नई दिल्ली: इंटरनेट पर ‘अवंती की आजी’ के नाम से मशहूर कुमुद नागराल अब रिटायर्ड डॉक्टर से डिजिटल सेलिब्रिटी बन गई हैं. अल्ज़ाइमर बीमारी शुरू होने के बाद उनकी याददाश्त और ध्यान धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन जैसे ही कैमरा रिकॉर्डिंग शुरू करता है, वह पूरी तरह एक्टिव हो जाती हैं. इंस्टाग्राम क्रिएटर अवंती नागराल की दादी कुमुद अपनी इस नई भूमिका को बहुत गंभीरता से निभाती हैं.
अवंती कहती हैं, “जैसे ही मैं आजी (दादी) के सामने कैमरा रखती हूं, वह तुरंत एक्टिव हो जाती हैं. मुझे लगता है कि उन्हें समझ आता है कि उनकी बातें दूसरे लोग देख और सुन रहे हैं, उनकी उनके प्रति एक जिम्मेदारी है, और यही चीज उन्हें एक अलग तरह से जिंदा महसूस कराती है.”
93 साल की यह इन्फ्लुएंसर लोगों के साथ अपनी ज़िंदगी का एक्सपीरियंस और सीख शेयर करती हैं. वह ऐसे सवालों पर भी खुलकर बात करती हैं, जिन्हें आम लोग अक्सर टैबू (खुलकर न बोलने वाले) विषय मानते हैं. यौन सुख (Sexual Pleasure) से लेकर डेटिंग ऐप्स तक, वह हर मुद्दे पर अपनी राय रख चुकी हैं. आजी ने अंतरजातीय शादी का समर्थन करते हुए कहा, “आप किसी जाति से नहीं, इंसान से शादी करते हैं.”
शुरुआत में अवंती ने अपनी दादी के साथ बिताए कुछ मजेदार पल रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर डाले थे. धीरे-धीरे यह एक अलग इंस्टाग्राम अकाउंट बन गया, जिसके आज 14,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और वह अकेली नहीं हैं. पिछले कुछ सालों में इंस्टाग्राम पर ‘ग्रैनफ्लुएंसर्स’ का चलन तेज़ी से बढ़ा है. यह शब्द उन बुजुर्गों के लिए इस्तेमाल होता है, जो सोशल मीडिया पर अपनी सीख, राय, लाइफस्टाइल या फैशन शेयर करते हैं.
भारत में यह ट्रेंड ऐसे बढ़ा है कि कई युवा इन्फ्लुएंसर अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ होने वाली बातचीत को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. इससे दो पीढ़ियों को जोड़ने वाला कंटेंट तैयार हो रहा है.
ऐसे समय में, जब शहरी भारत में अकेले रहना, DINKS (डबल इनकम, बिना बच्चों वाले कपल) और छोटे परिवार (न्यूक्लियर फैमिली) आम होते जा रहे हैं, तब युवा इन्फ्लुएंसर अपने फॉलोअर्स से जुड़ने के लिए पुराने संयुक्त परिवारों की ओर लौट रहे हैं. वे पारंपरिक सीख और अनुभव को सोशल मीडिया की दुनिया के साथ जोड़ रहे हैं.
अहमदाबाद (गुजरात) के MICA School of Ideas में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम की प्रमुख और प्रोफेसर फाल्गुनी वसावड़ा-ओज़ा कहती हैं, “ऑनलाइन इतना ज्यादा कंटेंट है कि अब कंटेंट की भीड़ हो गई है, लेकिन हर तरह के कंटेंट के लिए एक अलग जगह होती है, और दो पीढ़ियों को जोड़ने वाला कंटेंट भी उसी का हिस्सा है.”
अवंती की आजी
कुमुद नागराल की ऑनलाइन पहचान की शुरुआत अक्टूबर 2020 में हुई, जब उनके पति का निधन हो गया. अपनी ज़िंदगी में पहली बार अवंती ने अपनी दादी को सिर्फ “दादा-दादी” की जोड़ी का हिस्सा नहीं, बल्कि कुमुद नाम की एक अलग इंसान के रूप में जाना. तभी अवंती ने फैसला किया कि वह अपनी आजी (दादी) के साथ ज्यादा समय बिताएंगी, ताकि उनका दुख कम हो और उन्हें बेहतर तरीके से जान सकें.
कुमुद ऐसी फिल्में चुनती थीं, जिनमें आधुनिक और प्रगतिशील मराठी कहानियां होती थीं और दोनों उन्हें साथ बैठकर देखती थीं.
