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Wednesday, 12 August, 2026
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हरियाणा की खाप चाहती है लड़कियां फोन से दूर रहें, दोपहिया न चलाएं: Gen Z ने दिया Instagram पर जवाब

एक खाप सदस्य की इस टिप्पणी पर कि बेटियां बाइक पर कैसे बैठती हैं और फ़ोन का इस्तेमाल कैसे करती हैं, हरियाणा के युवाओं ने इंस्टाग्राम पर विरोध जताया है. यह पीढ़ी के बीच बढ़ती खाई का ताज़ा संकेत है.

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गुरुग्राम: जींद में पंचायत की एक बैठक में खाप के एक सदस्य ने खड़े होकर वह बात कह दी, जो हरियाणा के कई रूढ़िवादी बुजुर्ग शायद सोचते हैं, लेकिन बहुत कम लोग खुलकर कहते हैं.

उन्होंने कहा कि बेटियों को अपने पिता के पीछे मोटरसाइकिल पर बेटों की तरह दोनों तरफ पैर रखकर नहीं बैठना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई लड़की अपना फोन नीचे नहीं रखती है, तो उससे फोन लेकर तोड़ देना चाहिए.

दो हफ्ते बाद पंचायत की इस बैठक की क्लिप ने शायद ग्रामीण हरियाणा के पुराने सोच वाले बुजुर्गों और इंस्टाग्राम चलाने वाली Gen Z के बीच का अंतर उतना दिखा दिया है, जितना पिछले कई सालों में खापों के खिलाफ किसी अदालत के आदेश या कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ किसी सरकारी अभियान ने नहीं दिखाया.

जिस पंचायत के बाद यह सब शुरू हुआ

नौगामा खाप की बैठक 1 अगस्त को रामराय गांव में हुई. इसमें एक ही गांव में होने वाली प्रेम शादियों पर रोक लगा दी गई और कहा गया कि जो जोड़े इस रोक को नहीं मानेंगे, उन्हें खाप के अधिकार वाले 21 गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.

यह सब नहीं था. पंचायत ने यह भी कहा कि ड्रग्स के इस्तेमाल की जानकारी देने वाले को 5,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा और शादियों में जिसे उन्होंने “अश्लील” गाने कहा, उन्हें बजाने पर जुर्माना लगाया जाएगा.

नियमों को लागू करने के लिए 21 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई. इसमें 21 गांवों में से हर गांव का एक सदस्य होगा. हर गांव की अपनी कमेटी भी होगी, जिसके पास स्थानीय स्तर पर लोगों पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा.

लेकिन जींद के एक जाट स्कूल में पढ़ाने वाले खाप सदस्य वीरेंद्र धुल के बेटियों, दोपहिया वाहनों और फोन को लेकर दिए निजी बयानों ने एक सामान्य पंचायत को बड़े विवाद में बदल दिया.

दिप्रिंट से बात करते हुए धुल ने कहा कि वह अपने विचारों पर कायम हैं और पंचायत में अपनी निजी राय रखना उनका अधिकार है.

फोन से बनाया गया जवाब

कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, पर इसके जवाब में वीडियो आने लगे. इनमें से कुछ वीडियो को लाखों व्यूज मिले हैं. इनमें से लगभग सभी वीडियो युवा हरियाणवियों ने बनाए थे, जो सीधे पुरानी पीढ़ी से बात कर रहे थे. उन्होंने वह सम्मान नहीं दिखाया जो आमतौर पर ऐसी पंचायतों को दिया जाता रहा है.

जंतर-मंतर पर NEET के विरोध के दौरान युवाओं को नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए देखने के बाद हरियाणा की Gen Z ने इंस्टाग्राम पर खापों के खिलाफ पोस्ट की बाढ़ ला दी है. इन पोस्ट में खापों के प्रति गुस्सा जताया गया और उन्हें आज हरियाणवी समाज की स्थिति, महिलाओं की स्थिति और असंतुलित लिंग अनुपात के लिए जिम्मेदार ठहराया गया.

#khap सर्च करने पर सिर्फ इंस्टाग्राम पर 30,000 से ज्यादा वीडियो दिखते हैं. इनमें #khap के 19,600 और #khapp के 11,100 वीडियो हैं.

इन्फ्लुएंसर पारस यादव ने सवाल किया कि खापें जन्म से पहले मारी जाने वाली बेटियों, दहेज के लिए होने वाली मौतों या यौन हिंसा के बारे में कम क्यों बोलती हैं, लेकिन प्रेम विवाह रोकने के लिए तुरंत आगे क्यों आ जाती हैं.

