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Friday, 25 September, 2026
होमदेशED का दावा—सिसोदिया, सत्येंद्र जैन ने पंजाब के शहरी विकास प्राधिकरण के काम में दखल दिया

ED का दावा—सिसोदिया, सत्येंद्र जैन ने पंजाब के शहरी विकास प्राधिकरण के काम में दखल दिया

बड़े पैमाने पर छापेमारी के बाद एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि AAP नेता नियमित रूप से ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ बैठकें करते थे.

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नई दिल्ली: पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन नियमित रूप से ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के अधिकारियों के साथ बैठकें करते थे. इन बैठकों में मास्टर प्लान को मंजूरी देने और रियल एस्टेट साइटों की नीलामी जैसे कई अहम फैसले लिए गए. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी.

इसके अलावा, ED ने जैन पर आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार के शहरी योजना और विकास से जुड़े इस निकाय में कोई आधिकारिक पद नहीं होने के बावजूद उन्होंने नई नीलामी और GMADA की ओर से जमीन खरीदने जैसे सभी अहम फैसले लिए. उन्होंने जमीन मालिकों को कितना मुआवजा दिया जाएगा, यह भी तय किया.

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि GMADA की बिना बिकी जमीन की आरक्षित कीमतों को नीलामी से पहले धोखाधड़ी से कम किया गया. इससे प्राधिकरण और राज्य के सरकारी खजाने को करीब 10,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ और बिल्डर-राजनेता के गठजोड़ को उतना ही फायदा हुआ.

ये नए आरोप एजेंसी की ओर से दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में दो दर्जन से ज्यादा जगहों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी किए जाने के कुछ घंटों बाद सामने आए हैं. यह जांच तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स, रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया), MB इंफ्राबिल्ड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी रियल एस्टेट कंपनियों को कथित तौर पर नियमों में छूट देने में हुई गड़बड़ियों की जांच के तहत की गई.

इन कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों के ठिकानों के साथ-साथ पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों की भी तलाशी ली गई.

भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने GMADA मुख्यालय में हुई छापेमारी की समीक्षा की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया था. सरकार ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार के कई अहम अधिकारियों को एक जगह पर रोककर रखा गया और कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया. हालांकि, हाई कोर्ट की ओर से नियुक्त वारंट अधिकारी ने एजेंसी के अधिकारियों को इन आरोपों से मुक्त कर दिया.

अधिकारियों ने कहा, “ED की तलाशी में सामने आया है कि AAP नेता सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया मास्टर प्लान और साइटों की नीलामी को लेकर GMADA के अधिकारियों के साथ नियमित रूप से अनौपचारिक बैठकें करते थे. नई नीलामी और GMADA की ओर से जमीन खरीदने के साथ-साथ मुआवजा तय करने जैसे अहम फैसले सत्येंद्र जैन के निर्देश पर अनौपचारिक रूप से लिए गए.”

GMADA के कामकाज में गड़बड़ी के मामले में ED की छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने इस निदेशालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “नौकरी पर रखा डकैत” बताया. सिसोदिया ने गुरुवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “इन्हें प्रवर्तन निदेशालय कहा जाता है, लेकिन ये मोदी जी के नौकरी पर रखे डकैत हैं, जिन्हें पंजाब में परेशानी खड़ी करने के इरादे से भेजा गया है.”

ED अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि GMADA की कई अहम फाइलें, जिनमें संवेदनशील जानकारी थी, वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से प्राधिकरण के मुख्यालय से चंडीगढ़ के सेक्टर 39 स्थित एक घर में ले जाई गईं. वहां जैन और पूर्व दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) अमरेंद्र झा के साथ बैठकें होती थीं.

अधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह घर पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के चेयरमैन सनी सिंह अहलूवालिया को आधिकारिक तौर पर दिया गया था, लेकिन जैन इसका इस्तेमाल बैठकें करने के लिए करते थे. एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि जैन के OSD झा को पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी भवन के अंदर अनौपचारिक रूप से एक कमरा दिया गया था. इसी भवन में GMADA का मुख्यालय है. झा के पास कोई आधिकारिक पद नहीं था, लेकिन वह अधिकारियों को निर्देश देने और इस सरकारी निकाय के अहम फैसलों को प्रभावित करने के लिए इस कमरे का इस्तेमाल करते थे.

अधिकारियों ने कहा, “नई नीलामी और GMADA की ओर से जमीन खरीदने के साथ-साथ मुआवजा तय करने जैसे अहम फैसले सत्येंद्र जैन के निर्देश पर अनौपचारिक रूप से लिए गए. वरिष्ठ GMADA अधिकारियों की ओर से फाइलें अनौपचारिक रूप से PUDA भवन से बाहर ले जाई जाती थीं. ये फाइलें सत्येंद्र जैन और अमरेंद्र झा के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर 39 में मकान नंबर 926 में बैठक के लिए ले जाई जाती थीं. इन बैठकों में नीलामी, निजी लोगों को फायदा पहुंचाने वाले मास्टर प्लान में बदलाव जैसे अहम नीतिगत फैसलों पर GMADA अधिकारियों के साथ चर्चा होती थी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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