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Saturday, 8 August, 2026
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पाकिस्तानी हैंडलर के हनी-ट्रैप में फंसा IAF विंग कमांडर, 4 महीने की जांच के बाद गिरफ्तारी

विंग कमांडर को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था और उस पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जब एक पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय फोन नंबर की निगरानी शुरू की, तो जांचकर्ताओं को पता चला कि उस नंबर पर भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के एक विंग कमांडर के भारतीय नंबर से नियमित रूप से बातचीत होती थी.

मामले की जानकारी रखने वाले दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम जनवरी से इस अंतरराष्ट्रीय नंबर को ट्रैक कर रहे थे. उस समय हमें जानकारी मिली थी कि इस नंबर और एक भारतीय नंबर के बीच नियमित बातचीत हो रही है.”

लगातार निगरानी के दौरान पुलिस को अंतरराष्ट्रीय नंबर और आईएएफ के विंग कमांडर के बीच “निजी और अंतरंग बातचीत” के बारे में पता चला.

अधिकारी ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय नंबर और अधिकारी के बीच काफी बातचीत हुई थी, जिसमें वे निजी और अंतरंग जानकारी साझा कर रहे थे. एक समय के बाद महिला बनकर बात कर रहे अंतरराष्ट्रीय नंबर ने उसे ‘ब्लैकमेल’ करना शुरू कर दिया.”

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आईएएफ विंग कमांडर को वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्ड किया गया था, जिसका बाद में उसे ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल किया गया.

जांच के मुताबिक, विंग कमांडर को अपने बेस कैंप की तस्वीरें, चल रहे शोध से जुड़े गोपनीय दस्तावेज और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया गया.

अधिकारी ने कहा, “इसके बाद अधिकारी से अपने एक वरिष्ठ सहयोगी के फोन में एक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए कहा गया. यह डेटा चुराने वाला सॉफ्टवेयर था, जिसका मकसद डिवाइस पर नियंत्रण हासिल करना था.”

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, यह सॉफ्टवेयर एक स्पाइवेयर था, जिसमें रिमोट एक्सेस मैलवेयर था. इसे डेटा चुराने, लोकेशन ट्रैक करने और टेक्स्ट मैसेज व कॉल के जरिए फोन पर होने वाली बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए बनाया गया था.

दिल्ली पुलिस ने भारतीय वायुसेना को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद आईएएफ ने विंग कमांडर की गतिविधियों पर निगरानी शुरू कर दी.

पुलिस अधिकारी ने कहा, “इसके बाद विंग कमांडर को 30 मई को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने गिरफ्तार किया और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दिया.”

उस पर राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी और दस्तावेज साझा करने के लिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियमके तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके तहत 14 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.

अधिकारी ने कहा, “यह अंतरराष्ट्रीय नंबर एक पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़ा था, जिसने आईएएफ विंग कमांडर को हनी-ट्रैप किया था. शुरुआती जांच में पता चला था कि अधिकारी निजी संकट से गुजर रहा था, जिसकी वजह से वह इस जाल के प्रति कमजोर हो गया था.”

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने बताया कि विंग कमांडर, जो फील्ड यूनिट में से एक में तैनात था, पिछले कई महीनों से एयर इंटेलिजेंस यूनिट की निगरानी में था.

आईएएफ के एक प्रवक्ता ने कहा, “वह सक्रिय निगरानी में था और उसे उपयुक्त कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सौंप दिया गया था.”

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच के बाद 30 जुलाई को सक्षम अदालत के सामने चार्जशीट दाखिल कर दी गई है और मामला विचाराधीन है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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