नई दिल्ली: झारखंड अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने बुधवार को पांच लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष के दो कर्मचारी और वह कंपनी भी शामिल है, जिसने आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट के तहत 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा कराई थी. इन सभी को दो चरणों में हुई परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है.
इन नई गिरफ्तारियों के बाद परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 19 हो गई है. राज्य एजेंसी ने धर्मेंद्र को भी गिरफ्तार किया, जो रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी एल. खियांगटे के सरकारी आवास स्थित कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर था. सीआईडी की छापेमारी के बाद खियांगटे ने जेपीएससी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. राज्य एजेंसी अब तक उनसे चार बार पूछताछ कर चुकी है.
राज्य एजेंसी ने 22 जुलाई को जांच शुरू की थी. उस समय 19 अप्रैल को हुई परीक्षा के समझौता (कम्प्रोमाइज) होने के आरोप लगातार बढ़ रहे थे. सीआईडी ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ से रक्षक सिंह को भी गिरफ्तार किया. वह टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड में अकाउंटेंट के तौर पर काम करते हुए इस परीक्षा में सफल हुआ था. इस परीक्षा के जरिए राज्य में ग्रुप ए और ग्रुप बी सिविल सेवा के 103 पद भरे जाने थे.
इससे पहले एजेंसी कंपनी के चार कर्मचारियों—हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार और अभय कुमार तिवारी, को भी गिरफ्तार कर चुकी है. अभय कुमार तिवारी झारखंड के गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर भी तैनात है.
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) जैसी राज्य की भर्ती एजेंसियों की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ राजधानी रांची में प्रदर्शन पूरे जोर पर हैं. हेमंत सोरेन सरकार ने बुधवार को छात्रों की समस्याओं पर बातचीत के लिए दो प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजा.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, जिनमें जेपीएससी पेपर लीक की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग भी शामिल है, तो वे 10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च निकालेंगे और आंदोलन तेज़ करेंगे.
मुख्य आरोपियों के अलावा सीआईडी ने प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले तीन उम्मीदवारों को भी गिरफ्तार किया है. इस परीक्षा का परिणाम 2 जुलाई को घोषित हुआ था. जांच में गिरफ्तार सफल उम्मीदवारों की पहचान उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार के रूप में हुई है. तीनों रांची के रहने वाले हैं.
सीआईडी के प्रवक्ता ने कहा कि उमाकांत उरांव दूसरे उम्मीदवारों को इस आपराधिक नेटवर्क से जोड़ने का भी काम करता था. प्रवक्ता ने कहा, “उसने धोखाधड़ी और अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करके 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएसससी) की प्रारंभिक परीक्षा पास की. वह उम्मीदवार उपलब्ध कराने वाले एजेंट के तौर पर भी काम करता है.”
इससे पहले मंगलवार को सीआईडी ने उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार को भी परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था. सीआईडी के प्रवक्ता ने बुधवार को जारी बयान में कहा, “मामले की जांच जारी है. जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी.”
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