गुरुग्राम: अंकित बैयनपुरिया कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े होकर देशभर में दिखाए गए स्वच्छता अभियान में झाड़ू लगा चुके हैं, लेकिन इस हफ्ते उन्होंने रूस के एक ट्रेनिंग कैंप से फोन उठाया और सरकार से कहा कि उसने एक बड़ी गलती की है.
सोनीपत के रहने वाले फिटनेस इन्फ्लुएंसर अंकित बैयनपुरिया के इंस्टाग्राम पर 79 लाख (7.9 मिलियन) फॉलोअर्स हैं. अक्टूबर 2023 में उन्हें तब देशभर में पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें स्वच्छ भारत अभियान में अपना साथी चुना. गांधी जयंती से एक दिन पहले दोनों का साथ में झाड़ू लगाते और कूड़ा उठाते हुए वीडियो बनाया गया था. उस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी उनसे कहते हैं, “अंकित, मैं आज तुमसे कुछ सीखूंगा.” यह वीडियो आज भी प्रधानमंत्री के यूट्यूब चैनल और एक्स हैंडल पर मौजूद है.
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अंकित से उनके 75 दिन के फिटनेस चैलेंज के बारे में पूछते हैं और आखिर में कहते हैं, “चलिए अंकित, बहुत बढ़िया काम कर रहे हो.”
यही वजह है कि उनका नया वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है.
रूस से, जहां वह अपनी आने वाली फाइट की तैयारी कर रहे हैं, बैयनपुरिया ने कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई गलत थी. उन्होंने यह भी साफ कहा कि प्रधानमंत्री के करीब होने का कोई खास मतलब नहीं है.
उन्होंने कहा, “मैं पीएम का कोई स्पेशल नहीं, मैं भी थारे जैसा हूं.”
Kisi bhi desh ki sabse badi taqat uske students hote hain.
Unki awaaz ko suna jaana chahiye, kyunki wahi kal ka Bharat banayenge.I Stand With Students. 🤝🇮🇳
Hum Kisi Dharmik Propaganda ke sath nhi hai. Kl Jantar Mantar par छात्रों ke sath jo hua wo bhot Glt hai. Desh Democracy… pic.twitter.com/uR653Ch3jF
— Ankit Baiyanpuria (@baiyanpuria) July 21, 2026
उन्होंने बताया कि बहुत से लोगों ने उन्हें संदेश भेजकर कहा कि वह अपनी पहचान का इस्तेमाल करके सरकार से इस मामले में बात करें, लेकिन अगर उनकी बात की कोई अहमियत होती, तो जिस दिन छात्रों ने पहली बार अपनी आवाज़ उठाई थी, उसी दिन यह मामला सुलझ गया होता. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों के लिए उनका समर्थन नया नहीं है.
बैयनपुरिया अकेले नहीं थे. हरियाणवी गायक मुकेश जाजी ने भी प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए एक वीडियो जारी किया. उन्होंने कहा कि अब चुप रहने का समय नहीं है—न सरकार के लिए और न ही उनके लिए, चाहे इसकी कीमत उन्हें अपने गानों या लिखने से ही क्यों न चुकानी पड़े.
उन्होंने किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के आंदोलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब एक के बाद एक ऐसे आंदोलन हो रहे हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि लोग अभी एक सदमे से निकल भी नहीं पाते कि दूसरा सामने आ जाता है. किसानों और महिला पहलवानों के साथ हुए व्यवहार के बाद अब बच्चों और महिलाओं पर पुलिस बेरहमी से लाठियां चला रही है.
उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से यह लोकतंत्र नहीं, शोकतंत्र है.” उन्होंने दूसरे कलाकारों से भी अपील की कि या तो जंतर-मंतर पहुंचें या फिर छात्रों के समर्थन में पोस्ट करें.
गायक हैरी लाठेर ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और सरकार से टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत करने की अपील की.
कुरुक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल से जब लाठीचार्ज पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा दुखद है. उन्होंने कहा कि पुलिस को उन प्रदर्शनकारियों के साथ संयम बरतना चाहिए, जिन्हें उन्होंने “हमारे बच्चे” बताया. साथ ही उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने वाले “शरारती तत्वों” की भी निंदा की.
हालांकि, सभी लोगों की राय प्रदर्शनकारियों जैसी नहीं थी. अभिनेता ठाकुर काशिश पुंडीर ने कहा कि शिक्षा मंत्री को हटाने से कोई समस्या हल नहीं होगी. उनके मुताबिक, अगर पेपर लीक में भ्रष्टाचार हुआ है तो उसके लिए प्रश्नपत्र छापने वाली टीम जिम्मेदार है, शिक्षा मंत्री नहीं. उन्होंने कहा कि सिर्फ मंत्री बदलने से कुछ नहीं होगा, जब तक पूरे सिस्टम में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ पहले से कार्रवाई की जा रही है.
यह कोई अकेली घटना नहीं है. दिप्रिंट ने बुधवार को बताया था कि जब सोनम वांगचुक का अनशन जारी था और दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के मुताबिक बेरहमी से लाठीचार्ज किया, तब हरियाणा के कई बड़े गायक और रैपर खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आए.
रैपर धांधा न्योलीवाला ने छात्रों के समर्थन में अपने शो टाल दिए. वहीं गायक देव कुमार देवा, अंकित बालियान और फिटनेस आइकन संदीप आर्य ने सीधे प्रधानमंत्री से अपील की. हरियाणा के सबसे लोकप्रिय गायकों में शामिल गुलजार छानिवाला इससे पहले ही जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात कर चुके थे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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