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Friday, 25 September, 2026
होमदेशहथकड़ी में दूल्हा, पुलिस के पहरे में फेरे: 12 घंटे की पैरोल पर गैंगस्टर ढिल्ला की हुई शादी

हथकड़ी में दूल्हा, पुलिस के पहरे में फेरे: 12 घंटे की पैरोल पर गैंगस्टर ढिल्ला की हुई शादी

पैरोल पर मैनपाल ढिल्ला की शादी में उसका परिवार, 15 हथियारबंद पुलिसकर्मी और मस्तनाथ बाबा के अनुयायी शामिल हुए। उसे रात 8 बजे तक जेल वापस लौटना था.

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नई दिल्ली: पुजारी जल्दी-जल्दी फेरे करवा रहा था और आग में “स्वाहा, स्वाहा” बोलकर आहुति डाल रहा था. मेटा चान अपने रोते हुए तीन बच्चों में से एक को फोन पर यूट्यूब चलाकर चुप कराने की कोशिश कर रही थी. धुएं से उसकी आंखों में जलन हो रही थी. वह बार-बार अपने बच्चों की तरफ देखती, फिर आग की तरफ देखने लगती.

गैंगस्टर मैनपाल ढिल्ला के हाथों को कपड़े के एक बड़े टुकड़े से ढका गया था, शायद इसलिए कि उसकी हथकड़ियां दिखाई न दें. लेकिन धातु का हिस्सा बार-बार कपड़े के नीचे से दिख जाता था. कोई उसे देख लेता और कपड़ा फिर से उस पर डाल दिया जाता.

मंडप के चारों तरफ भारी हथियारों से लैस पुलिसवाले खड़े होकर देख रहे थे. पास में महिला रिश्तेदार और पुलिस कांस्टेबल आपस में बात कर रही थीं और दुल्हन का लहंगा देख रही थीं.

एक महिला कांस्टेबल ने कहा, “दुल्हन का लहंगा उसे ठीक से फिट नहीं आ रहा है.” दूसरी ने जवाब दिया, “मैंने सुना है कि इसकी कीमत 6,000 रुपये है.”

यह एक असामान्य और जल्दी में की जा रही शादी थी. ढिल्ला को कहीं और भी जाना था, वापस जेल.

50 साल के हरियाणवी गैंगस्टर ढिल्ला को 37 साल की अपनी कंबोडियाई साथी मेटा से शादी करने के लिए गुरुवार सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक सिर्फ 12 घंटे की कस्टडी पैरोल दी गई थी. वह अपने तीन बच्चों के साथ झज्जर आई थी, लेकिन उसके परिवार का कोई और सदस्य उसके साथ नहीं आया था.

बड़ली गांव का ट्रैक्टर मैकेनिक ढिल्ला साल 2000 में सबसे ज्यादा वांछित अपराधियों की सूची में शामिल हुआ था. गांव में पानी की निकासी को लेकर हुए विवाद के बाद उसके चाचा हेमचंद्र की हत्या कर दी गई थी. बाद में उसने अपने मामा ओमप्रकाश की हत्या कर दी और जल्द ही इलाके में एक जाना-पहचाना अपराधी बन गया. समय के साथ उसने दो और लोगों की हत्या की और अब उस पर करीब 22 आपराधिक मामले हैं. वह हत्या और दूसरे आपराधिक मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है. इनमें हत्या की कोशिश, लूट, डकैती, आपराधिक साजिश और अवैध हथियारों के मामले भी शामिल हैं.

ढिल्ला के पैतृक गांव बड़ली से रिश्तेदार और गांव के लोग मंडप के आसपास जमा थे, जबकि करीब 15 भारी हथियारों से लैस पुलिसकर्मी निगरानी कर रहे थे. पुलिसवालों के लिए यह ऐसी शादी थी जिसकी एक तय समय सीमा थी: ढिल्ला को रात 8 बजे तक वापस हिरासत में पहुंचना था.

