scorecardresearch
Thursday, 6 August, 2026
होमदेशकौन है कौशल-बंबीहा गैंग का सदस्य गौरव गडोली जिसे 3 साल की तलाश के बाद भारत लाया गया

कौन है कौशल-बंबीहा गैंग का सदस्य गौरव गडोली जिसे 3 साल की तलाश के बाद भारत लाया गया

गिरफ्तारी के डर से गौरव गडोली 30 नवंबर 2023 को लखनऊ एयरपोर्ट से दुबई भाग गया था. हरियाणा STF ने तीन साल तक पीछा करने के बाद उसे भारत प्रत्यर्पित कराया.

Text Size:

नई दिल्ली: अट्ठाईस साल का गौरव गडोली सिर्फ दुबई में ट्रैवल एडवाइजर और बाद में जॉर्जिया में फूड डिलीवरी एजेंट ही नहीं था. इस दौरान वह कौशल-बंबीहा गैंग के लिए लॉजिस्टिक्स, भर्ती और रंगदारी वसूली का काम भी संभाल रहा था. यह गैंग लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ के आपराधिक गिरोह का बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता है. हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 4 अगस्त को उसे यूएई से भारत प्रत्यर्पित कराया. इसके साथ ही तीन साल से चल रही उसकी तलाश खत्म हुई.

कौशल-बंबीहा गैंग के सरगना कौशल चौधरी का साला गौरव गडोली यूएई और बाद में जॉर्जिया में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था. हरियाणा पुलिस के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि वह गैंग के पैसों का हिसाब संभालता था. साथ ही उत्तर भारत के राज्यों से नए युवकों की भर्ती करवाता था और खास वारदातों के लिए हथियारों की सप्लाई भी कराता था.

जानकारी के मुताबिक, गडोली के खिलाफ हरियाणा में छह आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें रेवाड़ी और गुरुग्राम के मामले शामिल हैं, जो रंगदारी, हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े हैं.

हरियाणा पुलिस अब दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के दूसरे जिलों में भी उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है.

गडोली, मनीषा चौधरी का भाई है, जिसे ‘लेडी डॉन’ और ‘रैनसम क्वीन’ के नाम से जाना जाता है. कई मामलों में चार राज्यों की पुलिस को उसकी तलाश थी. उसे नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था.

12वीं तक पढ़ाई, फिर अपराध की दुनिया में एंट्री

गौरव गडोली गुरुग्राम के सेक्टर-10 थाना क्षेत्र के गडोली खुर्द गांव का रहने वाला है. उसकी बहन मनीषा की शादी नौ साल पहले कौशल चौधरी से हुई थी. 2019 में कौशल के जेल जाने के बाद मनीषा ने गैंग की कमान संभाल ली थी.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मनीषा की वजह से ही गडोली की गैंग में अहम पहचान बनी. एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गडोली ने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की थी. इसके बाद वह अपराध की दुनिया में आ गया और कौशल चौधरी के संपर्क में आया.

अधिकारी ने कहा, “वह लगातार कौशल चौधरी के संपर्क में रहा और उसका भरोसेमंद बन गया. रिकॉर्ड के मुताबिक, उसका पहला अपराध रेवाड़ी के एक बड़े अस्पताल में रंगदारी के लिए कराई गई फायरिंग की साजिश और उसका समन्वय करना था. इसके बाद वह गैंग का हिस्सा बन गया और उसे बड़ी जिम्मेदारियां मिलने लगीं.”

गैंग सरगना कौशल चौधरी का साला होने का फायदा भी उसे मिला.

‘डब्बा कॉलिंग’

गौरव गडोली पिछले तीन साल से पुलिस की नज़र में था और भारत से बाहर रह रहा था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के डर से वह 30 नवंबर 2023 को लखनऊ एयरपोर्ट से दुबई की फ्लाइट पकड़कर भारत छोड़कर चला गया था.

वह साहिल यादव नाम से फर्जी तरीके से बनवाए गए पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था. इस पासपोर्ट में उसके पिता का नाम उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी कृष्णा यादव दर्ज था.

हरियाणा STF के एक अन्य अधिकारी ने बताया, “पहले गडोली दुबई गया, जहां वह उसी फर्जी पहचान के साथ ट्रैवल एडवाइजर के तौर पर काम कर रहा था. बाद में वह जॉर्जिया चला गया, जहां उसने फूड डिलीवरी एजेंट का काम किया. इस दौरान भी वह लगातार कौशल-बंबीहा गैंग के संपर्क में रहा और गैंग के काम करवाता रहा.”

दूसरे अधिकारी ने बताया, “गडोली ने फरार चल रहे पवन शोकीन के लिए ‘डब्बा कॉल’ की व्यवस्था कर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलाने में मदद की.” उन्होंने बताया कि ‘डब्बा कॉल’ गैंग के सदस्यों के बीच बातचीत का एक तरीका है, जिससे उनके फोन नंबर छिपे रहते हैं.

अधिकारी ने समझाया, “इसमें एक व्यक्ति किसी को फोन करता है. फोन उठाने वाला दूसरे व्यक्ति को अलग कॉल पर जोड़ देता है और फिर दोनों स्पीकर पर बात करते हैं. यह बातचीत का पुराना तरीका है, जिसमें किसी का फोन नंबर सामने नहीं आता. गडोली भी इसी तरीके से बात करता था.”

हरियाणा एसटीएफ के लिए 2026 से अब तक यह 13वां प्रत्यर्पण है. इससे पहले 10 अप्रैल को कौशल-बंबीहा गैंग के सहयोगी साहिल चौहान को थाईलैंड से भारत लाया गया था. उसके खिलाफ हत्या समेत गंभीर अपराधों के 16 मामले दर्ज हैं. इस कार्रवाई के लिए हरियाणा पुलिस ने एनसीबी, सीबीआई दिल्ली पुलिस और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया था.

हरियाणा एसटीएफ ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को प्रस्ताव भेजकर विदेश में छिपे चार गैंगस्टरों—हिमांशु भाऊ, रोहित गोदारा, रणदीप मलिक और अनिल पंडित—पर 10,000 डॉलर-10,000 डॉलर का इनाम घोषित करने की मंजूरी मांगी है. ये सभी रंगदारी, टारगेट किलिंग और दूसरे गंभीर संगठित अपराधों के कई मामलों में आरोपी हैं. ये विदेश में रहकर अपने साथियों के जरिए हरियाणा और भारत के दूसरे हिस्सों में आपराधिक गतिविधियां चला रहे हैं.

मंगलवार को गृह मंत्रालय ने बताया कि 2019 से अब तक 36 देशों से 274 फरार अपराधियों का भारत प्रत्यर्पण कराया जा चुका है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: झारखंड: पूर्व आयोग अध्यक्ष के कर्मचारी और आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारियों को CID ने किया गिरफ्तार


 

share & View comments