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Thursday, 23 July, 2026
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बेंगलुरु में हर 30 हज़ार लोगों पर सिर्फ एक पब्लिक टॉयलेट: सेनिटेशन ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा

B.PAC की 142 पब्लिक टॉयलेट्स की जांच में पता चला कि 26% बंद पड़े हैं, 94% दिव्यांगों के लिए इस्तेमाल लायक नहीं हैं और काम कर रहे टॉयलेट्स में से सिर्फ 40% में ही पानी की सुविधा है.

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बेंगलुरु: भारत की आईटी कैपिटल बेंगलुरु में 1,000 से भी कम पब्लिक टॉयलेट्स हैं. यानी करीब हर 30,000 लोगों पर सिर्फ एक पब्लिक टॉयलेट है. यह जानकारी बेंगलुरु पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (B.PAC) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में सामने आई है.

‘बेंगलुरु पब्लिक टॉयलेट ऑडिट रिपोर्ट 2026’ में शहर के पब्लिक टॉयलेट्स में व्यवस्था की बड़ी कमियां सामने आई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, “बेंगलुरु की आबादी 1.4 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और यह एक ग्लोबल हब बन चुका है, लेकिन पब्लिक टॉयलेट्स की व्यवस्था उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी.”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “पूरे शहर में सिर्फ 800 से 900 पब्लिक टॉयलेट्स हैं (जिनमें से 479 आधिकारिक तौर पर GBA की सूची में हैं). यानी बेंगलुरु में हर 25,000 से 30,000 लोगों पर सिर्फ एक पब्लिक टॉयलेट है, जो शहर की ज़रूरतों के मुकाबले बहुत कम है.”

B.PAC एक गैर-राजनीतिक नागरिक संगठन है, जो सरकार के साथ मिलकर शहर की सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम करता है.

बायोकॉन की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ B.PAC की अध्यक्ष हैं. इसके नेताओं में आरिन कैपिटल के चेयरपर्सन टी. वी. मोहनदास पाई और पूर्व आईएएस अधिकारी के. जयराज भी शामिल हैं.

बेंगलुरु में अक्सर लोग खुले में पेशाब करते हुए दिखाई देते हैं. इसकी बड़ी वजह पब्लिक टॉयलेट्स की कमी और जो टॉयलेट्स हैं, उनकी खराब हालत है. ऑडिट के दौरान 142 पब्लिक टॉयलेट्स की कई मानकों पर जांच की गई.

जांच में पता चला कि इनमें से 26 प्रतिशत पूरी तरह बंद पड़े थे, 58 प्रतिशत में हमेशा बदबू रहती थी और 94 प्रतिशत दिव्यांग लोगों के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त नहीं थे.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जो पब्लिक टॉयलेट्स चल रहे थे, उनमें से सिर्फ करीब 40 प्रतिशत में ही पानी उपलब्ध था. किसी भी पब्लिक टॉयलेट में साबुन, साबुन रखने का डिस्पेंसर या डस्टबिन नहीं था. वहीं, सिर्फ 15 प्रतिशत देखभाल करने वाले कर्मचारी महिलाएं थीं.

रिपोर्ट में कहा गया है, “बेंगलुरु की समस्या अब सिर्फ नए पब्लिक टॉयलेट्स बनाने की नहीं है, बल्कि जो पहले से हैं, उन्हें चालू, सुरक्षित, सभी के लिए सुविधाजनक और अच्छी तरह रखरखाव वाला बनाना भी ज़रूरी है.”

संगठन ने बेंगलुरु की पब्लिक टॉयलेट्स व्यवस्था सुधारने के लिए “तुरंत और बड़े स्तर पर सुधार” करने की सिफारिश की है. इसके तहत 30 दिन का विशेष अभियान चलाकर सभी बंद पड़े टॉयलेट्स को ठीक करने और नगर निकाय के तहत पब्लिक टॉयलेट्स के प्रबंधन के लिए एक अलग सेल बनाने का सुझाव दिया गया है.

B.PAC के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर राघवेंद्र एच.एस. ने कहा कि GBA को 1,000 से ज्यादा नए, आधुनिक, उपयोग में आसान, सभी के लिए सुविधाजनक और अच्छी तरह रखरखाव वाले सार्वजनिक शौचालय बनाने होंगे.

B.PAC की CEO रेवती अशोक ने बयान में कहा, “पब्लिक टॉयलेट्स कोई विलासिता नहीं हैं. ये ऐसी बुनियादी नागरिक सुविधा हैं जो लोगों की सेहत की रक्षा करती हैं, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, लोगों के सम्मान को बनाए रखती हैं और शहर में जीवन की गुणवत्ता तय करती हैं. अगर बेंगलुरु सच में एक वैश्विक शहर बनना चाहता है, तो वह इन बुनियादी सुविधाओं को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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