नई दिल्ली: इंस्टाग्राम रील की शुरुआत एक नौजवान से होती है, जिसने काला चश्मा पहना हुआ है. बैकग्राउंड में इलेक्ट्रोपॉप गाना बज रहा है और वह अपने बालों पर हाथ फेरता हुआ नज़र आता है.
इसके बाद एक आईडी कार्ड की तस्वीर आती है, और ऐसा लगता है कि यह एक ज़बरदस्त फ्लेक्स की कोशिश है. “कुछ खास नहीं…UK FTA, G20 पर बातचीत की, विदेशी सरकारों के साथ पॉलिसी बनाई, विदेश मंत्रियों, प्रधानमंत्रियों के साथ यूं ही तस्वीरें खिंचवाईं”.
इसके बाद लगातार तस्वीरों का सिलसिला चलता है. कभी वह सूट पहनकर मंत्रियों के पीछे बैठा दिखाई देता है, कभी विदेशी अधिकारियों से हाथ मिलाते हुए, कभी थिंक-टैंक के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए, कभी पुरस्कार लेते हुए और कभी विदेशों के महंगे रेस्तरां और मशहूर स्मारकों के बाहर फोटो खिंचवाते हुए. इंस्टाग्राम पर उसके करीब 80,000 फॉलोअर्स हैं.
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अधिकारियों और विदेशी डिप्लोमैट्स तक पहुंच दिखाने वाले शानदार वीडियो से लेकर, युवा भारतीयों को IFS ऑफिसर बने बिना पब्लिक पॉलिसी में जगह बनाने के लिए पेड मेंटरशिप सेशन देने तक, कंसल्टेंट से इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर बने लोगों का एक ग्रुप हज़ारों फॉलोअर्स बना रहा है.
इनके वीडियो के डिस्क्रिप्शन में “भारत सरकार” या “एमईए” का ज़िक्र भी किया जाता है, ताकि लोग इन्हें और भरोसेमंद समझें, जबकि इनका इनमें से किसी से भी कोई आधिकारिक संबंध नहीं है.
सरकारी नौकरी करने की बढ़ती इच्छा के बीच, UPSC परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले कई युवा इन चमकदार वीडियो का निशाना बन रहे हैं. इन वीडियो में दावा किया जाता है कि सिस्टम का हिस्सा बने बिना भी वे पब्लिक पॉलिसी बनाने में भूमिका निभा सकते हैं.
लेकिन विदेश मंत्रालय इससे बिल्कुल भी खुश नहीं है. रविवार को मंत्रालय ने ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ बयान जारी किया. एमईए के फैक्ट-चेक हैंडल ने कहा, “कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट कर रहे हैं, जिनसे लगता है कि वे व्यापार, प्रवासन (माइग्रेशन) और दूसरे मुद्दों पर एमईए को नीति संबंधी सलाह दे रहे हैं. ये हैंडल पैसे लेकर यह भी बता रहे हैं कि MEA के साथ कैसे काम किया जा सकता है. इन लोगों का मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है. मंत्रालय सभी लोगों से अपील करता है कि सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी पोस्ट से सावधान रहें.”
एमईए के इस बयान के कुछ ही घंटों के भीतर, ऐसे एक बड़े इन्फ्लुएंसर अकाउंट ने अपनी प्रोफाइल से “GoI (Government of India)” हटा दिया.
हालांकि, उसके अकाउंट पर अब भी ऐसे वीडियो मौजूद हैं, जिनमें दावा किया गया है कि उसने किसी दूसरे देश के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत की, भारत से जुड़े मामलों में विदेशी सरकारों को सलाह दी, MEA और राज्य सरकारों को सलाह दी, और उसकी विदेश मंत्रियों व दूसरे अंतरराष्ट्रीय नेताओं तक पहुंच है.
ये लोग “पॉलिसी करियर” के मौके दिखाते हैं और मेंटरशिप सेशन के लिए पैसे लेते हैं. कुछ मामलों में एक घंटे की फोन कॉल और रणनीतिक करियर प्लानिंग के लिए 1,000 रुपये या उससे भी ज्यादा फीस ली जाती है. दावा किया जाता है कि वे युवाओं को ऐसे वैकल्पिक करियर का रास्ता बताएंगे, जहां वे यूपीएससी पास किए बिना भी राजनयिक जैसा काम कर सकें.
ऐसे कुछ लोगों के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 50,000 से लेकर लगभग 1 लाख तक फॉलोअर्स हैं. इनके कुछ वीडियो को इंस्टाग्राम पर 10 लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है.
सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि ऐसे अकाउंट्स की बढ़ती पहुंच, लोकप्रियता और तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए ही MEA को यह चेतावनी जारी करनी पड़ी. सच यह है कि मंत्रालय कई बार खास विषयों पर काम करने वाले थिंक-टैंक के कर्मचारियों को कार्यक्रमों में बुलाता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि वे मंत्रालय के कर्मचारी हैं या उनका मंत्रालय में कोई आधिकारिक पद है.
मंत्रालय बेहतर और जानकारी पर आधारित फैसले लेने के लिए पॉलिसी थिंक-टैंक से रिसर्च भी करवाता है. ऐसे मामलों में रिसर्च से जुड़े लोगों को MEA की ओर से आयोजित किसी खास क्षेत्र की चर्चा (ब्रेनस्टॉर्मिंग) में बुलाया जा सकता है और वे दूसरे मंचों पर भी अपनी बात रख सकते हैं.
लेकिन जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स की बात हो रही है, वे ऐसे कार्यक्रमों की तस्वीरों को जोड़कर एक मिनट से भी कम समय का वीडियो बना देते हैं. इससे ऐसा दिखाने की कोशिश की जाती है कि उन्हें मंत्रालय की आधिकारिक मंजूरी या समर्थन मिला हुआ है. इसके बाद वही कंसल्टेंट इन्फ्लुएंसर बन जाता है और दूसरों को भी अपने जैसे करियर का रास्ता दिखाने की पेशकश करता है.
किसी तीसरे देश के नई दिल्ली स्थित दूतावास के निमंत्रण पर पूरी तरह स्पॉन्सर्ड विदेश यात्रा करने का दावा और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े लोगों के लिए खुले मंच, जैसे रायसीना डायलॉग, में शामिल होने को भी अपनी छवि मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
इस साल 5.49 लाख से ज्यादा भारतीयों ने यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा दी. उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में कुल 1,016 अधिकारियों में जगह बनाना था.
सोशल मीडिया पोस्ट के पैटर्न
बहुत अच्छे से बनाए गए वीडियो में व्यक्ति को दुनिया भर में घूमते हुए, इवेंट्स में शामिल होते हुए, जिसमें पब्लिक पॉलिसी प्रोफेशनल्स के लिए खुले इवेंट्स भी शामिल हैं और बैकग्राउंड में भारतीय झंडे के साथ फोटो खिंचवाते हुए दिखाया गया है.
भारतीय झंडे, एम्बेसडर के साथ फोटो, या एम्बेसी द्वारा आयोजित नेशनल डे सेलिब्रेशन में शामिल होने वाले वीडियो भी आगे शेयर किए जाते हैं, जो सरकार और नई दिल्ली में एम्बेसी दोनों तक पहुंच दिखाते हैं.
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि एम्बेसी द्वारा नेशनल डे सेलिब्रेशन आमतौर पर इनविटेशन पाने वालों के लिए खुले होते हैं और इनवाइटी लिस्ट आमतौर पर बड़ी होती है, कुछ मामलों में 2,000 से भी ज़्यादा.
दिप्रिंट द्वारा देखा गया एक और अकाउंट यूपीएससी परीक्षा में फेल होने वालों के लिए एक अल्टरनेटिव करियर के तौर पर पब्लिक पॉलिसी को बताता है. अकाउंट में व्यक्ति के यूनियन कैबिनेट मिनिस्टर्स के साथ फोटो खिंचवाने, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा आयोजित रायसीना डायलॉग जैसे इवेंट्स में शामिल होने और एम्बेसी प्रोग्राम्स में शामिल होने के वीडियो मोंटाज भी हैं.
ऐसे वीडियो पर कमेंट्स में अक्सर यूज़र्स व्यक्ति से गाइडेंस मांगते हैं, जिसमें आमतौर पर उनसे “और जानने के लिए ट्यून इन” करने के लिए कहा जाता है. कुछ मामलों में, ऐसे अकाउंट्स के डिस्क्रिप्शन में “एमईए रोल लिंक्स” जैसे नामों वाले लिंक शामिल होते हैं और इसमें मेंटरशिप के मौकों के अलग-अलग ऑफ़र का एक मेन्यू भी शामिल होता है, जिसमें अक्सर इन्फ्लुएंसर पेड एडवाइज़री सर्विस भी देते हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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