मानसा: मानसा जिला सिविल अस्पताल में बिस्तर पर लेटे कुलविंदर सिंह पिछले 48 घंटों में हुई घटनाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं. मंगलवार को वह उन लोगों में शामिल थे, जो नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा के साथ उनके रोजाना के एक अभियान में गए थे. इस दौरान वे उन केमिस्ट की दुकानों पर छापेमारी कर रहे थे, जिन पर बिना डॉक्टर की पर्ची के नियमों के तहत आने वाली दवाएं बेचने का आरोप था. पंजाब में नशे की समस्या बढ़ने के पीछे इन दवाओं की भी काफी भूमिका मानी जाती है.
अब हालात बदल चुके हैं. 40 साल से ज्यादा उम्र के झोटा की मौत हो चुकी है, जबकि कुलविंदर, जिन्हें उनके दोस्त सुखी कहकर बुलाते हैं, गोली लगने से घायल होने के बाद ठीक हो रहे हैं. झोटा की टीम के दो अन्य सदस्य भी गोली लगने से घायल हुए थे और उनका इलाज चल रहा है. मंगलवार सुबह स्थानीय केमिस्ट अश्विनी कुमार ने उन पर गोलियां चला दी थीं. अश्विनी कुमार और झोटा के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका था.
सुखी कहते हैं कि बचपन के दोस्त को अपनी आंखों के सामने मरते हुए देखने की याद उन्हें जिंदगी भर सताती रहेगी. उन्हें पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने के लिए झोटा का समर्पण याद आता है.
सुखी ने अस्पताल के बिस्तर से दिप्रिंट को बताया, “झोटा हमेशा कहता था, ‘मैं मरते दम तक नशे के खिलाफ बोलकर मरना.’ दुर्भाग्य से, आखिरकार ऐसा ही हुआ.”
सेना के एक जवान के बेटे झोटा ने जालंधर के खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था. वहां वह क्रिकेट और बॉक्सिंग में एक होनहार खिलाड़ी के रूप में उभरे थे. उनके दोस्तों का कहना है कि नशे के खिलाफ उनकी लड़ाई की जड़ें उनके अपने अनुभव में थीं, क्योंकि वह पहले खुद नशे की लत से जूझ चुके थे.
उनके दोस्त बलजिंदर सिंह ने अस्पताल में दिप्रिंट को बताया, “कॉलेज के दिनों में वह बहुत आक्रामक थे और बॉक्सिंग जैसी चीजों को लेकर काफी जुनूनी थे, जिन्हें वह पसंद करते थे.” उन्होंने आगे बताया कि कॉलेज के दिनों में ही झोटा को नशे की लत लग गई थी.
हालांकि, उनके दोस्तों का कहना है कि झोटा की जिंदगी का यह दौर कुछ साल पहले ही खत्म हो चुका था. उन्होंने नशे की लत पर काबू पा लिया था और अपनी जिंदगी को फिर से सही रास्ते पर ले आए थे.
झोटा की हत्या के बाद उनके दोस्तों, परिवार और समर्थकों में गुस्सा है. बुधवार को उनके समर्थकों ने कुमार की दुकान में तोड़फोड़ की और उसमें आग लगा दी. झोटा के पिता और सेना के पूर्व जवान भीम सिंह ने राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव से इस्तीफा देने की मांग की है. उनका कहना है कि राज्य सरकार नशे की समस्या पर लगाम लगाने में नाकाम रही, जिसकी वजह से उनके बेटे की जान चली गई.

13 अक्टूबर से झोटा के दोस्त और परिवार के लोग मानसा में बरनाला-सिरसा रोड पर धरना दे रहे हैं. वे मान और यादव के इस्तीफे के अलावा झोटा की मौत की CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
राजनीति से मोहभंग
दोस्तों के मुताबिक, 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव तक झोटा अपनी जिंदगी को काफी हद तक संभाल चुके थे. इसके बाद उन्होंने अपने जिले को नशे की समस्या से मुक्त कराने का अभियान शुरू किया.
