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Sunday, 16 August, 2026
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IPS ने बरसाए पत्थर, पुलिस ने तानी AK-47: हरियाणा के नए जिले हांसी ने पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया

झड़प के वीडियो में एक SP प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकते और एक पुलिसकर्मी भीड़ पर निशाना साधने के लिए अपने साथी की AK-47 लेते हुए दिख रहा है; किसानों की एक समिति ने DGP को पत्र लिखकर उन्हें सस्पेंड करने की मांग की है.

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गुरुग्राम: शनिवार को हांसी ने हरियाणा के एक पूर्ण जिले के रूप में अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया, और यह उस तरह नहीं हुआ जैसा नए जिला प्रशासन ने चाहा होगा.

हांसी को हिसार से अलग करके बनाया गया था. सैनी ने 16 दिसंबर, 2025 को हांसी को हरियाणा का 23वां जिला घोषित किया था और एक हफ्ते बाद इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी की गई थी.

शनिवार को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में तिरंगा फहराया जाना जिला प्रशासन का पहला बड़ा काम होना था. लेकिन इसके बजाय, यह हिसार के डेयरी मालिक जीवन कुंडू की हत्या के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे स्थानीय किसानों के आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुआ. जीवन कुंडू की 4 अगस्त को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.

जैसे ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्थानीय सरकारी कॉलेज में तिरंगा फहराने पहुंचे, ऐसे वीडियो फैलने लगे जिनमें पुलिसकर्मी उसी भीड़ पर कार्रवाई करते दिखे, जिसे उन्हें नियंत्रित करना था. इनमें से एक ड्यूटी पर तैनात IPS अधिकारी कैमरे में पत्थर उठाकर प्रदर्शनकारियों पर वापस फेंकता दिखा, जबकि एक दूसरे वीडियो में एक इंस्पेक्टर अपने साथी की AK-47 पकड़कर उसे सिसई पुल पर जमा लोगों की तरफ घुमाता दिखा.

पत्थर फेंकते दिखे अधिकारी की पहचान विनोद कुमार के रूप में हुई है. वह 2015 बैच के IPS अधिकारी और हांसी के पुलिस अधीक्षक हैं. उन्हें 15 अगस्त की परेड में मुख्यमंत्री के साथ रहना था. वीडियो में वह अभी भी वर्दी में दिख रहे हैं. उनकी छाती पर औपचारिक सैम ब्राउन बेल्ट है. वह नीचे झुककर पत्थर उठाते और भीड़ की तरफ फेंकते दिखाई दे रहे हैं.

एक अलग वीडियो में कप्तान सिंह, जो हांसी के क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी CIA पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर हैं, सादे कपड़ों में एक दूसरे पुलिसकर्मी से AK-47 छीनने की कोशिश करते दिख रहे हैं. वह पुलिसकर्मी भी वर्दी में नहीं था. इसके बाद कप्तान सिंह बंदूक की नली प्रदर्शनकारियों की तरफ घुमाते दिखाई देते हैं.

शनिवार की झड़प में SP विनोद कुमार और एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस भी पत्थर लगने से घायल हुए. कई प्रदर्शनकारी भी पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हुए, जबकि सैनी ने भारी सुरक्षा के बीच सरकारी कॉलेज में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम जारी रखा.

कुमार ने दिप्रिंट के फोन कॉल का जवाब नहीं दिया. इसके बजाय उनके PRO संदीप शर्मा ने शनिवार की झड़प के बाद हांसी में SP की प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक वीडियो साझा किया.

इसमें कुमार ने पत्थर फेंकने का बचाव किया. उन्होंने कहा, “हां. झगड़े में तो, जब इतनी भीड़ थी. वो लोग पत्थर मार रहे थे तो उन्हें तितर-बितर करने के लिए ऐसा करना पड़ता है.”

AK-47 वाली घटना पर कुमार ने कहा कि यह सही है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मी, जिनमें उनका अपना गनमैन भी शामिल था, राइफलें लेकर चल रहे थे. लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी ने भी भीड़ पर गोली नहीं चलाई और न ही कोई हथियार भीड़ की तरफ ताना था.