अवंती 2016-17 से ही यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बना रही हैं. शुरुआत में वह म्यूजिक कवर, परफॉर्मेंस वीडियो और व्लॉग पोस्ट करती थीं. उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत, चर्च/गॉस्पेल और ब्रॉडवे समेत कई तरह के संगीत की ट्रेनिंग ली है और 2015 से अपने ओरिजिनल गाने भी बना रही हैं. समय के साथ उनके कंटेंट में लाइफस्टाइल, शिक्षा और सामाजिक मुद्दे भी शामिल हो गए.
एक दिन अवंती को लगा कि वह अपनी दादी को कुछ बिल्कुल अलग दिखा सकती हैं. उन्होंने फोन कैमरा लगाया और उस समय के दो सबसे विवादित म्यूजिक वीडियो—Cardi B का WAP और Nicki Minaj का Anaconda—पर कुमुद का रिएक्शन रिकॉर्ड किया. इसका नतीजा सोशल मीडिया पर जबरदस्त हिट रहा.
करीब 7 मिनट के इस वीडियो में अवंती अपनी महाराष्ट्र में जन्मी दादी को इन गानों के बोल प्यार से समझाती हैं, लेकिन कुमुद ने वैसा हैरानी भरा या पुराने विचारों वाला रिएक्शन नहीं दिया, जैसा लोग एक भारतीय बुजुर्ग से उम्मीद कर रहे थे. इसके बजाय उन्होंने बहुत सोच-समझकर अपनी राय रखी.
वीडियो में कुमुद कहती हैं, “मुझे लगता है कि यह ठीक है, लेकिन इतनी ज्यादा सेक्सुअलिटी दिखाने की क्या ज़रूरत है? मैं पुराने विचारों वाली नहीं हूं, लेकिन किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती.”
इसके बाद कुमुद ने पूछा कि क्या पुरुषों पर भी ऐसा कंटेंट बनाया जाता है. उन्होंने कहा, “हम सिर्फ महिलाओं के शरीर और उनकी सेक्सुअलिटी की बात कर रहे हैं. क्या पुरुषों पर भी ऐसा कुछ है? मुझे भी दिखाइए.”
इस वीडियो को यूट्यूब पर 12 लाख (1.2 मिलियन) से ज्यादा और इंस्टाग्राम पर 3.95 लाख (395,000) से ज्यादा बार देखा जा चुका है. यही वीडियो वायरल होने के बाद अवंती ने कुमुद के लिए अलग इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया. कैमरा, रिकॉर्डिंग और पोस्ट करने का काम अवंती करती थीं, लेकिन वीडियो में आने वाले विचार और बातें पूरी तरह आजी की होती थीं.
अपने वीडियो में कुमुद इस सोच को चुनौती देती हैं कि बुजुर्ग हमेशा पुराने विचारों वाले और चुप रहने वाले होते हैं. वह पीरियड्स, यौन शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी जैसे विषयों पर खुलकर बात करती हैं. उनके फॉलोअर्स अक्सर उनसे सलाह मांगते हैं और वह हमेशा प्यार और समझदारी से जवाब देती हैं.
जहां अवंती अपनी दादी के साथ मिलकर संस्कृति और प्रगतिशील सोच पर बातचीत करती हैं, वहीं एक दूसरे कंटेंट क्रिएटर ने कैमरे के जरिए दो पीढ़ियों के बीच होने वाली मजेदार नोकझोंक को दिखाना शुरू किया.
कुनाल भान और उनकी नानी: मजेदार बातों से पीढ़ियों की दूरी कम करना
जब अभिनेता और कंटेंट क्रिएटर कुनाल भान कोरोना लॉकडाउन के दौरान पहली बार अपनी नानी फ्लोरीना मारिया पिंटो के साथ रहने लगे, तो दोनों के बीच कोई खास मेल नहीं था. लेकिन यही रोज की नोकझोंक बाद में पिंटो को सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय बना गई.
भान बताते हैं, “नानी हमेशा मुझसे बहुत रूखा व्यवहार करती थीं, लेकिन जब मैं अपनी मां से वीडियो कॉल करता था, तो वह बहुत प्यार से बात करती थीं. तब मुझे लगा कि अगर मैं उनके सामने कैमरा रख दूं, तो शायद वह मेरे साथ भी अच्छा व्यवहार करेंगी. और सच में ऐसा ही हुआ.”