यादव ने इंस्टाग्राम पोस्ट में गुस्से में खाप नेताओं से कहा, “कोई उनसे पूछे: आप प्रेम विवाह की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या आपके समाज में सच में शादियां हो रही हैं? आपने मां के गर्भ में बेटियों को मार दिया और अपने बेटों की शादी के लिए दूसरे राज्यों से महिलाओं को लाते रहे. आपके राज्य का लिंग अनुपात सबसे नीचे है.”

2011 की जनगणना में हरियाणा में कुल लिंग अनुपात 1,000 लड़कों पर 879 लड़कियां और 0 से 6 साल की उम्र में बाल लिंग अनुपात 1,000 लड़कों पर 834 लड़कियां था. इसके साथ हरियाणा देश में सबसे नीचे था.

यह राज्य दूर-दराज के राज्यों जैसे असम, बिहार और झारखंड से पैसे देकर लाई गईं मोलकी बहुओं या दुल्हनों के लिए बदनाम है.

यादव ने पूछा कि जब महिलाओं की जिंदगी को लेकर फैसले लिए जाते हैं, तब इन खापों में कितनी महिलाएं बैठती हैं. उन्होंने महिलाओं के जीवन और निजी स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की ओर भी इशारा किया. उनके वीडियो को 68,000 से ज्यादा व्यूज और 4,100 से ज्यादा कमेंट मिल चुके हैं.

कंटेंट क्रिएटर गीता धांडा ने सीधे अपने फॉलोअर्स से इस फरमान को लेकर सवाल किया. उन्होंने पूछा कि अब लड़कियों के फोन भी छीन लिए जाएंगे क्या, जबकि आजकल पढ़ाई का काफी काम फोन पर होता है. उनकी पोस्ट पर 600 से ज्यादा कमेंट आए, जिनमें ज्यादातर लोगों ने समर्थन किया.

एक अन्य इन्फ्लुएंसर अंजलि ने कहा कि ऐसी मांगें हरियाणा को उस जगह में बदलने की कोशिश हैं, जिसे उन्होंने मिनी-अफगानिस्तान कहा. उन्होंने यह भी कहा कि उनके अपने माता-पिता भी हरियाणा से हैं, लेकिन उनकी ऐसी कोई सोच नहीं है.

रैपर राहुल फाजिलपुरिया, जो बॉलीवुड फिल्म कपूर एंड संस के लिए बादशाह के साथ लड़की ब्यूटीफुल कर गई चुल्ल गाने में अपनी आवाज देने के लिए जाने जाते हैं, ने एक वीडियो पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि वह इस सोच को समझ नहीं पा रहे हैं, जिसमें बेटियों के अपने पिता के पीछे स्कूटर या मोटरसाइकिल पर दोनों तरफ पैर रखकर बैठने पर आपत्ति है या उनके फोन पर रोक लगाई जाती है. उन्होंने सवाल किया कि इससे पता चलता है कि वे पिता और बेटी के रिश्ते को किस नज़र से देखते हैं.

उनका सवाल था कि यह निगरानी सिर्फ लड़कियों पर ही क्यों होती है, लड़कों पर क्यों नहीं.

उन्होंने कहा कि यह असल में फोन को लेकर नहीं था, बल्कि भेदभाव को लेकर था. उन्होंने कहा कि पहले लड़कियों को गर्भ में मार दिया गया और अब वही ताकतें उन्हें जिंदा रहते हुए खत्म करने की कोशिश कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि लड़कियों के साथ खड़े होने के बजाय समाज लगातार उन्हें पीछे खींचने की कोशिश करता रहता है. उन्होंने कहा कि खाप इसके बजाय हरियाणा के गांवों में लड़कियों के लिए आत्मरक्षा की ट्रेनिंग शुरू करने, महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कानून बनाने या उन्हें बेहतर शिक्षा देने का फैसला कर सकती थीं.

उन्होंने अंत में बताया कि हरियाणा की लड़कियां हर क्षेत्र में कितनी आगे बढ़ चुकी हैं. उन्होंने कहा कि समाज की ओर से लगाई गई हर पाबंदी के बावजूद उन्होंने ये उपलब्धियां हासिल की हैं.

कई अन्य इंटरनेट यूजर्स ने भी खाप नेताओं से पूछा कि जब हरियाणा की कोई लड़की अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में मेडल जीतती है, तो वे हर बार उस पर गर्व क्यों करते हैं, जबकि अब वे लड़कियों से उनकी बुनियादी आजादी छीनने के लिए इतने बेचैन हैं.

सिडनी में रहने वाले क्रिएटर ओमप्रकाश हरियाणा ने पूछा कि महिलाओं को फिर से एक शांत और पुराने तरीके की भूमिका में धकेलने से अर्थव्यवस्था को वास्तव में क्या फायदा होगा. उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया की वर्कफोर्स का जिक्र किया.