मंडप नकली फूलों से ढका हुआ एक अस्थायी छोटा कमरा था. एक तरफ पुरुषों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई थीं, जबकि महिलाएं पास में जमीन पर बैठी थीं. छोटे से इस घेरे के अंदर सिर्फ ढिल्ला, मेटा, उनके बच्चे और पंडित के बैठने की जगह थी. उनके चारों तरफ पुलिसवाले खड़े थे. चार अधिकारी सेफ्टी जैकेट पहने और बंदूकें लिए हुए थे और शादी की रस्म पर नजर रख रहे थे.

पुलिस की निगरानी में शादी

गुड़गांव-झज्जर रोड पर बने फार्महाउस के बाहर करीब 50 गाड़ियां खड़ी थीं, जिनमें SUV, स्कॉर्पियो और थार शामिल थीं. लेकिन अंदर शादी हो रही है, इसका पता देने वाली और कोई खास चीज बाहर नहीं थी. बाहर कोई सजावट नहीं थी. इसके बजाय पुलिसवाले प्रवेश द्वार के आसपास खड़े और बैठे थे और अंदर आने वाले लोगों पर नजर रख रहे थे.

प्रवेश द्वार पर पुलिसकर्मी बैग चेक कर रहे थे, अंदर आने वालों की तलाशी ले रहे थे और उनसे उनका नाम, पिता का नाम और फोन नंबर पूछ रहे थे. मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी.

अंदर गुलाबी और सफेद टेंट लगे थे, जो वहां मौजूद लोगों को धूप से बचा रहे थे. पुरुष खुले हिस्से में कुर्सियों पर बैठे थे, खाना खा रहे थे और बीड़ी पी रहे थे. महिलाएं कमरों और शादी की तैयारियों के बीच आ-जा रही थीं.

ज्यादातर सूट पहने महिलाएं फार्महाउस के अंदर एक साथ बैठी थीं. वे आपस में और महिला पुलिस कांस्टेबलों से बात कर रही थीं. वहां बॉलीवुड के गाने नहीं बज रहे थे और हरियाणा की शादी के हिसाब से असामान्य रूप से महिलाएं पारंपरिक शादी के गीत भी नहीं गा रही थीं.

दुल्हन के रहने की जगह | साक्षी मेहरा | दिप्रिंट

एक महिला ने महिला कांस्टेबलों की वर्दी को देखकर कहा, “पहले महिला कांस्टेबल सूट पहनती थीं, लेकिन अब उन्होंने शर्ट और पैंट पहनना शुरू कर दिया है.”

एक दूसरी महिला ने पूछा कि जब गांव से कोई व्यक्ति थाने आता है, तो क्या वे अभी भी अपना चेहरा घूंघट से ढकती हैं.

कांस्टेबल ने जवाब दिया, “हमें वर्दी पहननी होती है. अगर गांव से कोई थाने आता है, तो मैं अपना चेहरा नहीं ढकती. काम तो काम है.”

ढिल्ला के वकील ने, जिन्होंने अपना नाम नहीं बताने की बात कही, कहा, “मेटा करीब एक महीने गांव में रहेगी और फिर कंबोडिया वापस चली जाएगी. बाद में वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती है.”

शादी ढिल्ला के चचेरे भाई के फार्महाउस में हुई.

फार्महाउस में करीब चार से पांच कमरे और एक रसोई थी. इमारत के चारों तरफ एक बड़ा खुला हिस्सा था. वहां कोई स्विमिंग पूल या ऐसी कोई दूसरी साफ दिखाई देने वाली महंगी सुविधा नहीं थी. ऐसा नहीं लग रहा था कि वहां नियमित रूप से कोई रहता है. इसका मालिक, ढिल्ला का चचेरा भाई, रोहतक के एक गांव में रहता है.

कुछ महिलाएं तस्वीरें लेने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया और आदेश मानने को कहा. करीबी रिश्तेदार फार्महाउस में इधर-उधर घूम रहे थे, चीजों की व्यवस्था कर रहे थे, बच्चों को संभाल रहे थे और ढिल्ला की शादी की तैयारियों में मदद कर रहे थे.

