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Saturday, 4 July, 2026
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बेदखली संबंधी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ जिमखाना क्लब के सदस्यों ने अदालत का रुख किया

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नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने सफदरजंग रोड स्थित क्लब परिसर से बेदखली के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है।

कारण बताओ नोटिस के अमल पर रोक लगाने के अनुरोध संबंधी इन याचिकाओं पर छह जुलाई को न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की पीठ के समक्ष सुनवाई होगी।

विजय खुराना और ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन’ की ये याचिकाएं उनके लंबित मुकदमे का हिस्सा हैं। यह मुकदमा भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के उस आदेश के बाद दायर किया गया था, जिसमें इस क्लब को ‘‘रक्षा अवसंरचना को मजबूत और सुरक्षित बनाने’’ का हवाला देते हुए पांच जून तक उसकी जमीन वापस करने को कहा गया था।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन एलएंडडीओ ने दिल्ली जिमखाना क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि उसके खिलाफ सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए।

संपदा अधिकारी बिपिन कुमार सिंह द्वारा 29 जून को जारी नोटिस में क्लब तथा परिसर पर कब्जा किए हुए सभी संबंधित पक्षों को सात जुलाई तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें उसी दिन दोपहर ढाई बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने को भी कहा गया है।

इससे पहले, केंद्र सरकार ने 26 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि वह पांच जून तक 27.3 एकड़ के उस परिसर का जबरन कब्जा नहीं लेगी, जो ‘‘रक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ और सुरक्षित बनाने’’ के लिए जरूरी है।

जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा रक्षा अवसंरचना और सुरक्षा के नाम पर दिए गए ‘‘अस्पष्ट कारण’’ महज एक ‘‘बहाना’’ हैं।

उन्होंने दावा किया कि यह कदम कानून द्वारा निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय ‘‘जबरन बेदखली कराने का प्रयास’’ है।

याचिका में कहा गया है कि विजय खुराना के इस मुकदमे को क्लब के 500 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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