कंटेंट क्रिएटर वर्षा चौधरी ने तंज करने का रास्ता चुना.

गमछे को पगड़ी की तरह बांधकर और “I Don’t Care” लिखा हुआ काला चश्मा पहनकर बनाए गए वीडियो में वह मजाकिया सम्मान के साथ “राम राम, ताऊ” कहकर शुरुआत करती हैं और बुजुर्गों को धन्यवाद देती हैं कि उन्होंने आखिरकार इस उम्र में लड़कियों के बारे में सोचा.

वह वीडियो के अंत में कहती हैं, “हमें कभी पता ही नहीं चला कि फोन और बाइक पर दोनों तरफ पैर रखकर बैठना हमें बिगाड़ रहा था. काश किसी ने हमें पहले बता दिया होता, तो हम बर्बादी और रेप से बच जाते. हमें बचाने के लिए धन्यवाद, ताऊ.”

@iamkrishan7 नाम से पोस्ट करने वाले एक यूजर ने इससे कहीं ज्यादा सख्त बात कही. उन्होंने कहा कि ऐसे फरमान जारी करने वाला कोई भी पुरुष, उनके शब्दों में, कमजोर और असुरक्षित है. उन्होंने कहा कि जब किसी पुरुष की बात सुनना बंद हो जाता है, तो वह अक्सर अपनी निराशा महिलाओं पर निकालने लगता है और उन्हें “संस्कारी” और “अच्छे व्यवहार वाली” बनने का उपदेश देता है.

उन्होंने कहा कि हरियाणा की महिलाएं पहले से ही पीछे हैं और ऐसे पुरुष उन्हें और पीछे रखने में एक अजीब तरह की संतुष्टि लेते हैं.

उन्होंने प्रेम विवाह को लेकर खापों के रुख पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यही रिकॉर्ड अब दूसरे राज्यों के परिवारों को अपनी बेटियों की शादी हरियाणवी परिवारों में करने से डराता है.

उन्होंने खाप नेताओं को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “आप कुछ नहीं खोएंगे. आप कुछ और साल अपनी पंचायतें चलाएंगे और फिर चले जाएंगे, लेकिन यह याद रखना, हरियाणा के आधे युवा पुरुष बूढ़े होकर कुंवारे पेंशन लेते नजर आएंगे.”

शितु नाम की एक यूजर ने इस पूरे विवाद के बीच कुछ नरम बात कही. उन्होंने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा यह बात नजर आई कि कितने पुरुष लड़कियों के समर्थन में वीडियो बनाने के लिए आगे आ रहे हैं.

गुस्सा सिर्फ इन वीडियो तक सीमित नहीं था. धुल के वीडियो के नीचे भी कुछ सबसे तीखे कमेंट आए, जहां यूजर्स ने हरियाणा की खाप नेतृत्व व्यवस्था में चल रहे “पुराने सॉफ्टवेयर” का मजाक उड़ाया.

यह कोई अकेली घटना नहीं है

खाप पंचायतों का विवादों में आना कोई नई बात नहीं है.

खाप गांव के बुजुर्गों की अनौपचारिक पंचायतें होती हैं. इनमें आमतौर पर एक ही जाति या गोत्र के लोग होते हैं. ये कई पीढ़ियों से हरियाणा के ग्रामीण इलाकों, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में काम करती आ रही हैं.

ज्यादातर समय तक शादी, जमीन और स्थानीय विवादों को लेकर उनकी बात को बहुत कम चुनौती दी जाती थी.

भारत में खापों को गंभीरता से लेने के लिए मजबूर करने वाला पहला बड़ा मामला कैथल जिले के करौरा गांव के मनोज और बबली का था.

2007 में दोनों ने स्थानीय खाप की इच्छा के खिलाफ शादी कर ली. खाप का कहना था कि दोनों एक ही गोत्र से हैं और इसलिए भाई-बहन जैसे हैं. इसी वजह से उनकी शादी को गलत माना गया.

कुछ दिनों बाद बबली के रिश्तेदारों ने दोनों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी.

2010 में करनाल की एक अदालत ने पांच हत्यारों को मौत की सजा सुनाई और इस फैसले का समर्थन करने वाले खाप नेता को उम्रकैद की सजा दी. यह पहली बार था जब किसी भारतीय अदालत ने ऑनर किलिंग के मामले में मौत की सजा सुनाई थी. यह पहली बार था जब किसी खाप की ओर से ऐसी हत्या का आदेश देने में उसकी भूमिका पर अदालत में मुकदमा चला था.