झोटा के दोस्त जितेंद्र सिंह ने बताया, “इसी सोच के साथ उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के स्थानीय उम्मीदवार विजय सिंगला का समर्थन किया था. वह नशे की समस्या पर लगाम लगाने की बात कर रहे थे.”
AAP ने चुनाव जीत लिया और भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई. हालांकि, जितेंद्र सिंह के मुताबिक, झोटा का जल्द ही पार्टी से मोहभंग हो गया. उन्हें सिंगला और राज्य में AAP के मकसद को लेकर शक होने लगा था.
उन्होंने आगे कहा, “झोटा शिकायत करते थे कि AAP ने नशे के कारोबार पर रोक लगाने के जो वादे किए थे, उन पर काम नहीं हो रहा है. इसी वजह से वह पार्टी से दूर होने लगे.”
समय के साथ झोटा की नजदीकियां वारिस पंजाब दे (WPD) संगठन से बढ़ने लगीं. इस संगठन की स्थापना खडूर साहिब से सांसद और सिख अलगाववादी अमृतपाल सिंह ने की थी, जो फिलहाल जेल में बंद हैं.
मानसा अस्पताल में झोटा के दोस्तों के साथ मौजूद WPD की युवा शाखा के सदस्य बलवंत सिंह सिरसा ने बताया कि अमृतपाल के पिता ने हाल ही में झोटा से मुलाकात की थी और कई मुद्दों पर चर्चा की थी. हालांकि, झोटा के दोस्तों का कहना है कि दोनों के बीच नजदीकी और विचारों का मेल सिर्फ नशे के मुद्दे तक सीमित था.
जितेंद्र सिंह ने कहा, “वह कभी राजनीति में शामिल नहीं होना चाहते थे, लेकिन नशे के खिलाफ अभियान में सक्रिय रूप से काम करते थे और खुलकर इसका समर्थन करते थे.”
अब भी सदमे में हैं दोस्त
हो सकता है कि यह बात सुनने में घिसी-पिटी लगे, लेकिन झोटा के दोस्तों को मंगलवार को हुई घटना से लगे गहरे सदमे को बयां करने के लिए कोई दूसरा तरीका नहीं सूझ रहा है. बलजिंदर सिंह और सुखी के लिए मंगलवार की शुरुआत किसी आम दिन की तरह ही हुई थी. पिछले चार से पांच सालों से वे अक्सर मानसा की मेडिकल दुकानों पर झोटा के साथ उनकी छापेमारी में शामिल होते थे.

अपने अभियान के तहत वे उन लोगों को पकड़ते थे, जो डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं का नशे के लिए इस्तेमाल करते थे. इसके बाद वे उनसे पूछताछ करते थे कि उन्हें ये दवाएं कहां से मिलीं.
भारत में डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं की बिक्री ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत सख्त नियमों के दायरे में आती है. वैध पर्ची के बिना ये दवाएं नहीं बेची जा सकतीं. नशे के आदी लोग इन दवाओं का इस्तेमाल नशीले पदार्थों जैसा असर पाने के लिए करते रहे हैं. इनसे नींद या बेहोशी आने से लेकर शरीर में उत्तेजना बढ़ने तक का असर हो सकता है.
झोटा की टीम के एक सदस्य ने कहा, “दवाएं कहां बेची जा रही हैं, इसका पता लगाने का कोई दूसरा तरीका नहीं है. इसके लिए उन लोगों तक पहुंचना पड़ता है, जो इन्हें खरीद रहे हैं.”
बलजिंदर सिंह ने कहा, “हमारी लड़ाई उन गरीब और युवा लोगों के खिलाफ नहीं है, जिन्हें इन खतरनाक चीजों की लत लग गई है. इसके बजाय, हम उन लोगों के खिलाफ लड़ते रहे हैं, जो साफ-सुथरे दवा और केमिस्ट कारोबार की आड़ में यह गंदा धंधा कर रहे हैं.”
