scorecardresearch
Saturday, 31 October, 2026
होमदेशजीएसएलवी रॉकेट ने ‘एनवीएस 03’ उपग्रह को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित किया

जीएसएलवी रॉकेट ने ‘एनवीएस 03’ उपग्रह को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित किया

Text Size:

(तस्वीरों के साथ)

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 30 अक्टूबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को अपने नौवहन उपग्रह ‘एनवीएस-03’ का सफल प्रक्षेपण किया, जिसमें स्वदेशी और बाहर से खरीदी गई परमाणु घड़ियां लगी हैं। इससे देश की अपनी उपग्रह नौवहन प्रणाली ‘नाविक’ को मजबूती मिलेगी।

‘नाविक’ जीपीएस का भारतीय संस्करण है, जो देश और उसके आसपास 1,500 किलोमीटर के दायरे तक सीमित है।

‘एनवीएस-03’ मिशन की सफलता पर इसरो प्रमुख वी नारायणन ने वैज्ञानिकों, औद्योगिक साझेदारों और शिक्षाविदों को उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा कि ‘जीएसएलवी’ रॉकेट ने उपग्रह को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से कक्षा में स्थापित कर दिया।

इसरो प्रमुख ने कहा कि रॉकेट की सभी प्रणालियों ने पूर्वानुमान और अपेक्षा के अनुरूप काम किया।

उन्होंने कहा कि ‘एनवीएस-03’ उपग्रह मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। लगातार दो जीएसएलवी अभियानों के बीच महज 56 दिनों का अंतराल रहा, जो अब तक का सबसे कम समय है।

नारायणन ने कहा कि ‘एनवीएस-03’ की सफलता के साथ ही ‘नाविक’ उपग्रह समूह में न्यूनतम परिचालन क्षमता के लिए आवश्यक चार उपग्रहों की संख्या फिर से पूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि पहले से ही तीन उपग्रह सफलतापूर्वक काम कर रहे थे। अब ‘एनवीएस-03’ के शामिल होने से स्थिति निर्धारण, नौवहन और समय संबंधी सेवाएं फिर से बहाल हो गई हैं।

इसरो प्रमुख ने कहा कि ‘नाविक’ उपग्रह समूह एक सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति है जो स्थिति निर्धारण, नौवहन और समय संबंधी सेवाओं तक स्वतंत्र पहुंच उपलब्ध कराता है।

पचास मीटर लंबे जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने 24 घंटे की उलटी गिनती पूरी होने के बाद निर्धारित समय के अनुसार रात 11 बजकर 51 मिनट सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से आसमान की ओर उड़ान भरी।

यह 420 टन वजन वाला तीन चरणों का रॉकेट लगभग 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह को भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करने के अभियान पर है।

इसरो के अनुसार, ‘एनवीएस-03’ अगली पीढ़ी की नौवहन उपग्रह प्रणाली का तीसरा उपग्रह है। इसे आईआरएनएसएस श्रृंखला के तहत दी जाने वाली नौवहन सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, “यह उपग्रह आयातित परमाणु घड़ियों के साथ-साथ स्वदेश में विकसित परमाणु घड़ी से भी लैस है। इसमें मौजूदा एल5/एस संकेतों के अलावा एल1 संकेत भी शामिल हैं। इससे भारतीय भूभाग और देश की भू-राजनीतिक सीमा से 1,500 किलोमीटर तक फैले क्षेत्र में नौवहन सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।”

भाषा नेत्रपाल खारी

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments