तिरुवनंतपुरम: जिलिया ए.डी. अक्सर अपने पैतृक गांव एलानाड, जो त्रिशूर में है, और पलक्कड़ के ओट्टापालम के बीच यात्रा करती हैं, जहां वह अपने पति के साथ रहती हैं. तकनीकी रूप से वह नई चुनी गई केरल सरकार की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना की लाभार्थी होंगी. लेकिन उनका कहना है कि व्यवहार में यह योजना उनके किसी काम की नहीं होगी.
18 मई को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कांग्रेस सरकार ने इस योजना को मंजूरी दी थी. इसके तहत राज्य की ‘ऑर्डिनरी’ बसों में मुफ्त यात्रा का वादा किया गया है. ‘ऑर्डिनरी’ बसों के अलावा केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) फास्ट पैसेंजर, सुपरफास्ट, सुपर डीलक्स और अंतरराज्यीय बस सेवाएं भी चलाता है.
जिलिया कहती हैं, “हमारे रूट पर केवल एक ही KSRTC बस चलती है, जो सुबह 6.50 बजे की सुपरफास्ट बस है और कोझिकोड जाती है. इसलिए उस बस को पकड़ने के लिए जल्दी निकलने का भी कोई फायदा नहीं है.”
उनका अनुभव केरल की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना को लेकर उठ रहे एक अहम सवाल को सामने लाता है. सवाल यह है कि क्या यह सुविधा पूरे राज्य में समान रूप से उपलब्ध हो पाएगी.
यह योजना राज्य की ऑर्डिनरी बसों में मुफ्त यात्रा का वादा करती है, लेकिन ऐसे बसों की उपलब्धता अलग-अलग क्षेत्रों में काफी अलग है. सीमित KSRTC रूट और कम बसों की वजह से कई यात्रियों को अब भी निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ता है.
KSRTC के बढ़ते घाटे और सरकारी मदद पर निर्भरता को देखते हुए इस योजना की आर्थिक स्थिरता को लेकर भी बहस शुरू हो गई है. यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या राज्य सरकार एक साथ निगम के राजस्व नुकसान की भरपाई कर पाएगी और सेवाओं के विस्तार तथा ढांचे में सुधार के लिए निवेश भी कर पाएगी, ताकि ज्यादा महिलाओं को इसका लाभ मिल सके.
महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा देना चुनाव से पहले कांग्रेस की पांच इंदिरा गारंटी में से एक था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 7 मार्च को वी.डी. सतीशन की पुथुयुग यात्रा के समापन समारोह में पहली बार इस योजना का वादा किया था.
कांग्रेस ने चुनाव जीता और सतीशन मुख्यमंत्री बने.
सतीशन सरकार के अनुसार, योजना के पहले चरण में 15 जून से सभी उम्र की महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को सभी ऑर्डिनरी KSRTC बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी.
प्रियदर्शिनी नाम की इस योजना पर राज्य सरकार को हर साल अतिरिक्त 750 से 800 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.
“मुफ्त यात्रा सामाजिक रूप से फायदेमंद है, लेकिन आर्थिक रूप से इससे सरकार और सेवा देने वाली संस्था दोनों पर बोझ पड़ेगा.”
— केरल परिवहन किराया निर्धारण समिति के पूर्व सदस्य टी. एलंगोवन
राष्ट्रीय परिवहन योजना एवं अनुसंधान केंद्र (नैटपैक) के पूर्व निदेशक और केरल परिवहन किराया निर्धारण समिति के पूर्व सदस्य टी. एलंगोवन ने दिप्रिंट से कहा कि यह योजना सामाजिक लाभ दे सकती है और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ा सकती है, लेकिन सरकार को तय करना होगा कि इसका लाभ किसे मिलेगा और राजस्व नुकसान की भरपाई KSRTC और निजी बस संचालकों, जो यात्रियों के राज्य बसों की ओर जाने से राजस्व कम होने को लेकर चिंतित हैं, को कैसे की जाएगी.
एलंगोवन ने कहा, “मुफ्त यात्रा सामाजिक रूप से फायदेमंद है, लेकिन आर्थिक रूप से इससे सरकार और सेवा देने वाली संस्था दोनों पर असर पड़ेगा.”