इसके बाद के वर्षों में खापों की ओर से लगातार ऐसे फरमान आते रहे कि युवाओं और खासकर युवा महिलाओं को कैसे रहना चाहिए. कुछ गांवों में लड़कियों के जींस और मोबाइल फोन पहनने या रखने पर रोक लगाई गई. प्रेम विवाह और अंतरजातीय विवाह के खिलाफ भी बार-बार फरमान जारी किए गए. इनमें एक ही गोत्र में होने वाली शादियों को भी कानून के बावजूद गलत माना गया.

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया. कोर्ट ने कहा कि खाप पंचायतों या किसी भी दूसरे समूह को अपनी पसंद से शादी करने वाले दो बालिग और सहमत लोगों पर सवाल उठाने, उन्हें रोकने या सजा देने का कोई अधिकार नहीं है.

इस इतिहास को देखते हुए, बेटियों और उनके दोपहिया वाहनों और फोन को लेकर धुल की बातें किसी एक घटना की तरह नहीं लगतीं. यह लंबे समय से चले आ रहे ऐसे फरमानों की सूची में एक और मामला है. अब स्मार्टफोन के साथ बड़ी हुई एक पीढ़ी उसी का जवाब तुरंत कैमरे पर दे रही है.

कानून क्या कहता है

सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील सीमा सिंधु ने कहा कि प्रेम विवाह पर रोक लगाने या जोड़ों को गांव में प्रवेश से रोकने वाला खाप का फरमान देश के कानून के खिलाफ है.

उन्होंने कहा कि जहां तक एक ही गोत्र में शादी पर रोक की बात है, हिंदू मैरिज एक्ट खुद रिश्ते की कुछ तय डिग्री के अंदर शादी पर रोक लगाता है.

सिंधु ने कहा कि बालिग लोगों को अपनी पसंद से शादी करने का संवैधानिक अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के शक्ति वाहिनी और शफीन जहां मामलों समेत कई फैसलों में इस बात को माना है. उन्होंने कहा कि परिवार, समुदाय या खाप पंचायत किसी बालिग जोड़े के शादी करने या साथ रहने के फैसले में दखल नहीं दे सकते.

उन्होंने कहा कि ऐसे जोड़े को धमकाना, उसके साथ मारपीट करना या उसे गांव से बाहर जाने के लिए मजबूर करना अपराध है.

एक पीढ़ी का हिसाब

हरियाणा में खाप को लेकर पहले भी कई विवाद हुए हैं. लेकिन इस बार की बात अलग है. इस बार विरोध बहुत तेजी से और बहुत जोर से सामने आया है. और सबसे बड़ी बात यह है कि विरोध करने वाले कौन हैं.

इस बार यह लड़ाई शहरी उदारवादियों, वामपंथी संगठनों या बाहर के लोगों की ओर से नहीं लड़ी जा रही है. यह उन्हीं गांवों और उसी हरियाणवी समाज के युवा लड़के और लड़कियां कर रहे हैं, जिनकी आवाज बनने का दावा खाप करती हैं. वे उन्हीं फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें छोड़ने के लिए उन्हें कहा गया है.

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन्स एसोसिएशन (AIDWA) की उपाध्यक्ष और लंबे समय से खापों की आलोचक रहीं जगमती सांगवान ने दिप्रिंट से कहा कि इस बार युवा पीढ़ी की प्रतिक्रिया एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है. वह खापों के अधिकार से ज्यादा अधिकार जताने को संविधान से बाहर की सोच मानती हैं.

सांगवान ने कहा, “हरियाणा में पितृसत्तात्मक सोच ने हमेशा समाज में महिलाओं को दबाने की कोशिश की है. और यह सोच सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं है.”

उन्होंने कहा, “जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान जिस तरह दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों ने डंडों से युवा महिलाओं के यौन अंगों को निशाना बनाया, उसे देखिए.”

उन्होंने कहा कि वहां इतनी सारी युवा महिलाएं विरोध करने पहुंची थीं और उन पुलिसवालों ने जो किया, उसका मकसद एक संदेश देना था. संदेश यह था कि उनके लिए विरोध प्रदर्शन में शामिल होना सुरक्षित नहीं है और उन्हें इसके बजाय घर पर रहना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हरियाणा की Gen Z खाप नेतृत्व की पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ खड़े होने के लिए तारीफ की हकदार है.

यह अभी साफ नहीं है कि हरियाणा की Gen Z की यह प्रतिक्रिया खाप के अधिकार के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले विद्रोह की शुरुआत है या फिर यह खाप व्यवस्था जितनी ही पुरानी शिकायतों का बस ज्यादा तेज और बड़ा रूप है. लेकिन कई सालों में पहली बार खाप के फरमानों को खुलकर चुनौती दी जा रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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