नई दिल्ली: पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया.
राउज एवेन्यू कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सोमवार सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाया. सिंह अदालत में मौजूद थे. फैसले का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है.
पूर्व बीजेपी सांसद सिंह की ओर से वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान अदालत में पेश हुए, जबकि महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन पेश हुईं.
एफआईआर पूर्व भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 34 (साझा इरादा) के तहत दर्ज की गई थी.
एफआईआर में सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर के नाम थे.
मई 2024 में अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी (ACMM) प्रियंका राजपूत की अदालत ने पांच शिकायतकर्ताओं से जुड़े मामलों में आईपीसी के तहत सिंह के खिलाफ आरोप तय किए, जबकि एक शिकायतकर्ता से जुड़े मामले में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया. तोमर पर एक शिकायतकर्ता के मामले में केवल आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया.
कैसे आगे बढ़ा मामला
जनवरी 2023 में, जब नई संसद की इमारत का उद्घाटन हो रहा था, उससे कुछ किलोमीटर दूर ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के साथ पहलवान विनेश फोगाट ने सिंह पर यौन उत्पीड़न और पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उसी महीने सरकार की ओर से आरोपों की जांच के लिए एक निगरानी समिति बनाने का वादा किए जाने के बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था.
अप्रैल में कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रदर्शन दोबारा शुरू हुए. इसके बाद पहलवानों ने एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस द्वारा दो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद उनकी याचिकाओं का निपटारा कर दिया.
28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस की एफआईआर में सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव तोमर के नाम थे. यह FIR सात शिकायतकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थी, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल थी.
सिंह के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून) का मामला मई 2025 में पटियाला कोर्ट में बंद कर दिया गया. ऐसा नाबालिग शिकायतकर्ता के पिता की ओर से मामले को वापस लेने की मांग के बाद हुआ.
FIR में शिकायत करने वाली एक महिला ने कहा कि “सभी महिला खिलाड़ी जब भी अपने-अपने कमरों से बाहर जाती थीं, तो वे समूह में जाती थीं ताकि आरोपी से अकेले मिलने से बच सकें.”
उसने कहा था कि एक अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान बृजभूषण ने पहली बार उसका यौन उत्पीड़न किया था. उसने आरोप लगाया था कि बृजभूषण ने उसकी सांस जांचने के बहाने उसकी टी-शर्ट ऊपर की और अपना हाथ उसके पेट पर नीचे की ओर ले गया.
उसने शिकायत में कहा, “मैं चाहती हूं कि आरोपी को मेरा और कई अन्य महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने के लिए सजा दी जाए, जिनका वह अपनी ताकत और पद के कारण शोषण करता है. आरोपी को यौन उत्पीड़न और शोषण की और घटनाएं करने से रोकना जरूरी है और मैं अनुरोध करती हूं कि उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और उसे जेल भेजा जाए (sic).”
एक अन्य शिकायतकर्ता ने कहा कि यौन उत्पीड़न और पीछा किए जाने की वजह से वह आज तक मानसिक रूप से परेशान है. उसने कहा, “आरोपी की ओर से किए गए गलत कामों और यौन उत्पीड़न के कारण मैं इतनी परेशान और मानसिक रूप से दुखी थी कि अलग-अलग प्रतियोगिताओं में अपना ध्यान लगाना और अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करना मेरे लिए मुश्किल हो गया था.”
मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने पांच शिकायतकर्ताओं से जुड़े मामलों में सिंह के खिलाफ IPC के तहत आरोप तय किए, जबकि एक शिकायतकर्ता से जुड़े मामले में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया. तोमर पर एक शिकायतकर्ता के मामले में केवल आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया.
दोनों आरोपी मुकदमे के दौरान जमानत पर रहे. दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सिंह को उनके मजबूत गढ़ कैसरगंज से टिकट नहीं दिया था. इसके बजाय BJP ने उनके बेटे करण भूषण सिंह को चुनाव का टिकट दिया, जिन्होंने यह सीट जीत ली.
खेल मंत्रालय ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए एक निगरानी समिति बनाई थी. यह समिति कुछ समय के लिए महासंघ का काम भी देख रही थी.
अंतिम दलीलों के दौरान सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ताओं की गवाही में महत्वपूर्ण अंतर थे—कुछ शिकायतकर्ताओं ने तारीख और जगह बदल दी थीं. इसके अलावा, कथित घटनाओं का क्रम, जिरह के दौरान और अदालत में दी गई उनकी गवाही में पहले सरकार की ओर से बनाई गई निगरानी समिति के सामने दिए गए हलफनामों से अलग था.
सिंह की ओर से पेश वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान ने कुछ आरोपों के संबंध में ‘अलीबाई’ की दलील भी दी. उन्होंने कहा कि अभियोजन के रिकॉर्ड से ही पता चलता है कि सिंह उन जगहों पर मौजूद नहीं थे, जहां कुछ घटनाएं होने का आरोप लगाया गया था. उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष से अलीबाई साबित करने की मांग करने से पहले अभियोजन पक्ष को यह साबित करना था कि सिंह उस जगह पर मौजूद थे.
उन्होंने आगे कहा कि शिकायतकर्ताओं ने कथित घटनाओं की कई साल तक शिकायत नहीं की थी. उन्होंने इस दौरान उनके व्यवहार का हवाला देते हुए आरोपों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया, जिसमें सिंह के साथ सार्वजनिक जगहों पर बातचीत और इंटरव्यू और सोशल मीडिया पर दिए गए बयान शामिल थे.
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