दिप्रिंट ने KSRTC के कार्यकारी निदेशक (संचालन एवं प्रशासन) जी.पी. प्रदीप कुमार से मुलाकात की, लेकिन उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
KSRTC पर वित्तीय दबाव
भारत के सबसे पुराने सरकारी परिवहन निगमों में से एक KSRTC की शुरुआत 1937 में बने त्रावणकोर राज्य परिवहन विभाग से हुई थी और 1965 में इसे औपचारिक रूप से निगम बनाया गया. फिलहाल यह करीब 4,500 बसें चलाता है और अपनी विभिन्न सेवाओं के जरिए हर दिन लगभग 25 लाख यात्रियों को सेवा देता है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल बसों में से 3,125 ऑर्डिनरी बसें हैं.
“हम किराए के अलावा दूसरी आय बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे. हमें यह जानकारी भी मिली है कि लोग हमें बसें दान करने के लिए तैयार हैं.”
—परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन
नई सरकार की हालिया स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, समीक्षा अवधि के हर साल KSRTC को घाटा हुआ है, जिससे समय के साथ उसका कुल घाटा लगातार बढ़ता गया. वित्त वर्ष 2024-25 में उसका कुल जमा घाटा 20,961.36 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल 19,380.98 करोड़ रुपये था. 2019-20 में यह घाटा 12,159.10 करोड़ रुपये था.
Beloved Rahul Gandhi ji has announced 5 historic guarantees for Kerala — a clear promise that a UDF government will stand with every Malayali.
• Free bus travel for women – empowering mobility, safety and economic independence.
• ₹1000/month for college-going girls –… pic.twitter.com/MWIsCJn0Ry— Ramesh Chennithala (@chennithala) March 7, 2026
राज्य बजट 2024-25 के अनुसार, तत्कालीन एलडीएफ सरकार ने पिनराई विजयन के नेतृत्व में 2016-21 के दौरान 5,002.13 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जबकि दूसरी पिनराई सरकार के पहले तीन वर्षों में KSRTC को 4,917.92 करोड़ रुपये की सहायता दी गई.
चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा योजना की घोषणा के तुरंत बाद एलडीएफ के परिवहन मंत्री के.बी. गणेश कुमार ने कहा था कि ऐसा कदम KSRTC को हमेशा के लिए बंद होने की ओर ले जाएगा. योजना की आधिकारिक घोषणा के बाद दिप्रिंट ने उनसे फोन और संदेश के जरिए संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने कहा कि हालांकि इस योजना से बड़ा वित्तीय बोझ आएगा, लेकिन इसका भार KSRTC पर नहीं डाला जाएगा क्योंकि केरल सरकार निगम को आवश्यक राशि अनुदान के रूप में देगी. उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
जॉन ने कहा, “योजना पर फैसला लेते समय कैबिनेट और मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया था कि KSRTC पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा. हम किराए के अलावा दूसरी आय बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे. हमें यह जानकारी भी मिली है कि लोग हमें बसें दान करने के लिए तैयार हैं. हम ऐसे हर सहयोग का स्वागत करते हैं. हालांकि, हमने अभी इसकी प्रक्रिया पर कोई चर्चा नहीं की है.”
राज्य मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने योजना का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने इसे एक स्पष्ट योजना के साथ घोषित किया है.

उन्होंने कहा, “सरकार सीधे KSRTC को पैसा दे रही है. घोषणा करने से पहले हमें पता था कि इसे कैसे लागू करना है. इसकी आलोचना करने की कोई जरूरत नहीं है. गरीब महिलाओं को यात्रा करने दीजिए.”
KSRTC अधिकारी संघ के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा कि निगम के कर्मचारी इस पहल का बड़े पैमाने पर स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि यात्रियों की संख्या बढ़ने से KSRTC के बस बेड़े का विस्तार हो सकता है और अंततः इससे निगम को फायदा होगा. योजना को बनाए रखने और निगम को मजबूत करने की जिम्मेदारी सरकार की होगी.
उन्होंने कहा, “पहले कहा जाता था कि KSRTC हमेशा के लिए बंद होने वाला है. लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता. सरकार को इसे चलाए रखना होगा.”
अधिकारी ने कहा कि मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, KSRTC की कुल 25 लाख दैनिक यात्रियों में 75 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं और निगम को उम्मीद है कि यह संख्या और बढ़ेगी.
उन्होंने कहा, “हमें लगा था कि सभी बसें मुफ्त होंगी. लेकिन जब तक किसी रूट पर केवल ऑर्डिनरी बसें नहीं होंगी, तब तक हमें नहीं पता कि कितने और यात्री आएंगे.”