जानकारी मिलने के बाद टीम संबंधित दुकान पर जाती थी, केमिस्ट से सवाल करती थी और स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर तथा पुलिस से शिकायत करती थी.
टीम का दावा है कि उसने मानसा में ऐसी 100 से ज्यादा छापेमारी की थीं. झोटा इन सभी अभियानों की लाइव स्ट्रीमिंग अपने फेसबुक पेज पर करते थे. इसी वजह से मंगलवार को हुई वह घटना भी वायरल हो गई, जिसमें झोटा की जान चली गई.
बलजिंदर ने दिप्रिंट को बताया कि मंगलवार सुबह-सुबह वह अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी झोटा का फोन आया. झोटा ने उन्हें मानसा शहर आने के लिए कहा. बलजिंदर के मुताबिक, झोटा को “कुछ नई जानकारी” मिली थी.
सुबह 10 बजे तक झोटा की पांच लोगों की टीम मानसा में एक कार में इकट्ठा हो गई थी.
सुखी ने बताया, “हम कार में इंतजार कर रहे थे. तभी हमने मानसा शहर के बाजार में करीब 50 साल के एक व्यक्ति को डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं के साथ देखा. हमने उससे पूछा कि उसे ये दवाएं कहां से मिलीं. उसने बताया कि उसने ये अश्विनी कुमार की दुकान से खरीदी हैं और वह हमें वहां ले गया.”
सुखी ने आगे बताया कि जब कुमार ने आरोपों को खारिज कर दिया, तो उनके बीच बहस शुरू हो गई. इस पूरी घटना की झोटा के फेसबुक पेज पर लाइव स्ट्रीमिंग हो रही थी.
सुखी ने कहा, “हमने सिर्फ उससे कहा था कि वह अपने CCTV कैमरों की फुटेज दिखा दे, ताकि साबित हो सके कि वह सच बोल रहा है. इसके बाद उसने अपनी पिस्तौल निकाल ली और उन केमिस्टों के एक समूह को बुला लिया, जो इसी तरह डॉक्टर की पर्ची वाली दवाएं अवैध रूप से बेचने के धंधे में शामिल हैं.”
जूतों की माला पहनाई गई
झोटा के नशे के खिलाफ अभियान के बारे में उनके फेसबुक पर नियमित रूप से पोस्ट किए जाने वाले वीडियो से पता चलता है कि वह किस तरह काम करते थे.
पिछले साल अक्टूबर में बनाए गए ऐसे ही एक वीडियो में झोटा मानसा में गांव के खेतों की तरफ जाने वाली सड़क पर हेरोइन का सेवन कर रहे एक युवक से सवाल करते नजर आते हैं. पंजाब में हेरोइन को आम तौर पर चिट्टा कहा जाता है.
जिस दिन उनकी हत्या हुई, उससे एक दिन पहले उन्होंने एक वीडियो अपलोड किया था. इसमें उन्होंने पुलिस की मदद के लिए मानसा में “नशे की खरीद-बिक्री के प्रमुख ठिकानों” की जानकारी दी थी.
हालांकि, पुलिस का कहना है कि जुलाई 2023 में बनाया गया एक वीडियो झोटा की हत्या की मुख्य वजह है.
इस वीडियो में झोटा और उनके समर्थकों ने दावा किया था कि उन्होंने एक ऐसे कथित नशा तस्कर को पकड़ा है, जो युवाओं को नशे के लिए कैप्सूल बेच रहा था. इसके बाद वह व्यक्ति उन्हें मानसा शहर में अश्विनी कुमार की दुकान पर ले गया.
इस पूरी घटना के अंत में झोटा और उनकी टीम ने बाजार में कुमार को जूतों की माला पहना दी थी. इसका वीडियो वायरल हो गया था.
झोटा की हत्या के मामले में कुमार को फिलहाल गिरफ्तार किया जा चुका है. हत्या के बाद पंजाब से फरार होने पर उसे बुधवार को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: भारतीयों से विरोध-प्रदर्शन का अधिकार कैसे छिन गया