जो शुरुआत में सिर्फ एक मजेदार तरीका था, वही धीरे-धीरे लोगों को इतना पसंद आया कि लाखों लोग दोनों की नोकझोंक देखने लगे. पिंटो बिना मुस्कुराए कुनाल की हर बात का ऐसा जवाब देती थीं कि लोग हंसने लगते थे. एक वीडियो में, जब कुनाल उन्हें Gen Z की भाषा समझा रहे थे, तो पिंटो ने कहा, “इससे कोई मदद नहीं मिली…बिल्कुल तुम्हारी तरह.”
हालांकि, इंटरनेट पर लोग इसे दोनों का एक्ट मानते हैं, लेकिन भान कहते हैं कि यही उनका असली रिश्ता है. वह हंसते हुए कहते हैं, “लोग गलत समझ रहे हैं. नानी सिर्फ मजाकिया नहीं हैं, वह सच में मेरी खिंचाई करती हैं. यह सब बिल्कुल असली है.”
भान बताते हैं कि उनके परिवार की सभी महिलाएं ऐसी ही तेज जवाब देने वाली हैं. “मेरी मां भी ऐसी हैं, लेकिन नानी तो उनकी मां हैं, इसलिए उनका अंदाज उससे भी ज्यादा है.”
भान अपनी नानी के मजेदार जवाबों का पूरा फायदा उठाते हैं. उनकी सबसे लोकप्रिय सीरीज ‘Pick-up Lines with the Grandmother’ है, जिसमें वह अपनी नानी पर अलग-अलग पिक-अप लाइन आजमाते हैं, लेकिन नानी हर बार तुरंत उन्हें मजेदार जवाब देकर टाल देती हैं.
एक वीडियो में भान कहते हैं, “क्या आप खाली ऑटो-रिक्शा हैं? क्योंकि मैं पूरी जिंदगी से आपका इंतजार कर रहा हूं.”
इस पर नानी तुरंत जवाब देती हैं, “हां, और उनकी तरह मैं भी तुम्हें मना कर दूंगी.”
इन वीडियो के कमेंट सेक्शन किसी डिजिटल बैठक की तरह होते हैं, जहां लोग खूब तारीफ और मजेदार टिप्पणियां करते हैं. एक यूजर ने लिखा, “नानी तो कई पीढ़ियों से लोगों का दिल तोड़ रही हैं.”
शुरुआत में पिंटो को सोशल मीडिया की समझ नहीं थी, लेकिन जब एक रिश्तेदार ने वीडियो में पहने उनके कपड़ों की तारीफ करने के लिए फोन किया, तब उन्हें एहसास हुआ कि लोग सच में उनके वीडियो देख रहे हैं.
इस पर भान मजाक में कहते हैं, “बस उसी दिन से नानी ने मुझे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया.”
सिमरन और सहगल परिवार
एक और क्रिएटर जिन्होंने अंतर-पीढ़ीगत कंटेंट को नए स्तर पर पहुंचाया है, वह हैं सिमरन सहगल. 22-वर्षीय इस क्रिएटर ने अपने पूरे परिवार को अपने कंटेंट का हिस्सा बना लिया है और उनके फॉलोअर्स इसे बेहद पसंद करते हैं.
सहगल की डिजिटल यात्रा लगभग संयोग से शुरू हुई, जब उनकी मां मोना के साथ बनाया गया एक “आउटफिट चेक” वीडियो वायरल हो गया और उसे 60 लाख से अधिक व्यूज़ मिले.
इस बड़ी सफलता ने उन्हें एहसास कराया कि परिवार के सदस्यों के साथ बनाया गया कंटेंट कितनी संभावनाएं रखता है. इसके बाद उन्होंने अपनी दादी स्वर्णा को भी वीडियो में शामिल किया. धीरे-धीरे परिवार के बाकी सदस्य भी इसमें शामिल हो गए. उनके पिता राजीव और चाचा संजीव भी अब उनकी रील्स के नियमित पात्र बन चुके हैं. संयुक्त परिवार का यह माहौल—यानी “सहगल परिवार”—दर्शकों को बेहद पसंद आता है.
एक कॉमेन्ट था, “अपने घर में कोई जगह दे दो, बहन बना लो अपनी.”
दूसरा था, “सबसे कूल परिवार का अवॉर्ड सहगल परिवार को जाता है.”
