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Wednesday, 22 July, 2026
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लाठीचार्ज के बाद दिल्ली के अस्पतालों का हाल: फ्रैक्चर, खून के थक्के और सिर पर गंभीर चोटें

सीजेपी के मार्च के दौरान घायल हुए कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी LNJP, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और RML अस्पताल लाए गए. इनमें से ज्यादातर को अगली सुबह छुट्टी दे दी गई.

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नई दिल्ली: फ्रैक्चर, खून के थक्के, गहरे कट और सिर पर चोट. संसद तक मार्च निकाल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कई प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों के लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद अस्पताल पहुंच गए.

दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह तक लोक नायक अस्पताल (एलएनजेपी) में कम से कम 30, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 38 और राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में 65 लोगों को भर्ती कराया गया था.

एलएनजेपी में पुणे की प्रदर्शनकारी शाओनी बुआ इमरजेंसी वार्ड में अपना इलाज करा रही थीं. उनके पैरों और पीठ पर कई चोटें थीं. शरीर पर कई जगह खून के बड़े-बड़े थक्के दिखाई दे रहे थे.

शाओनी ने कहा, “इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर ने मुझे एक्स-रे कराने को कहा है. उन्हें शक है कि मेरे शरीर के कई हिस्सों में फ्रैक्चर और खून के बड़े थक्के हैं.”

उनके आगे लाइन में महाराष्ट्र के भंडारा जिले के रहने वाले कानून के छात्र वैभव खड़े थे. वैभव ने दिप्रिंट से कहा, “पहले मुझ पर लाठीचार्ज हुआ, फिर मुझे संसद मार्ग थाने ले जाया गया, जहां कई हिरासत में लिए गए लोगों के सामने दिल्ली पुलिस ने मुझे बुरी तरह पीटा. बाद में डी. राजा सर हमारी मदद के लिए आए.”

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने गालियां दीं और बार-बार ‘और करेगा प्रदर्शन?’ कहते हुए उन्हें लगातार पीटा.

कुछ किलोमीटर दूर लेडी हार्डिंग अस्पताल में रात करीब 11:30 बजे दिल्ली पुलिस की तीन गाड़ियां कई प्रदर्शनकारियों को लेकर पहुंचीं.

अस्पताल की एक डॉक्टर ने कहा, “अभी जो नए मरीज आए हैं, उनके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खून के थक्के हैं. कुछ के नाखून उखड़ गए हैं और उन्हें सर्जिकल इमरजेंसी में रखा गया है. जिन लोगों को खून बहने की समस्या थी, उनका इलाज कर उन्हें जल्दी छुट्टी दे दी गई.”

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के अलावा कई पुलिस अधिकारी भी अस्पताल लाए गए. उन्होंने कहा, “दो पुलिस अधिकारियों को फ्रैक्चर और गहरे कट लगे थे, जबकि बाकी को हल्की चोटें थीं. उनका इलाज कर सोमवार शाम तक छुट्टी दे दी गई.”

आरएमएल अस्पताल में, जहां सबसे ज्यादा घायल लाए गए थे, हालात गंभीर थे. प्रदर्शनकारी राधिका ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी वार्ड में बैठी थीं. उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और काफी खून बह चुका था. उन्होंने कहा, “हम पटेल चौक के पास फुटपाथ पर खड़े थे. पहले पुलिस ने हम पर लाठियां चलाईं, फिर हमारी तरफ आंसू गैस छोड़ी. मेरी आंखों, नाक और गले में बहुत जलन होने लगी. मुझे ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा था, तभी लाठीचार्ज शुरू हो गया.”

राधिका के सिर और हड्डियों में चोट लगी थी. उन्होंने कहा, “डॉक्टर ने अभी तक नहीं बताया कि प्लास्टर लगेगा या ऑपरेशन करना पड़ेगा, लेकिन मुझे बहुत दर्द हो रहा है.”

इसी दौरान, इस रिपोर्टर की मौजूदगी में एक और व्यक्ति को शरीर के ऊपरी हिस्से और चेहरे पर गंभीर चोटों के साथ आरएमएल लाया गया. वहां मौजूद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को दिल्ली पुलिस की पैलेट गन से चोट लगी है.

जब दिप्रिंट ने अस्पताल प्रशासन से इस बारे में जानकारी मांगी, तो उन्होंने उसकी चोट या इलाज को लेकर कोई जानकारी नहीं दी. नाम न बताने की शर्त पर एक डॉक्टर ने कहा कि उस व्यक्ति को इमरजेंसी वार्ड के सर्जिकल विंग में ले जाया जा रहा है. दिल्ली पुलिस के बयान के मुताबिक, सोमवार के प्रदर्शन में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए.

पुलिस ने कहा कि “प्रदर्शनकारियों ने अनुशासनहीन, आक्रामक और हिंसक व्यवहार किया.”

दिल्ली पुलिस के बयान में कहा गया, “बार-बार चेतावनी और कानूनी निर्देश देने के बावजूद प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे और लागू निषेधाज्ञा का जानबूझकर उल्लंघन किया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और दूसरी चीज़ें फेंकीं, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिस और दूसरी सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और बड़े स्तर पर हिंसा की. इससे कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ.”

मंगलवार सुबह तक इलाज के बाद करीब 80 छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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