यह पहली बार नहीं है जब हरियाणा के किसी जेल में बंद गैंगस्टर को शादी करने के लिए हिरासत से बाहर आने की अनुमति दी गई हो.

मार्च 2024 में संदीप उर्फ काला जठेड़ी, जिस पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में 30 से ज्यादा आपराधिक मामले चल रहे थे, को दिल्ली की एक अदालत ने छह घंटे की कस्टडी पैरोल दी थी ताकि वह अनुराधा चौधरी से शादी कर सके. अनुराधा को हिस्ट्रीशीटर के तौर पर जाना जाता था और उसे “रिवॉल्वर रानी” और “मैडम मिंज” के नाम से भी जाना जाता था. उन्होंने द्वारका में एक जगह पर शादी की थी और शादी के आसपास 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.

उसी महीने एक और हरियाणा गैंगस्टर को शादी के लिए कस्टडी पैरोल दी गई थी. सोनीपत के रहने वाले और कथित तौर पर गोगी गैंग से जुड़े योगेश दहिया उर्फ टुंडा को मार्च 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने छह घंटे की पैरोल दी थी ताकि वह विकासपुरी के एक आर्य समाज मंदिर में शादी कर सके. उस समय दहिया तिहाड़ जेल में बंद था.

एक साल बाद, जुलाई 2025 में, पुलिस के मुताबिक मारे गए गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया के करीबी सहयोगी अमित उर्फ दबंग को दिल्ली के नरेला में अपनी शादी में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल दी गई. उसे पुलिस की सुरक्षा में शादी की जगह ले जाया गया और रस्म पूरी होने के बाद वापस जेल भेज दिया गया.

कंबोडिया में परिवार बसाने वाला फरार गैंगस्टर

आठ साल पहले ढिल्ला हिसार सेंट्रल जेल से छह हफ्ते की पैरोल पर बाहर आया था. उसे 29 अगस्त 2018 को वापस जेल लौटना था. लेकिन वह फरार हो गया और लंबे समय तक फरार रहा.

इसके बाद वह हरियाणा से कोलकाता, फिर बैंकॉक और आखिर में कंबोडिया के सिएम रीप पहुंचा. 2019 में पुलिस ने कहा कि उसने फर्जी दस्तावेजों और “सोनू कुमार” नाम का इस्तेमाल करके भारतीय पासपोर्ट हासिल किया और देश छोड़ दिया. वह सिएम रीप में बस गया, जहां उसने एक कारोबार शुरू किया और एक नाइटक्लब चलाया.

वहीं उसकी मुलाकात मेटा चान से हुई.

फरार गैंगस्टर और कंबोडियाई महिला साथ रहने लगे और उन्होंने अपना परिवार बनाया. जब तक ढिल्ला गिरफ्तार हुआ, तब तक वहां बनाई गई उसकी जिंदगी हरियाणा की उस जेल से बहुत दूर हो चुकी थी, जिसे वह छोड़कर भागा था.

ढिल्ला की 30 साल की रिश्तेदार प्रीति ने कहा, “वहां उसने अपना कारोबार शुरू किया. उसने एक नाइटक्लब चलाया और मेटा चान के साथ अपनी जिंदगी बसाई.” उसने कहा, “योजना यह है कि मेटा यहां रहेगी और अगले साल तक ढिल्ला जेल से बाहर आ जाएगा. उसके बाहर आने के बाद पूरा परिवार गांव में साथ रहेगा.”

CBI को 6 नवंबर 2024 को उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस मिलने के बाद, कंबोडियाई अधिकारियों ने 24 जुलाई 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया. हरियाणा STF की एक टीम उसे 2 सितंबर 2025 को भारत वापस लाई और तब से वह हिरासत में है.

करीब एक साल बाद मेटा अपने तीन बच्चों के साथ भारत आई. उसकी सात महीने की बेटी नहीं आ सकी. उसके अपने परिवार का कोई भी सदस्य शादी में मौजूद नहीं था.

