रांची, 20 अगस्त (भाषा) झारखंड सरकार आकाशीय बिजली गिरने, डूबने, सर्पदंश और सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि रोकने के लिए जल्द ही व्यापक कार्ययोजना लागू करेगी। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने इसके तहत एकीकृत ‘झारखंड आपदा राहत प्रबंधन’ पोर्टल विकसित किया है। इसकी प्रायोगिक परियोजना धनबाद और बोकारो में शुरू की गई है, सफलता के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
विभाग के संयुक्त सचिव राकेश कुमार ने बताया कि देश में 26 प्रकार की आपदाओं में से झारखंड में इन चार आपदाओं से सबसे अधिक जनहानि होती है।
पोर्टल पर संवेदनशील स्थानों, सावधानियों और जनजागरूकता से जुड़ी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष एक मई से 31 जुलाई के बीच राज्य में विभिन्न आपदाओं से 431 लोगों की मौत हुई। इनमें 180 मौतें आकाशीय बिजली गिरने से, 161 से डूबने और 80 सर्पदंश से हुईं।
इन आंकड़ों में सड़क दुर्घटनाओं की मौतें शामिल नहीं हैं।
वर्ष 2022 से अप्रैल 2026 तक झारखंड में सर्पदंश के 9,438 मामले सामने आए, जबकि इस वर्ष आकाशीय बिजली गिरने से करीब 100 लोगों की मौत हुई है। राज्य में हर साल औसतन करीब 3,000 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं।
कुमार ने बताया कि डूबने की घटनाओं वाले संवेदनशील जलस्रोतों की पहचान कर उन्हें भौगोलिक निर्देशांक के साथ पोर्टल में शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली और सर्पदंश से जनहानि रोकने में जागरूकता महत्वपूर्ण है। पिछले वित्त वर्ष में 900 सरकारी और निजी स्कूलों में आपदा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए दुर्घटना संभावित स्थानों और ब्लैक स्पॉट की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इसके माध्यम से मुआवजे के लिए दावा किया जा सकेगा, जिससे प्रक्रिया आसान होगी।
झारखंड राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि सभी सिविल सर्जनों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
एनएचएम की राज्य इकाई इस पहल में सहयोग करेगी और लोगों को सर्पदंश के बाद उपचार के लिए मिलने वाले ‘गोल्डन ऑवर’ को न गंवाने के प्रति जागरूक करेगी।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की राष्ट्रीय कार्ययोजना का लक्ष्य 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और दिव्यांगता के मामलों में 50 प्रतिशत कमी लाना है।
भाषा तान्या रंजन
रंजन
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.