लखनऊ: पहले से मौजूद किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने के बजाय अपनी पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने की घोषणा की है. मित्तल ने सोशल मीडिया पर साढ़े आठ मिनट का एक वीडियो संदेश अपलोड कर बताया कि उनकी पार्टी का नाम ‘जन नीति भारत’ होगा और यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरेगी.
मित्तल ने संकेत दिया है कि वह मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. फिलहाल इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का प्रतिनिधित्व है. इस सीट से उनके चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबले में लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ सकती है.
अपने वीडियो संदेश में मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य मकसद लोगों को सीधे फैसले लेने की प्रक्रिया से जोड़ना और यह पक्का करना होगा कि सरकारी नीतियां उनकी असली ज़रूरतों के हिसाब से बनें. पार्टी की सोच के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि नीतियां बनाने में आम नागरिकों को सबसे आगे रखा जाएगा. किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं के हल उनके अनुभवों के आधार पर तैयार किए जाएंगे.
मेरा राजनीतिक सफर का अगला कदम। मेरे साथ जुड़ें 🙏🙏 pic.twitter.com/c9ihA3dxOB
— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) October 15, 2026
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक फैसलों का आधार लोगों की ज़रूरतें होंगी, न कि उनकी जाति, धर्म या पहचान. उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और स्थानीय विकास में लोगों की ज्यादा भागीदारी भी पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल होगी.
मित्तल ने कहा कि सरकारी योजनाओं, बजट और विकास परियोजनाओं की जानकारी सीधे लोगों के मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाएगी. लोग हरे, पीले और लाल रंग की रेटिंग व्यवस्था के जरिए स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों की हालत भी देख सकेंगे. इससे वे सरकारी सेवाओं की निगरानी करने और उन्हें बेहतर बनाने में हिस्सा ले सकेंगे.
जमीनी स्तर पर कैंपेन चलाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी बड़े विज्ञापनों या पैसे के दम पर नहीं, बल्कि घर-घर जाकर लोगों तक पहुंचेगी. उन्होंने लोगों से इस पहल से जुड़ने और इसका संदेश फैलाने की अपील की: ‘राजनीति नहीं, जन नीति.’
वीडियो में मित्तल ने याद किया कि जब उन्होंने पहली बार राजनीति में आने की बात कही थी, तो लोगों की राय जानने के लिए एक फोन नंबर साझा किया था. उन्होंने कहा कि लोगों की ओर से इतने ज्यादा मैसेज आए कि व्हाट्सऐप ने उस नंबर को ब्लॉक कर दिया. उन्हें इतने सारे मैसेज आने की उम्मीद नहीं थी.
उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद का एक दीपक लेकर निकली थी, लेकिन जब आपके मैसेज आने लगे, तो मुझे लगा कि जैसे मैं हाथ में दीपक लेकर सूरज के सामने खड़ी हूं.”
नई पार्टी बनाने के फैसले के बारे में बताते हुए मित्तल ने कहा कि समस्या राजनीतिक पार्टियों की कमी नहीं, बल्कि लोगों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व न होना है. उन्होंने कहा, “राजनीतिक पार्टियों की कोई कमी नहीं है. समस्या यह है कि लोगों की बात नहीं सुनी जा रही है. कुछ लोगों की बात सुनी जाती है, लेकिन सभी की नहीं.”
फ्लो चार्ट
गंगा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नदी की हर बूंद बराबर होती है और सभी बूंदें मिलकर नदी की दिशा तय करने में मदद करती हैं. उन्होंने कहा कि वह ऐसी पार्टी बनाना चाहती हैं, जिसमें हर व्यक्ति की आवाज़ बराबर हो.
मित्तल ने कहा, “राजनीति आप पर राज करती है, लेकिन जन नीति में आप फैसले लेने वाले होंगे.” उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरेगी, ताकि सरकार सिर्फ पांच साल में एक दिन ही नहीं, बल्कि हर कदम पर लोगों की ज़रूरतों के हिसाब से काम करे.
सूत्रों ने बताया कि मित्तल शुरुआत में मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया में अपनी नई पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान देंगी. वह पहले इन जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर काम कर चुकी हैं. उनकी योजना धीरे-धीरे पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी की मौजूदगी बढ़ाने की है.
हाल ही में केंद्रीय मंत्री और मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने मित्तल का नाम लिए बिना उन पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा था. उन्होंने कहा था, “पहले भी कई अधिकारियों ने अपनी राजनीतिक पार्टियां बनाई हैं. मिर्जापुर की जनता उन्हें खुद जवाब देगी.”
2013 बैच की IAS अधिकारी मित्तल ने करीब 13 साल तक सरकारी सेवा में रहने के बाद 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने का ऐलान किया था. उस समय उन्होंने अपने फैसले के पीछे निजी और पारिवारिक कारण बताए थे. उनका इस्तीफा 15 सितंबर से लागू हुआ.
मित्तल ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), बेंगलुरु से पढ़ाई की है. सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने विदेश में भी काम किया था. उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अन्य जिम्मेदारियों के साथ संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया के जिलाधिकारी के तौर पर काम किया.
मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में पाइप से पानी पहुंचाने की पहल के बाद मित्तल चर्चा में आई थीं. बाद में उनका वहां से तबादला कर दिया गया. उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि उस समय “तनाव बढ़ गया था.” उनका दावा था कि परियोजना के लिए आयोजित पूजा समारोह में स्थानीय सांसद अनुप्रिया पटेल को नहीं बुलाया गया था. यह भी तबादले की एक संभावित वजह हो सकती है.
मिर्जापुर के लोगों ने मित्तल को भावुक विदाई दी थी. इस दौरान लोगों ने उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं. विदाई के समय मित्तल भी भावुक हो गई थीं. उनका यह पल एक वीडियो में दिखाई दिया था, जो वायरल हो गया था.
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