सहगल अक्सर पर्दे के पीछे के वीडियो भी साझा करती हैं, जिनमें उनके परिवार के सदस्य अपने सबसे स्वाभाविक रूप में दिखाई देते हैं. उनके दर्शकों को यही पारिवारिक हंसी-मज़ाक सबसे ज़्यादा पसंद आता है. सहगल इसका श्रेय अपने पंजाबी स्वभाव को देती हैं.
अब उनके कंटेंट के नियमित सदस्य बन चुके सहगल परिवार ट्रेंडिंग डांस करते हैं, वायरल चुनौतियों में हिस्सा लेते हैं, खेल खेलते हैं और परिवार के सहज पलों और बातचीत को रिकॉर्ड करते हैं. घर के भीतर स्वर्णा सहगल सबसे लोकप्रिय सदस्य बन गई हैं, जिन्हें प्यार से “बैडी दादी” कहा जाता है—एक भूमिका जिसे वह पूरे उत्साह से निभाती हैं.
एक वीडियो में सहगल अपनी दादी को अमेरिकी टीवी सीरीज़ Euphoria के बारे में बताती हैं और उन्हें शो के प्रमुख किरदार मैडी की तरह तैयार करती हैं.
सिमरन और सहगल परिवार
एक और क्रिएटर जिन्होंने अंतर-पीढ़ीगत कंटेंट को नए स्तर पर पहुंचाया है, वह हैं सिमरन सहगल. 22 वर्षीय इस क्रिएटर ने अपने पूरे परिवार को अपने कंटेंट का हिस्सा बना लिया है और उनके फॉलोअर्स इसे बेहद पसंद करते हैं.
सहगल की डिजिटल यात्रा लगभग संयोग से शुरू हुई, जब उनकी मां मोना के साथ बनाया गया एक “आउटफिट चेक” वीडियो वायरल हो गया और उसे 60 लाख से अधिक व्यूज़ मिले.
इस बड़ी सफलता ने उन्हें एहसास कराया कि परिवार के सदस्यों के साथ बनाया गया कंटेंट कितनी संभावनाएं रखता है. इसके बाद उन्होंने अपनी दादी स्वर्णा को भी वीडियो में शामिल किया. धीरे-धीरे परिवार के बाकी सदस्य भी इसमें शामिल हो गए. उनके पिता राजीव और चाचा संजीव भी अब उनकी रील्स के नियमित पात्र बन चुके हैं. संयुक्त परिवार का यह माहौल—यानी “सहगल परिवार”—दर्शकों को बेहद पसंद आता है.
एक कॉमेन्ट था, “अपने घर में कोई जगह दे दो, बहन बना लो अपनी.”
दूसरा था, “सबसे कूल परिवार का अवॉर्ड सहगल परिवार को जाता है.”
सहगल अक्सर पर्दे के पीछे के वीडियो भी साझा करती हैं, जिनमें उनके परिवार के सदस्य अपने सबसे स्वाभाविक रूप में दिखाई देते हैं. उनके दर्शकों को यही पारिवारिक हंसी-मज़ाक सबसे ज़्यादा पसंद आता है. सहगल इसका श्रेय अपने पंजाबी स्वभाव को देती हैं.
अब उनके कंटेंट के नियमित सदस्य बन चुके सहगल परिवार ट्रेंडिंग डांस करते हैं, वायरल चुनौतियों में हिस्सा लेते हैं, खेल खेलते हैं और परिवार के सहज पलों और बातचीत को रिकॉर्ड करते हैं. घर के भीतर स्वर्णा सहगल सबसे लोकप्रिय सदस्य बन गई हैं, जिन्हें प्यार से “बैडी दादी” कहा जाता है—एक भूमिका जिसे वह पूरे उत्साह से निभाती हैं.
एक वीडियो में सहगल अपनी दादी को अमेरिकी टीवी सीरीज़ Euphoria के बारे में बताती हैं और उन्हें शो के प्रमुख किरदार मैडी की तरह तैयार करती हैं.