एक और चौंकाने वाली बात यह थी कि ढिल्ला के परिवार को यह पता ही नहीं था कि उसके कंबोडिया में बच्चे हैं. जब वह भारत वापस आया, तब उन्हें उनके बारे में पता चला.

उसकी मां शादी में महिलाओं के बीच बैठी थीं. उनमें से एक महिला ने उनसे मंडप की तरफ न देखने को कहा. उन्होंने बताया कि पारंपरिक हरियाणवी शादियों में दूल्हे की मां को फेरे नहीं देखने चाहिए.

80 साल की उम्र पार कर चुकी ढिल्ला की मां ने शादी में मौजूद रिश्तेदारों से भी बात नहीं की. शादी में मौजूद एक महिला ने कहा कि मां के पास इस स्थिति को स्वीकार करने के अलावा ज्यादा कोई विकल्प नहीं था.

महिला ने कहा, “उन्हें इसे स्वीकार करना ही था. उनके पास और क्या विकल्प था?”

अजनबियों के बीच दुल्हन

मेटा एक ऐसे कमरे में तैयार हो रही थी, जहां उसके आसपास वे लोग थे जिनसे वह पहली बार मिल रही थी. इनमें ढिल्ला के रिश्तेदार और महिला पुलिस कांस्टेबल शामिल थीं. उसके परिवार की तीन या चार महिलाएं उसके आसपास घूम रही थीं, उसके कपड़े ठीक कर रही थीं और मेकअप में मदद कर रही थीं. पांच या छह महिला कांस्टेबल पास में बैठी थीं और रिश्तेदारों से बात कर रही थीं.

ऐसा शायद ही कोई पल था जब वह अकेली रह पाती.

मेटा सिर्फ गांव के गैंगस्टर से शादी करने वाली विदेशी महिला नहीं थी. वह एक मां भी थी, जो अपने बच्चों को शांत रखने की कोशिश कर रही थी. वह टूटी-फूटी अंग्रेजी में बात करने की कोशिश कर रही थी, क्योंकि उसे लगा कि शायद यही भाषा समझी जा सकती है.

जब उसका एक बैग नहीं मिल रहा था और उसने अपना काला बैग मांगा, तो वहां मौजूद उम्रदराज हरियाणवी महिलाएं उसे खाली नजरों से देखने लगीं. फिर परिवार की कम उम्र की बहुएं मदद के लिए आगे आईं.

उन्होंने पूछा, “तुम्हारा काला बैग? कहां? तुमने किधर रखा?” वे यह समझने की कोशिश कर रही थीं कि मेटा को क्या चाहिए.

तभी किसी का बच्चा रोने लगा.

दूल्हे के परिवार और दोस्त | साक्षी मेहरा | दिप्रिंट

मेटा ने अपना फोन खोला, यूट्यूब चलाया और अपनी बेटी को फोन दे दिया. बच्ची चुप हो गई और स्क्रीन देखने लगी. कुछ मिनटों के लिए मेटा फिर से तैयार होने पर ध्यान दे सकी.

फिर बच्ची का चेहरा फिर सिकुड़ गया और वह रोने लगी.

मेटा भी बेचैन दुल्हन थी, जिसे बस दो मिनट अकेले में शांति से सांस लेने की जरूरत थी, लेकिन उसे वह भी नहीं मिल पा रहा था.

प्रीति उसके पास आई. मेटा ने उसकी तरफ देखा और उसकी आंखों में आंसू आने लगे.

महिलाओं से भरे शोर वाले कमरे में किसी ने इस पल पर ध्यान नहीं दिया.

प्रीति ने कहा, “मेटा, इधर आओ… मैं तुम्हें लहंगा पहनाती हूं,” और उसने कपड़े को हाथ में ले लिया.

एक और 22 साल की महिला मदद करने के लिए आ गई. दोनों ने मिलकर मेटा का लहंगा ठीक किया, उसका मेकअप देखा और बच्चों को शांत करने की कोशिश की.

युवती ने कहा, “उसे अभी हिंदी समझ नहीं आती और हमें अंग्रेजी नहीं आती. वह धीरे-धीरे सीख जाएगी.”

