मैंने साफ कहा कि इन गड़बड़ियों को देखते हुए परीक्षा रद्द होनी चाहिए. पूरे मामले की CBI जांच होनी चाहिए. स्पीकर ने कहा है कि इस पर बैठक में चर्चा होगी और फिर फैसला लिया जाएगा.”
सोनम 2.0?
स्टेडियम के एक मंच पर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो बैठे हैं, जो रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.
महतो क्षेत्रीय पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) से जुड़े हैं. इस पार्टी की स्थापना 2024 में जयराम कुमार महतो उर्फ टाइगर जयराम महतो ने की थी. इस सप्ताह पार्टी के दो और नेता भी महतो के साथ भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
35 वर्षीय देवेंद्र नाथ महतो पांच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं.
इस पार्टी का पहले नाम झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति था. इसकी शुरुआत दिसंबर 2021 में हुई थी, जब झारखंड सरकार ने धनबाद और बोकारो की जिला भर्ती परीक्षाओं के लिए क्षेत्रीय भाषाओं की सूची जारी की थी. इस सूची में झारखंड की आदिवासी भाषाओं के साथ भोजपुरी, मगही और अंगिका को भी शामिल किया गया था.

पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जनवरी 2022 में “झारखंडी भाषा संघर्ष समिति” नाम से युवा और छात्र संगठन बनाया गया था, ताकि भाषा थोपने के खिलाफ आंदोलन को तेज किया जा सके.
टाइगर महतो का नाम इसी समिति के एक आंदोलन से सामने आया. बाद में उन्होंने दूसरे मुद्दों का भी समर्थन किया और 2024 में, पार्टी को मान्यता मिलने के कुछ महीने बाद चुनाव लड़ने का फैसला किया.
गिरिडीह लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए जयराम महतो को 3.47 लाख से ज्यादा वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे. इससे वे झारखंड में OBC समुदाय का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे.
बाद में उन्होंने उसी साल डुमरी विधानसभा सीट से JMM की बेबी देवी को 10,945 वोटों से हराया. हालांकि बेरमो सीट से कांग्रेस के अनुप सिंह से 29,375 वोटों से हार गए.
अब उनकी पार्टी के तीन सदस्य झारखंड में भूख हड़ताल पर हैं. देवेंद्र नाथ महतो को “सोनम वांगचुक 2.0” भी कहा जा रहा है.
35 वर्षीय देवेंद्र पोस्ट ग्रेजुएट हैं और अब तक तीन चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन कभी जीत नहीं पाए. 2019 में उन्होंने सिल्ली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और 1,445 वोट मिले. बाद में रांची लोकसभा चुनाव में उन्हें 1.32 लाख वोट मिले. 2024 विधानसभा चुनाव में उन्होंने JLKM के टिकट पर सिल्ली सीट से चुनाव लड़ा और 41,725 वोट हासिल किए.
उनके खिलाफ कम से कम 11 मामले लंबित हैं. इनमें आपराधिक धमकी, हत्या की कोशिश, अपहरण, दंगा, गलत तरीके से रोकना, गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनना, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना और आपराधिक अतिक्रमण जैसे आरोप शामिल हैं.
हालांकि उनके पार्टी सहयोगी और भूख हड़ताल पर बैठे प्रेम नायक का कहना है कि ये सभी मामले छात्र आंदोलनों से जुड़े हैं.
कई आवाजें
स्टेडियम के दूसरी तरफ बने मंच पर चार प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
30 वर्षीय रूपेश कुमार पाल कहते हैं कि उन्होंने 2017 से अब तक 14-15 परीक्षाएं दी हैं. 27 वर्षीय हबीबा कहती हैं कि उन्होंने 2017 से अब तक लगभग 15-20 परीक्षाएं दी हैं. वह इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बोकारो से रांची आई हैं.
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी एक प्रदर्शनकारी JSSC-CGL भर्ती घोटाले में न्याय की मांग वाला पोस्टर पकड़े हुए है.
इनके साथ रांची की 28 वर्षीय सबिता कुमारी और लेस्लीगंज की 39 वर्षीय राहुल क्रांति भी भूख हड़ताल पर हैं.
भूख हड़ताल पर बैठे सभी प्रदर्शनकारियों के आसपास डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी और भगत सिंह की तस्वीरें लगी हैं. कुछ प्रदर्शनकारी भारत का संविधान हाथ में लेकर बैठे हैं.
जयपाल सिंह मुंडा की एक प्रतिमा के पास रामगढ़ के ब्रह्मानंद कुमार महतो अकेले बैठे हैं. उनके एक रिश्तेदार ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने 2023 में JSSC की कीटपालक भर्ती परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन अब तक उनकी नियुक्ति नहीं हुई है.
दूसरे दोनों मंचों की तरह उनके पास छात्रों की बड़ी भीड़ नहीं है और न ही उनके ऊपर पक्का टेंट है. बारिश के दौरान अक्सर कुछ लोग छाता या अस्थायी तिरपाल लेकर उसके ऊपर खड़े रहते हैं.
साझा मंच
बुधवार दोपहर प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े छात्र संगठनों के नेता मौजूद थे.
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और राजस्थान यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया भूख हड़ताल पर बैठे चार छात्रों से मिले. वे उस कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जिसने बुधवार शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को छात्रों के आंदोलन से जुड़ा ज्ञापन सौंपा.

उसी समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पास के फिरायालाल या अल्बर्ट एक्का चौक पर अपना “आक्रोश मार्च” पूरा किया. इसके बाद उसके कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाया.
ABVP झारखंड के प्रदेश सचिव प्रकाश टुटी और अन्य ABVP नेता भी मार्च के बाद स्टेडियम पहुंचे. उसी समय NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस के नेता भी प्रदर्शनकारियों से बात कर रहे थे.
प्रकाश टुटी ने कहा कि ABVP CBI जांच, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और ऐसे मामलों में गिरफ्तार लोगों के मुकदमों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग कर रही है.
अखिल भारतीय संत समिति के स्वामी दिव्यानंद महाराज भी उसी समय प्रदर्शन स्थल पहुंचे.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मैं भी इन बच्चों के साथ प्रदर्शन करूंगा. अगर छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं तो आपको उनकी बात माननी चाहिए. अगर नहीं मानते तो जैसे धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, वैसे ही आपको भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए. नहीं तो जनता जब आपको कुर्सी से उतारेगी, उसके लिए तैयार रहिए.”
जब सभी छात्र संगठनों के नेता एक साथ मंच के पास मौजूद थे, तभी आयोजकों में से एक ने माइक से घोषणा की कि वे नहीं चाहते कि कोई भी नेता उनके आंदोलन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक मकसद के लिए करे.
जैसे ही सभी छात्र संगठन के नेता स्टेडियम से बाहर निकले, पूरे प्रदर्शन स्थल पर नारे गूंजने लगे. “राजनीति नहीं चलेगी, जिंदाबाद जिंदाबाद. छात्र एकता जिंदाबाद.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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