ग्लोबल ग्रैनफ्लुएंसर्स एक ब्रांड हैं
वैश्विक स्तर पर ग्रैनफ्लुएंसर्स इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं कि उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति समाज के हाशिये पर चला जाता है. दिवंगत आइरिस एप्फेल, जो अपनी रंगीन शैली और बड़े गोल चश्मों के लिए प्रसिद्ध थीं, या दिवंगत हेलेन रूथ एलम, जिन्हें बैडीविंकल के नाम से जाना जाता था, स्वतंत्र व्यक्तिगत ब्रांड मानी जाती थीं. उन्होंने ऑनलाइन केवल सहायक भूमिका निभाने के बजाय खुद को मुख्य पात्र बनाया. उदाहरण के लिए, बैडीविंकल ने अनोखे और साहसी कपड़े पहनकर बॉडी पॉज़िटिविटी को बढ़ावा दिया और उम्र के आधार पर होने वाले भेदभाव का विरोध किया, जिससे उनके लाखों फॉलोअर्स बने. वैश्विक ग्रैनफ्लुएंसर्स का कंटेंट मुख्य रूप से आत्म-अभिव्यक्ति, लग्ज़री फ़ैशन, फिटनेस या अकेले दुनिया घूमने पर केंद्रित होता है. यह जानबूझकर उन रूढ़ियों को तोड़ता है जो बढ़ती उम्र को शारीरिक गिरावट और सामाजिक अदृश्यता से जोड़ती हैं.
भारतीय ग्रैनफ्लुएंसर कंटेंट इससे बिल्कुल अलग है. भारत में वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल मौजूदगी व्यक्तिगत रूप से कम दिखाई देती है. उनकी ऑनलाइन पहचान उनके पोते-पोतियों के साथ मिलकर बनाई जाती है. यह कंटेंट परिवार से अलगाव नहीं, बल्कि परिवार की विभिन्न पीढ़ियों के बीच के रिश्तों को दिखाता है.
दूसरे शब्दों में, जहां वैश्विक ग्रैनफ्लुएंसर सोशल मीडिया के माध्यम से कहते हैं, “देखिए, मैं अपने दम पर कितना जीवंत हूं” वहीं भारतीय ग्रैनफ्लुएंसर कहते हैं, “देखिए, हम साथ मिलकर कितने जीवंत हैं.”
पीढ़ियों के बीच की दूरी कम करना
अपने दादा-दादी को सोशल मीडिया की दुनिया से परिचित कराकर युवा क्रिएटर्स ने संवाद के लिए एक ऐसा मंच तैयार किया है, जिसकी अनुमति पारंपरिक भारतीय पारिवारिक ढांचा हमेशा नहीं देता.
भान के लिए अपनी नाना के साथ कंटेंट बनाना उनके रिश्ते को बदल चुका है. पहले उनकी बातचीत दूर के रिश्तेदारों या पुराने किस्सों तक सीमित रहती थी. अब दोनों नियमित रूप से ज़ेन ज़ी स्लैंग और पॉप संस्कृति पर चर्चा करते हैं—भान अपनी पीढ़ी की भाषा उन्हें सिखाते हैं और फिर उनकी राय पूछते हैं.
अवंती और उनकी आजी को भी ऐसे विषयों पर बातचीत करने का अवसर मिला है, जिन पर शायद वे कभी खुलकर बात नहीं कर पाते—चाहे तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में समय की कमी हो, असहज विषय हों या वास्तविक बातचीत की जगह लगातार (डूम)स्क्रॉलिंग करने की आदत.
अवंती कहती हैं, “जिन बातों पर मैं शायद अपने माता-पिता से खुलकर बात नहीं कर पाती, अब मैं आजी से कर सकती हूं और फिर वही बातचीत मेरे माता-पिता तक भी पहुंच जाती है. मुझे लगता है कि इसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है.”
सोशल मीडिया पर अपनी दादी के साथ जुड़ने से अवंती और उनके पूरे परिवार ने कुमुद को एक नए रूप में जाना है. इन वीडियो ने सेक्स एजुकेशन और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को सहज और कम डरावना बना दिया है.
सहगल भी मानती हैं कि कंटेंट क्रिएशन ने उनके परिवार को और करीब ला दिया है.
उन्होंने कहा, “कभी-कभी मैं रात 2 बजे अपने परिवार के साथ शूटिंग कर रही होती हूं. अगर रील्स नहीं होतीं, तो शायद हम इतना समय साथ नहीं बिताते. मेरे एक वीडियो में मैं अपने पिता से पूछती हूं कि वह चाहते हैं कि मैं किस तरह के व्यक्ति से शादी करूं. यह कितना अजीब सवाल है. अगर कैमरा नहीं होता, तो शायद हम कभी यह बातचीत नहीं करते.”
इस पर उनके पिता ने जवाब दिया, “मैं तुम्हारे लिए वही ढूंढूंगा जो मुझे सही लगे.”