वे मेटा को तैयार होते हुए देख रही थीं और उसके कपड़ों, मेकअप और दिखने के तरीके को ध्यान से देख रही थीं.

एक महिला ने कहा, “मेटा ने खुद को बहुत अच्छी तरह से संभालकर रखा है. चार बच्चों के बाद भी वह इतनी फिट है.”

दूसरी ने कहा, “हां, वह अपना बहुत अच्छा ख्याल रखती है. सुबह उठते ही मेकअप करती है और कंबोडिया में जिम भी जाती है.”

कमरे में शादी वाली जानी-पहचानी हलचल थी. महिलाएं कपड़े ठीक कर रही थीं, मेकअप देख रही थीं, निर्देश दे रही थीं और बच्चों को संभाल रही थीं.

जब मंडप में जाने का समय आया, तो मेटा के साथ जाने के लिए उसका कोई भाई, माता-पिता या परिवार का कोई और सदस्य नहीं था. उसकी जगह ढिल्ला के रिश्तेदार और महिला पुलिस कांस्टेबल उसके साथ चल रहे थे.

मंडप में ढिल्ला उसका इंतजार कर रहा था. उसके हाथ कपड़े के नीचे हथकड़ी लगे हुए थे. वह मुस्कुरा रहा था. उनके बच्चे उनके पास बैठे थे.

मेटा 12 सितंबर को अपने तीन बच्चों के साथ झज्जर आई थी. उसके बाकी परिवार के लोग कंबोडिया में ही रह गए थे.

मेटा और ढिल्ला कंबोडिया में कई सालों से एक-दूसरे को जानते थे. उसके रिश्तेदारों के मुताबिक, वे वहां साथ रहते थे और अपने बच्चों को पाल रहे थे.

प्रीति ने कहा, “दोनों ने वहां पहले ही धार्मिक तरीके से शादी कर ली थी, लेकिन परिवार चाहता था कि वे भारत में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करें.”

फेरे जल्दी-जल्दी पूरे हुए

पुजारी ने बहुत तेजी से फेरे करवाए और लगभग दोगुनी रफ्तार से आग में “स्वाहा, स्वाहा” बोलते हुए आहुति डालता रहा.

इसके बाद लंबे समय तक शादी का जश्न मनाने का कोई समय नहीं था. घड़ी भी इस शादी की रस्म का हिस्सा थी.

ढिल्ला पैरोल पर फार्महाउस पहुंचा था और उसके पास मेटा से शादी करने, अपने बच्चों के साथ कुछ घंटे बिताने और फिर जेल लौटने के लिए रात 8 बजे तक का समय था.

शाम होते-होते यह असामान्य शादी वहीं खत्म हो जानी थी, जहां से भारत में ढिल्ला की जिंदगी फिर से शुरू हुई थी. यानी उसे वापस हिरासत में ले जाया जाना था.

अब अच्छी जिंदगी जियो

ढिल्ला को हरियाणा में सजा पाए कैदियों को अस्थायी रूप से जेल से बाहर जाने की व्यवस्था के तहत छोड़ा गया था. लेकिन उसकी पैरोल सामान्य नहीं थी.

हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिज़नर्स (टेम्पररी रिलीज़) एक्ट, 2022 में कस्टडी पैरोल का मतलब है कि किसी खास काम के लिए किसी कैदी को हथियारबंद पुलिस की सुरक्षा में अस्थायी रूप से बाहर ले जाया जाए. कानून के तहत किसी “हार्डकोर सजायाफ्ता कैदी” को कस्टडी पैरोल पर उसके बच्चों या भाई-बहन की शादी में शामिल होने के लिए जेल से बाहर ले जाया जा सकता है. ऐसी कस्टडी पैरोल एक कार्यक्रम के लिए यात्रा के समय को छोड़कर छह घंटे से ज्यादा नहीं हो सकती.

हालांकि, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ढिल्ला को 12 घंटे की पैरोल दी थी.