कुमार के अपने बयान ने हांसी के प्रदर्शनकारियों को एक मज़ाकिया नारा दे दिया है. किसान अनूप सिंह चेनोट ने विनोद कुमार का वर्दी में, पत्थर फेंकते हुए AI से बनाया गया एक पोस्टर जारी किया है. उस पर मज़ाक में पुलिस हेल्पलाइन लिखी है: “भीड़ को तितर-बितर करने के लिए संपर्क करें—जिला हांसी पुलिस.” नीचे एक लाइन में लिखा है कि पुलिस अधीक्षक खुद पत्थर फेंकने में माहिर हैं.

जीवन हत्याकांड न्याय संघर्ष समिति, जो कुंडू की हत्या को लेकर चल रहे प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही है, ने अब पंचकूला में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है. इसमें कप्तान सिंह और विनोद कुमार के नाम दिए गए हैं और उन पर दूसरे पुलिसकर्मियों तथा सादे कपड़ों में मौजूद लोगों के साथ मिलकर सिसई पुल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकने, लाठीचार्ज करने और महिला तथा बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया गया है. समिति ने इन अधिकारियों को निलंबित करने, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. शिकायत की प्रतियां राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोगों को भी भेजी गई हैं.

इस बीच, हांसी पुलिस ने पिछले 24 घंटों में अशांति को लेकर दो FIR दर्ज की हैं.

एक FIR सिटी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है. इसमें सुरेश कोठ, अनिल बालकिया, रोशन लाल पाबड़ा, नरेंद्र कुंडू, रामफल प्रधान, अमरजीत कुंडू, रवि, अजित पूनिया, महेंद्र सिहाग, रामकेश, वारिस सिंधु, रोहताश, दयानंद उर्फ दाना और शमशेर समेत अन्य लोगों के नाम हैं. इसमें भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं को लगाया गया है जो हत्या की कोशिश और दंगा भड़काने से जुड़ी हैं. इसके साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान से रोकने वाला कानून, 1971 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से रोकने वाला कानून, 1984 भी लगाया गया है.

दूसरी FIR बरवाला पुलिस स्टेशन में उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है जिन्होंने बड़ोपट्टी टोल पर हिसार-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग को रोक दिया था. इससे पहले शनिवार की झड़प के बाद भी एक FIR दर्ज की गई थी, जिसमें 150-200 प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया था. इनमें 14 नामित किसान नेता और पूर्व सरपंच भी शामिल थे. उन पर हत्या की कोशिश और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने समेत कई आरोप लगाए गए थे.

यह पूरा तनाव जीवन कुंडू की हत्या से शुरू हुआ था. प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण अभी तक उनके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है. प्रदर्शनकारी मुख्य आरोपी रमेश शर्मा की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं. रमेश शर्मा अभी भी फरार है, जबकि उस पर 50,000 रुपये का इनाम और लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है.

इस मामले में नौ और लोगों को गिरफ्तार किया गया है. एक दिन पहले किसानों और खाप प्रतिनिधियों ने इलाके में सात टोल प्लाजा को रोज़ाना तीन घंटे के लिए बंद कर दिया था. वे इस मामले में हो रही देरी से नाराज़ थे.

हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी X पर इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सैनी सरकार से पूछा कि क्या न्याय मांगना अब अपराध बन गया है. उन्होंने BJP पर उन लोगों को परेशान करने का आरोप लगाया जो सिर्फ जवाबदेही की मांग कर रहे थे, जबकि सरकार उस चीज़ को ठीक करने के बजाय ऐसा कर रही है जिसे उन्होंने हरियाणा की पूरी तरह बिगड़ी हुई कानून-व्यवस्था बताया.

जीवन कुंडू मामले में सैनी तक अपनी मांगें पहुंचाने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, पत्थरबाजी और AK-47 को उनकी तरफ तानने या चलाने की कोशिश की खबरों और उनके खिलाफ FIR दर्ज होने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि अगर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खुद पत्थर फेंकने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह और भी शर्मनाक होगा.

उन्होंने उच्च स्तर की निष्पक्ष जांच, मुख्य आरोपी के खिलाफ जल्द कानूनी कार्रवाई और कुंडू के परिवार के लिए न्याय तथा पर्याप्त मुआवजे की मांग की.

सिरसा की सांसद और AICC महासचिव कुमारी शैलजा ने SP द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकने के आरोपों को गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आने और किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ गलत न होने के लिए स्वतंत्र और उच्च स्तर की जांच की जरूरत है. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हत्या की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए. शैलजा ने घायलों से मुलाकात की और हिरासत में लिए गए किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा करने के साथ-साथ उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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