एक डिजिटल अभिलेख तैयार करना
जो शुरुआत महामारी के दौरान एक साधारण शौक के रूप में हुई थी, वह अब पारिवारिक निकटता को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल चुकी है. इससे यह सवाल उठता है कि बुज़ुर्ग परिवारजनों के साथ कंटेंट बनाना किस हद तक उचित है. जब घर के भीतर रिकॉर्ड किया गया वीडियो ऑनलाइन पोस्ट होता है, तो वह अनजाने में निजी सीमाओं को कम कर देता है. इससे घर की रोज़मर्रा की बातचीत, कमज़ोरियाँ और बुढ़ापे की वास्तविकताएँ डिजिटल उपभोग का हिस्सा बन जाती हैं.
लेकिन इन क्रिएटर्स के लिए यह प्रक्रिया उनके दादा-दादी के व्यक्तित्व, हास्य और ज्ञान को सहेजने का माध्यम भी बन गई है.
अवंती के लिए ये वीडियो दोनों के लिए यादों का सुंदर अभ्यास हैं. वह अपने साथ बिताए समय का एक डिजिटल अभिलेख बनाना चाहती हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे बस एक ही अफसोस है कि मैंने यह पहले शुरू नहीं किया. अल्ज़ाइमर के उनकी याददाश्त पर असर डालने से पहले मुझे आजी के साथ सिर्फ कुछ ही साल मिले.”
अवंती कुछ वीडियो में आजी की याददाश्त कम होने के बारे में भी बात करती हैं. एक वीडियो में वह पूछती हैं कि वह अपनी स्मृति की समस्या से कैसे निपटती हैं.
आजी जवाब देती हैं, “तुम्हें किसी एक बात (याद) को किसी दूसरी चीज़ (वस्तु) से जोड़ना होता है.”
एक आदर्श अभिभावकीय व्यक्तित्व
जैसे-जैसे इन ग्रैनफ्लुएंसर अकाउंट्स के व्यूज़ लाखों तक पहुंचे, उनके फॉलोअर्स ने स्वाभाविक रूप से उनके साथ एकतरफा भावनात्मक (parasocial) रिश्ते बना लिए. बहुत से युवा दर्शक, जो अपने दादा-दादी से दूर पले-बढ़े या उन्हें कम उम्र में खो चुके हैं, उनके लिए कुमुद, फ्लोरीना और स्वर्णा जैसी हस्तियाँ एक आदर्श अभिभावकीय व्यक्तित्व बन गई हैं.
फॉलोअर्स इन बुज़ुर्ग क्रिएटर्स को दूर बैठे इंटरनेट सेलिब्रिटी की तरह नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं. वे उन्हें निजी सांत्वना, मान्यता और जीवन संबंधी सलाह पाने के लिए सीधे संदेश (DM) भेजते हैं.
अवंती इस गहरे जुड़ाव को बहुत सुंदर ढंग से कुमुद के “सामूहिक इंटरनेट पोते-पोतियां” कहती हैं.
उन्होंने कहा, “ऐसा कंटेंट दर्शकों से जुड़ता है क्योंकि बहुत से भारतीय वयस्क अभी भी अपने परिवार के साथ रहते हैं. उनका अपने माता-पिता और दादा-दादी से गहरा रिश्ता होता है. यही भावना इस कंटेंट को आकर्षक बनाती है.”
भारतीय परिवारों का घनिष्ठ रिश्ता अंतर-पीढ़ीगत रील्स को या तो बेहद संबंधित या प्रेरणादायक बना देता है. इन वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी अचानक मिली डिजिटल प्रसिद्धि को भी अपने-अपने अनोखे अंदाज़ में अपनाया है.
उदाहरण के लिए, फ्लोरीना मारिया पिंटो ने अपनी डिजिटल सेलिब्रिटी की पहचान को पूरे आत्मविश्वास के साथ स्वीकार किया है. भान एक घटना याद करते हैं, जब वह अपनी दादी के साथ टीवी पर कौन बनेगा करोड़पति देख रहे थे और स्क्रीन पर इंस्टाग्राम से जुड़ा एक सवाल आया.
भान ने हंसते हुए कहा, “उन्होंने बहुत सहजता से मेरी ओर देखा और कहा, ‘क्या तुम्हें लगता है कि अमिताभ बच्चन को भी मेरे जितने व्यूज़ मिलते होंगे?’ उसी पल मुझे एहसास हुआ कि उनके मन में अब वह खुद को सचमुच स्टार मानने लगी हैं.”
(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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