उसके परिवार के लिए यह शादी उन रिश्तेदारों और दोस्तों का मिलना था, जिन्होंने दशकों के दौरान उसकी जिंदगी को बदलते हुए देखा था. उन्होंने 2000 में उसकी गिरफ्तारी से लेकर 2018 में पैरोल से उसके फरार होने और फिर हरियाणा वापस आने तक का सफर देखा था.

37 साल के ढिल्ला के चचेरे भाई दीपक ने कहा कि ढिल्ला को शायद करीब एक और साल हिरासत में रहना पड़ेगा. इसके बाद वह बाकी मामलों में जमानत मांग सकता है. उसने कहा कि उसके खिलाफ कुछ मामले पहले ही खत्म हो चुके हैं, जबकि कुछ मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.

लंबित मामलों का जिक्र करते हुए दीपक ने कहा, “करीब एक साल की हिरासत बाकी है.” उसने दावा किया कि उम्रकैद की सजा वाले एक मामले में ढिल्ला पहले ही 12-13 साल हिरासत में बिता चुका है.

शादी की जगह | साक्षी मेहरा | दिप्रिंट

उसने कहा कि करीब पांच, चार, ढाई साल और सात महीने की उम्र वाले बच्चों का भारत में स्कूल में दाखिला भी कराया जा सकता है, जब मेटा हरियाणा में बस जाएगी. वहां बच्चे हिंदी के साथ-साथ स्थानीय भाषा भी सीख सकते हैं.

फार्महाउस के अंदर ढिल्ला के बड़े परिवार के बुजुर्ग पुरुषों का एक समूह सफेद कुर्ते और धोती पहने कुर्सियों पर एक साथ बैठा था. वे शादी और उसके गांव वापस आने के बारे में बात कर रहे थे.

दीपक ने कहा, “वह एक अच्छा इंसान है, लेकिन शुरुआत में उससे एक गलती हुई और उसके बाद एक चीज दूसरी चीज से जुड़ती चली गई. जब कोई व्यक्ति इस तरह की चीज में फंस जाता है, तो हमेशा ऐसा नहीं होता कि उसने इसे अपनी मर्जी से चुना हो.”

बुजुर्ग लोग उसकी शादी और बच्चों को नई शुरुआत का मौका मान रहे थे.

शादी में आए एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, “अब जब उसकी शादी हो गई है और उसके बच्चे हैं, तो उसे बस अच्छी जिंदगी जीनी चाहिए और बाकी सब पीछे छोड़ देना चाहिए.”

शादी शुरू होने से पहले, दूसरी तरफ से एक नारंगी रंग की मिनी टूर बस दिखाई दी और फार्महाउस की तरफ आने लगी. दो आदमी उसके आगे चल रहे थे और नाच रहे थे. वे रुक-रुककर ढोलक बजा रहे थे.

उनके पीछे कम से कम 15 बाबा बस में सफर कर रहे थे, जो मस्तनाथ परंपरा से जुड़े थे. उन्होंने नारंगी रंग की धोतियां पहन रखी थीं. आखिरकार यह समूह फार्महाउस पहुंच गया. परिवार ने उनका स्वागत किया.

18वीं सदी के रोहतक के हिंदू संत मस्तनाथ बाबा को हरियाणा में बहुत सम्मान दिया जाता है. शादी में मौजूद लोगों ने बताया कि ढिल्ला मस्तनाथ बाबा का अनुयायी है और उसने शादी से पहले बाबाओं से आशीर्वाद लिया था.

हरियाणा से वर्षों तक दूर रहने, कंबोडिया में परिवार बसाने और हथकड़ियों में भारत लौटने वाले एक व्यक्ति के लिए यह शादी ऐसी जिंदगी की कल्पना करने की कोशिश थी, जो उस जिंदगी से बहुत अलग थी, जिसने उसे जेल तक पहुंचाया था.

लेकिन ढिल्ला के लिए वह नई जिंदगी अभी इंतजार कर रही थी. उसकी कस्टडी पैरोल की भी एक तय समय सीमा थी: रात 8 बजे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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