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Friday, 11 September, 2026
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गुरुग्राम जल जमाव : हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जन सुविधाओं को ‘अपर्याप्त’ बताया

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चंडीगढ़, 11 सितंबर (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने दिल्ली से सटे गुरुग्राम में बार-बार जल-जमाव, यातायात जाम, जरूरी सेवाओं में रुकावट और खराब जल निकासी व्यवस्था जैसी अन्य नागरिक समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि इन समस्याओं के कारण आम जनता और स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी हो रही है।

एचएचआरसी ने अगस्त में विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई की।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन (न्यायिक) और दीप भाटिया की पीठ ने कहा कि खबरों में बताई गई स्थिति कोई अस्थायी समस्या नहीं है, बल्कि यह गुरुग्राम के कई इलाकों में शहरी बाढ़ और अपर्याप्त नागरिक बुनियादी ढांचे की बार-बार होने वाली स्थिति को इंगित करती है।

आयोग ने टिप्पणी की कि 24 अगस्त को गुरुग्राम में काफी बारिश हुई थी और जिला प्रशासन के अनुसार, उस दिन लगभग 75 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।

भारी बारिश के कारण सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफ्को चौक, सोहना रोड, शीतला माता रोड, राष्ट्रीय राजमार्ग-48/दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, पुराने गुरुग्राम और शहर के अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर जलभराव हो गया था।

आयोग ने कहा कि हालात केवल यातायात की परेशानी तक सीमित नहीं थे। उसने टिप्पणी की कि मुख्य सड़कों और चौराहों पर घंटों तक भारी जाम लगा रहा, जिससे यात्रियों को कम दूरी तय करने में भी बहुत ज़्यादा समय लगा।

खबरों के मुताबिक जल जमाव की वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों को गंभीर परेशानी हुई और जलभराव के दौरान, कई स्कूल बसें घंटों तक फंसी रहीं।

पीठ ने प्राकृतिक जल-निकासी के रास्तों में कथित रुकावट, अतिक्रमण या उन पर निर्माण और पारंपरिक जल-धाराओं के गायब होने या उनमें बदलाव से जुड़ी खबरों पर भी संज्ञान लिया।

आयोग ने आठ सितंबर के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि, ‘‘इस चरण में इन आरोपों पर कोई अंतिम राय व्यक्त किए बिना, गुरुग्राम की पूरी प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली का वैज्ञानिक रूप से मानचित्रण करना और उसकी वर्तमान स्थिति, जल-वहन क्षमता तथा रुकावट वाले बिंदुओं का निष्पक्ष रूप से आकलन करना आवश्यक है।’’

एचएचआरसी ने सरकार द्वारा सुझाए गए नए तकनीकी उपायों पर भी गौर किया, जिनमें बारिश का पानी जमीन के अंदर पहुंचाने वाले कुएं, जमीन के नीचे पानी जमा करने वाले टैंक, बारिश से भूमिगत जल पुन:भरण के ढांचे और दूसरे उपाय शामिल हैं।

भाषा धीरज नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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