आर्थिक असर, निजी बस ऑपरेटर्स की चिंता
हालांकि केरल के लिए यह योजना पहली बार लाई गई है, लेकिन ऐसी पहलें दुनिया के दूसरे हिस्सों में पहले भी की जा चुकी हैं. अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित कॉमर्स शहर 1962 में बस यात्रा को मुफ्त करने वाला पहला शहर बना था, जबकि लक्जमबर्ग 2020 में पूरे देश में सभी सार्वजनिक परिवहन को मुफ्त करने वाला पहला देश बना.

भारत में, दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने 2019 में पिंक टिकट योजना के तहत दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (डीटीसी) और क्लस्टर बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू की थी. बाद में कांग्रेस सरकारों ने पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना में, और डीएमके सरकार ने तमिलनाडु में चुनावी वादे के तहत ऐसी योजनाएं शुरू कीं. अब केरल भी उसी राह पर है.
आईआईटी बॉम्बे के शैलेश जे. मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (एसजेएमएसओएम) के उदयन राठौड़ और आशीष सिंह की 2026 की एक स्टडी, टिकट टू राइड: इम्पैक्ट ऑफ फ्री पब्लिक ट्रांसपोर्ट ऑन विमेन्स वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन इन इंडिया, में पाया गया कि मुफ्त बस योजनाओं से महिलाओं की कामकाजी भागीदारी में करीब तीन प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई. साथ ही काम से जुड़ी यात्राएं भी बढ़ीं.
एलंगोवन ने कहा कि केरल में यह योजना अलग नतीजे दे सकती है, क्योंकि यहां साक्षरता दर ऊंची होने के बावजूद महिलाओं की कामकाजी भागीदारी कम है.
उन्होंने कहा, “केरल में ज्यादातर महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं. वे खाड़ी देशों या दूसरी जगहों पर जाकर काम करती हैं. वे राज्य की अर्थव्यवस्था में सीधे योगदान नहीं देतीं, सिवाय इसके कि वे अपने परिवारों के गुजारे के लिए पैसे भेजती हैं. इसलिए इस पहलू का अध्ययन होना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं और संभव हो तो सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों के लिए मुफ्त यात्रा की लक्षित योजना बेहतर विकल्प होती.
इस योजना का राज्य के निजी बस ऑपरेटरों ने भी विरोध किया है.
KSRTC और प्राइवेट बस ऑपरेटर्स फेडरेशन से मिली जानकारी के मुताबिक, इस समय KSRTC की करीब 4,500 बसें चल रही हैं, जबकि निजी बसों की संख्या करीब 8,000 है. 2011 में निजी बसों की संख्या 34,000 से ज्यादा थी. इसके उलट पड़ोसी तमिलनाडु में राज्य की बसें कुल बस बेड़े का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा हैं.
केरल में तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, पथनमथिट्टा और वायनाड जिलों में KSRTC बसों की संख्या निजी बसों से ज्यादा है. वहीं, मध्य और उत्तरी केरल के बाकी सात जिलों में निजी बसों की संख्या ज्यादा है.
केरल स्टेट प्राइवेट बस ऑपरेटर्स फेडरेशन के राज्य सचिव हमजा एरिक्कुन्नु ने दिप्रिंट से कहा कि दक्षिणी जिलों और वायनाड की निजी बसें पहले ही दिन से डीजल का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं रहेंगी.
उन्होंने कहा, “निजी बसों में आधे से ज्यादा यात्री महिलाएं होती हैं. अगर KSRTC में मुफ्त यात्रा का विकल्प मिलेगा, तो महिलाएं स्वाभाविक रूप से उसी को चुनेंगी. इसका मतलब है कि हमारी रोज की आधे से ज्यादा कमाई खत्म हो जाएगी.”
उन्होंने कहा कि बस ऑपरेटर पहले ही अपनी कमाई का करीब 60 प्रतिशत ईंधन पर खर्च करते हैं और एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन पर चला जाता है.
फेडरेशन के मुताबिक, इस समय निजी बसें सीधे तौर पर करीब 35,000 लोगों को रोजगार दे रही हैं. फेडरेशन 16 जून को त्रिशूर में एक दिन की बैठक करेगा, जिसमें आगे की रणनीति और सरकार के सामने रखे जाने वाले प्रस्तावों पर फैसला किया जाएगा.
उन्होंने कहा, “राज्य सरकार हमें टैक्स में कुछ सब्सिडी दे सकती है. लेकिन वह हमारे लिए पर्याप्त नहीं होगी. इसलिए सरकार हमारी बसों को अपने अधीन ले ले.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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