रांची, 14 अगस्त (भाषा) झारखंड में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज में घायल मध्यप्रदेश का शिवम सिंह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती है।
मध्यप्रदेश के सतना जिले के निवासी शिवम सिंह (36) का अस्पताल के आपातकालीन विभाग की ‘हाई-डिपेंडेंसी यूनिट’ (एचडीयू) में उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिंह को 11 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनकी हालत स्थिर है।
सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “10 अगस्त को जब हम विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने छात्र नेता देवेंद्र महतो और कई छात्रों को सुरक्षा घेरे में ले लिया। जब हमने पुलिस से अनुरोध किया कि कम से कम महतो को विधानसभा परिसर में जाने दिया जाए, तो उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने हमसे वहीं बैठने को कहा क्योंकि वे बातचीत का इंतजाम कर रहे थे। लेकिन पुलिस रात होने का इंतजार कर रही थी।”
उन्होंने दावा किया, “जैसे ही रात हुई, उन्होंने (पुलिस ने) स्ट्रीट लाइट बंद कर दीं और लगभग सौ पुलिसकर्मी हाथों में लाठियां लेकर दौड़े और महतो तथा उनके आस-पास मौजूद आंदोलनकारी छात्रों की पिटाई करने लगे। स्ट्रेचर पर लेटे महतो पर हमला किया गया और उसी पल मैं दौड़कर उनके पास गया और उन्हें गले लगा लिया। जब मैंने ऐसा किया, तो पुलिस ने मेरे सिर, गर्दन, कंधों, पीठ और कमर पर लाठियां मारीं।”
उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखाई और दावा किया कि मेरी एमआरआई रिपोर्ट में रीढ़ की हड्डी में सात चोटें पाई गई हैं।
सिंह ने कहा, “अगर मेरी जगह छात्र नेता देवेंद्र महतो होते, तो आप स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं।”
उन्होंने बताया कि वह एक वीडियो देखने के बाद रांची आए थे।
वीडियो में एक छात्र ने देशभर के लोगों से झारखंड में जारी आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी।
इस अपील में नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का भी उदाहरण दिया गया था।
झारखंड में आंदोलनकारी छात्र और अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं समेत कई मुद्दे उठा रहे हैं।
सिंह ने कहा, “मैं यहां इसलिए आया क्योंकि यह प्रदर्शन पूरी तरह झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी व्यक्ति, पार्टी, सरकार या किसी खास नेता के खिलाफ अपशब्दों वाले नारे नहीं लगा रहे हैं। वे सिर्फ शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं।”
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश
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